आत्मनिर्भर बेटियाँ -Blog Post By Ruchi Singhal

आत्मनिर्भर बेटियाँ -Blog Post By Ruchi Singhal

कहते हैं लोग कि बेटी को साक्षर बनाओ, लेकिन मैं कहता हूँ कि बेटी को साक्षर बनाने के साथ- साथ, उसे आत्मनिर्भर भी बनाओ| क्योंकि वो आत्मनिर्भर रहेगी तो उसे किसी का मुंह ताकना नहीं पड़ेगा,अपने पैरों पे खड़ी होगी तो अपने जीवनसाथी के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकेगी |उसके साथ एक बेहतर जीवन जी सकेगी, वो रख सकेगी अपनी सोच, अपनी अभिव्यक्ति, जो पहले के किसी समय में लड़कियों को नहीं मिलती थी, परिवार वालों ने जो कह दिया वो ही होता था, लेकिन अब समय भी बदला है और सोच भी बदली है, अब मिलने लगी है उड़ान लड़कियों को, तार्किकता की उड़ान, हौसलों की उड़ान, उड़ान तो उड़ान है जैसे पंख मिल गये हो, आसमां में उड़ने के लिए |  

             

क्योंकि आजकल की लड़कियां अपने साथ- साथ अपने बड़ो का, और दूसरों का भी ख्याल रखती है, वो निभाती है अपने सारे कर्तव्य घर के भी और बाहर के भी, किसी को भी शिकायत का मौका नहीं देती|                                         

यही खासियत है कि आजकल की लड़कियां, लड़को से कम नहीं है, और वो अपनी आवाज बुलंद करती है, अन्याय के खिलाफ खड़ी होती है, वो बिना डरे अपने सारे फर्ज निभाती है मायके के भी और सुसराल के भी, इसलिए मैं कहता हूँ कि बेटियों को पढ़ाओ और उसे आत्मनिर्भर बनाओ |             

बहती हुई झरनों की तरह होती है बेटियां,          

दो कुलों को बांधती है बेटियां,                  

ये बेटियां ही तो इतनी प्यारी होती है,            

जो सबकी जान होती है |                   

   

# बेटी

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