आसूँ मत बहाना

आसूँ मत बहाना

कल ही एक आर्टिकल पढ़ा,जिसमें लिखा हुआ था कि आज कल लोग आँसू बहाने में हिचकते हैं ।रोना नहीं चाहते, अपने आँसू किसी को दिखाना नहीं चाहते ।क्योंकि अगर किसी के सामने गलती से भी आँसू निकल आए,तो लोग उसे कमजोर समझ लेंगें ।तो इसमें क्या बुराई है?हर इन्सान चाहे वह स्त्री हो या पुरुष, कहीं न कहीं, कभी न कभी, किसी रूप में कमजोर जरूर पड़ता है ।दिल ही दिल में घुटता रहता है ।किसी से कुछ कहता नहीं, पता नहीं लोग क्या सोचेगें या उसकी बातों पर हँसेंगे ।रो सकता नहीं, तो आखिर ये गुस्सा, उदासी ,झल्लाहट कैसे और कहाँ निकालें ?        


क्या मजबूत दिखने के लिए गंभीर चेहरा बनाकर रखना जरूरी है । खास कर हमारे पुरुषप्रधान समाज में, जहाँ पुरूषों का रोना उनको नामर्द साबित करता है और लड़कियों का रोना उन्हें कमजोर दिखाता है।एक विज्ञापन आया था, जहाँ कहा जाता है कि, "लड़के रोते नहीं है ",आप सबने भी देखा होगा ।बचपन से ही लड़कों को यही सीख दी जाती है कि तुम्हें रोना नहीं है, तुम रो नहीं सकते ,मजबूत बनो। ठीक है, मजबूत बनना है,पर शरीर से और मन से मजबूत बनो।ये नहीं कि कुछ परेशानी है, किसी से कुछ कहना हो,दुख दर्द बाँटना हो,खुशी बाँटनी हो और आँसू निकल आए, तो आप गलत हैं ।


पुरूषों को भी अपना मन हल्का करने की इजाज़त है।जब ईश्वर ने ऐसा कोई नियम नहीं बनाया, तो फिर हमने कैसे बना दिया ।लड़कियाँ रोए ,तो कमजोर हैं, कुछ नहीं होगा इनसे।स्त्रियाँ  भावुक और संवेदनशील होती है ।किसी भी बात पर इनकी आँखे जल्द नम हो जाती हैं पर इसका मतलब ये नहीं कि वे शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर हैैं ।आज हम लड़कियाँ किसी भी क्षेत्र में लड़को से पीछे नहीं हैं  ।इसलिए रोने से कमजोर होने का कोई सम्बन्ध नहीं है ।


हमें हमारी गलत धारणाओं को बदलने की जरूरत है ।क्या एक पिता अपनी बेटी की विदाई में रो नहीं सकता ?बच्चे के जन्म होने पर एक पिता की आँखों से आँसू छलक आए तो क्या वह गलत है?जीवन-संगिनी के साथ अपना दर्द बयां करने में अगर वह अपने आँसू न रोक पाए ,तो क्या वह कमजोर है?माँ को गले लगाते समय अगर वह भावुक हो जाए तो क्या वह नामर्द है?


मैंने  ऐसे बहुत से लोगोंं को देखा हैं, जो हँसना तो बहुत दूर, मुस्कुराने में भी कंजूसी करते हैं ।मैं उनलोगों से पूछना चाहती हूँ, आखिर मुस्कुराने में कैसी कंजूसी? न ही इसे कहीं से खरीदना है और न ही कहीं बेचना है,फिर कैसी कंजूसी? बल्कि अगर हम खुलकर हँसेंगे या फिर अपनी मुस्कराहट से किसी के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान ही लेते आए,तो वह हमारी सबसे बड़ी कमाई होगी।आज के जमाने में लोगों को रूलाना आसान है ,पर हँसाना एक बहुत बड़ी चुनौती है।तो क्यों न हम हँसी को चुने ,खुद भी हँसे और दूसरों के चेहरे की उदासी को भी दूर करें ।


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