आवश्यकता से अधिक तो नहीं सोतीं आप?

आवश्यकता से अधिक तो नहीं सोतीं आप?

सात से आठ घंटे की गहरी नींद लेना न सिर्फ हमारे स्वास्थ्य बल्कि सौंदर्य के लिए भी आवश्यक बात मानी जाती है।

निद्रा की कमी से बहुत सी समस्याएँ मुँह उठाने लगती हैं, जिनमें दिन भर थकान बने रहना, आलस्य, आँखों के चारों ओर काले घेरे, सिरदर्द आदि सामान्य समस्याएँ हैं। कम सोने से मस्तिष्क को सही ढंग से विश्राम नहीं मिल पाता और दिमाग भी थका थका रहता है।

आवश्यकता से कम सोने से भी कई दफा मोटापा भी देखा जाता है।

इसीलिए चिकित्सकों द्वारा सदैव ही आरामदायक कपड़े पहनकर, साफ सुथरे बिस्तर में एक अच्छी और पर्याप्त नींद लेने की सलाह दी जाती है।


परंतु क्या आप जानती हैं कि यदि किसी को आवश्यकता से अधिक नींद आती है और वह नौ घंटे या और भी अधिक सोता है तो ये भी कोई अच्छी बात नहीं मानी जाती और इसके भी दुष्प्रभाव शरीर व मन पर दिखाई देते हैं।

तो अधिक सोने से आपके स्वास्थ्य पर कौन कौन से दुष्प्रभाव पड़ते हैं उसकी एक झलक इस प्रकार है।


डायबिटीज-

यदि आप अधिक सोती हैं तो साधारण सी बात है कि आपकी शारीरिक गतिविधियाँ इससे प्रभावित होंगी ही। किसी भी प्रकार के व्यायाम के लिए आपके पास समय नहीं होगा तो आपके शरीर में शर्करा का लेवल औसत से अधिक बढ़ने का खतरा होगा।अर्थात आपका शुगर लेवल बढ़ जाएगा जिससे मधुमेह या डायबिटीज जैसी बीमारियाँ घेर सकती हैं। खासतौर पर यदि भोजन ग्रहण करने के ठीक बाद आप सो जाती हैं तो यह खतरा और भी बढ़ जाएगा। अतः इस आदत से बचें।


दिल की बीमारी-

एक सर्वे के अनुसार दिन में नौ से ग्यारह घंटे की नींद लेने वाले लोगों में दिल की बीमारी का खतरा 38 प्रतिशत तक अधिक होता है। अतः यदि आपको भी आपका बिस्तर आवश्यकता से अधिक प्यारा है तो सावधान हो जाएँ और अनावश्यक नींद से बचें


अवसाद-

कई बार हम देखते हैं कि अवसादग्रस्त व्यक्तियों की नींद या तो कम हो जाती है या फिर वे अधिक सोने लगते हैं। परंतु इससे विपरीत एक तथ्य यह भी है कि अधिक सोने की वजह से भी हम अवसादग्रस्त हो सकते हैं। जब हम अधिक सोते हैं तो अक्सर अपने आवश्यक काम भी समय पर पूरे नहीं कर पाते, और महत्वपूर्ण कार्यों की प्रतिस्पर्धा की दौड़ में हम अन्य लोगों से पिछड़ने लगते हैं और हीनभावना से ग्रस्त होने लगते हैं। धीरे धीरे यही हीनभावना अवसाद की ओर ढकेलती है।


अधिक सोने से शरीर में सदा आलस्य बना रहता है और किसी कार्य को हम मन से पूरा नहीं कर पाते, और ऐसा होने से कार्य की गुणवत्ता पर अंतर तो पड़ेगा ही।


अतः यदि आप भी आवश्यकता से अधिक सोती हैं तो खुश नहीं बल्कि सावधान होने की आवश्यकता है।


अर्चना सक्सेना

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