अलविदा.. दिलीप साहब !!

अलविदा.. दिलीप साहब !!

बिखरते बिखरते भी सुकून दे ही गया

हवा में बिखरा भी तो खुशबू की तरह...

एक ऐसा शख्स जो हर दिल अजीज था..जो महज 25 साल की उम्र में ही ..रुपहले पर्दे का बेताज बादशाह बन बैठा...जो अमर अदाकारी का शहजादा था..आज इस दुनिया से रुखसत हो गया..और अपने तमाम चाहने वालों को गमगीन कर गया...


यूसुफ खान से दिलीप कुमार बनने का उनका सफर काफी रोचक और उतर चढ़ा भरा रहा. पेशावर में 1922 में जन्मे यूसुफ खान मुंबई आकर दिलीप कुमार बने..बॉम्बे टाकीज की अभिनेत्री देविका रानी ने उन्हें ये नाम दिया था... उन्होंने फिल्मों में आने से पहले फलों का पुश्तैनी कारोबार भी किया था...जो फिल्म सेट पर फल पहुंचाया करते थे..


एक सदी से दूसरी सदी तक का ये सफर ..कितने ही नौजवान अभिनेताओं को प्रेरणा देता रहा और देता रहेगा..वो अदाकारी एक पूरी प्रयोगशाला थे..अपने किरदारों में ,अपनी अनोखी संवाद अदायगी से जान डाल देते थे..वो एक ऐसे फनकार थे जिनकी नकल बहुत सारे अभि नेताओं ने बड़े फख्र से की..और उनकी मासूम सूरत ने लोगों को दीवाना बना दिया..


उर्दू जुबान पर जितनी उम्दा पकड़ थी..हिंदी का उच्चारण उतना ही शुद्ध था..और अंग्रेजी बोलते तो शानदार तरीके से.. उनकी करिश्माई व्यक्तित्व का जादू कुछ ऐसा था..जो भी उनसे एकबार मिल लेता..उनका मुरीद हो जाता था..उनकी तहजीब, नेकनीयती और ईमानदारी के अनेकों किस्से आज लोगों की जुबान पर है..


54 साल के अपने सिनेमा के कैरियर में.. उन्होंने 62 फिल्मों में काम किया..1944 में उनकी पहली फिल्म ज्वार भाटा आई थी..इसके बाद न जाने कितनी यादगार फिल्मेंदीं..जिनमेगंगाजमुना,शहीद,शक्ति,बैजूबावरा,अंदाज,सौदागर आदि प्रमुख हैं..उन्होंने कई नए पुराने कलाकारों के साथ काम किया..अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म शक्ति में उनकी दमदार भूमिका को..आज भी याद किया जाता है..


आज भारतीय सिनेमा ने एक महान कला कार खो दिया..भारतीय सिनेमा में दिलीप कुमार का नाम अमर रहेगा.. वो हिंदी सिनेमा के लीजेंड थे..उनके साथ ही एक युग का अंत हो गया..


नीलम

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