अच्छा अच्छा बेटी हुई है !

अच्छा अच्छा बेटी हुई है !

पूजा नई नई मां बनने वाली थी | पहले पहल मां बनने की खुशी पूजा की आंखों में साफ झलक रही थी चेहरे का नूर अलग ही छटा बिखेर रहा था | पूजा के मां बनने की खबर से ससुराल वाले भी बेहद खुश थे | पूजा का पति शनि , बेहद खुश था सभी लोग मिलकर पूजा का खूब ख्याल रखते | गर्भावस्था के दौरान होने वाली छोटी-छोटी परेशानियां तो जैसे छूमंतर हो गई थी समय-समय पर पूजा को खाना-पीना , नाश्ता, फल , दूध और फायदेमंद चीजें दी जाती थीं ताकि बच्चा हष्ट पुष्ट रहे और पूजा को अंदरूनी ताकत मिले वहींं पूजा के मायके में सभी लोग निश्चिंत थे कि अपने ससुराल में कुशल मंगल से हैं और बेहद खुश भी है क्या चाहिए था एक मां को यही ना कि उनकी लाडली बिटिया अपने ससुराल में खुश रहे | हर महीने पूजा डॉक्टर के पास अपना और अपने होंने वाले बच्चे के अच्छे स्वास्थ्य के लिए चेकअप के लिए जाया करती थी | धीरे-धीरे वक्त बीतता ही जा रहा था और एक दिन पूजा नें अपने पति से पूछ ही लिया शनि क्या सोचा है आपने ? मुझे बेटा होगा या बेटी ? पूजा के इस सवाल को सुनकर शनि ने तुरंत ही पूजा से कहा :- कैसा बेतुका सवाल पूंछ रही हो | बेटा हो या बेटी मैं दोनो में कोई फर्क नहीं करता क्योंकि वो दोनो मेरे ही अंश कहलायेंगे |                                      


पूजा शनि के इस जवाब से बेहद खुश थी | आखिरकार पूरे 9 महीने सकुशल बीतने के बाद पूजा ने सुंदर फूल जैसी बेटी को जन्म दिया | बेटी के जन्म से पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई किसी ने कहा मेरी लाडो आई है, किसी ने परी और किसी ने लक्ष्मी जैसे शब्दों से नवाजा | वहीं पूजा अपनी छोटी सी मासूम बच्चे को सीने से लगाए दुलार कर रही थी पूजा के ससुराल वालों ने सभी रिश्तेदारों को बेटी के जन्म की खबर सुनाई और पूजा के मायके में भी बेटी के जन्म की खबर दी | खबर सुनते ही पूजा की मां ने बेरुखे अंदाज में कहा :- अच्छा-अच्छा बेटी हुई है ! कोई खास खुशी नहीं हुई | आखिरकार पूजा की मां ने पूजा से फोन पर बात की बात करते-करते उन्होंने अपना दुख आँखों में आँसुओं से जाहिर कर ही दिया और पूजा को भी समझ आ जाता है कि मां को बेटी के जन्म से कोई खास खुशी नहीं हुई |  


कुछ दिन बाद पूजा की मां ,भाई और भाभी सभी पूजा की बेटी को देखने ससुराल जाते हैं| पूजा , मां की मनो:स्थिति तो जान ही चुकी थी सभी को पूजा ने बारी-बारी से अपनी बेटी को गोद में दिया और फिर पूजा ने अपनी मां को कमरे में ले जाकर सिर्फ इतना ही कहा :- मां जब मैं पैदा हुई थी तब क्या आप खुश नहीं थी ? मैं आप पर बोझ थी क्या ? यदि मुझे मेरे ससुराल में कष्ट होता तो क्या आप दुखी नहीं होती ? यदि मैंने बेटी बनकर जन्म लिया क्या मैंने कोई गुनाह किया ? आप भी कभी किसी की बेटी थीं फिर बहन पत्नी और मां बनीं | तुम्हारे घर पर भी जो बहु बनकर आई है वह भी किसी की बेटी है सभी लोग बेटे बेटे की रट लगाये रहेंगे तो यह संसार कैसे चलेगा ? बेटी से ही घर संसार है मां ? बेटियां भी माता-पिता की शान होती है बेटियां भी माता-पिता का नाम रोशन करती है वैसे भी मैं यह सब आपसे क्यों कह रही हूं जबकि मेरे ससुराल में बेटी के जन्म से सभी लोग बेहद खुश हैं मुझे बहुत दुख होता है मां जब आपकी बहु को भी कभी बेटी होगी तब क्या करेंगी आप ? मुझे आपके खुश रहने या ना रहने से कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि मेरी बेटी मेरा अंश है मुझे ही उसे पालना है आपको नहीं ?                             


पूजा की इन बातों को सुनकर पूजा की मां की आंखों से पश्चाताप की अश्रुधारा बह उठती है उन्हें अब एहसास हो चुका था वह एक मां होते हुए मां को नहीं समझ पाई उन्होंने तुरंत ही पूजा से माफी मांग ली और अपनी नातिन को सीने से लगा लिया | तभी अचानक से पूजा की सास ने कमरे में दस्तक दी और अपनी समधन की आंखों में आँसू देखकर अचंभित रह जाती हैं और वे पूजा से पूंछ बैठती हैं कि समधन जी की आंखों में आंसू क्यों ? तभी पूजा ने स्थिति को संभालते हुए कहा खुशी के आंसू है जो गुड़िया को गोद में उठाते ही मां की आंखों में स्वत: ही निकल पड़े उन्हें मेरा बचपना याद आ गया | पूजा की इन बातों को सुनकर मां सच में हैरान रहकर सोचने लगी कि सच में कितनी प्यारी होती है यह बेटियां दो दो कुलों की लाज होती है बेटियां |                     


धन्यवाद                              

रिंकी पांडेय                                 

#मातृत्व

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