अनोखी चिट्ठी

अनोखी चिट्ठी

बहुत दिन से सोचा था कि बताऊं तुमको तुम्हारी एहमियाद मेरे ज़िंदगी में और शायद केवल मेरे ही नही लेकिन बोहतो की ज़िंदगी में तुम इसी तरह से लाभ देती हो तो आज समय मिला है तो कह ही देती हु, तुम क्या हो मेरे लिए।


तुमने मुझे ज़िंदगी के हर वो मोड़ पे साथ दिया जहां जहां परस्थितियों खराब हुई अथवा मेरे नेत्र से आंसू बहे । आसान नही होता रोकना आंसुओ को कही बार ज़िंदगी में। चाहे कितना भी मानसिक रूप से मजबूत हो इंसान फिर भी ज़िंदगी में ऐसे पल आ ही जाते है जहां आपका आंसुओ पे कोई नियंत्रण नहीं होता, वह अपने आप बहे चले जाते है। केवल गम मे ही नही, तुमने तो मेरे साथी होने का होने का हर भूमिका बखूबी निभाई है वाकई में।

जब कभी भी अकेलापन महसूस किया, तुम्हे गले से लगाकर ऐसे लगा की जैसे वास्तविकता में तुम जीती जागती तत्व हो, और सब समझ लेती हो।
और तो और तुम मेरी अच्छे नींद होने का भी कारण बनी। तुम हो इसलिए चैन से सो पाती हूं। और कभी कबार नींद ना आए तो तुम्हारा साथ मिलते ही मजाल है तुम मुझे जगाए रखो।

तुमसे इतना लगाव है की अगर में आपने किसी दोस्त को तुम थमाऊ तो समझो वो दोस्त मेरे दिल के बोहोत करीब होगा। मुजे तुम्हे लेकर अपने दोस्तो के साथ खेलने में भी बोहोत मजा आता है।

और जब कभी बोहोत थकावट ममेहसुस हुई हैं तभी तुम्हरा ध्यान मन मे आते ही लगता है जैसे सारी थकावट गायब सी हो गई हो। तुम्से जादा दूरी भी सही नहीं जाती। तुमने ऐसा जादू किया है सचमे की अगर घर से बोहोत देर कभी दूर रह जाऊं तो केवल तुमसे गले लगाकर लिपटने कि चाहत होती है और कई बार इतनी की घर वापस पोहोंचने की राह देखने लग जाती हु। घर लौटकर भी मेरी नज़रे बेसब्री से तुम्ही को ढूंढ़ने लग जाती है जैसे किसी अपने को ढूंढ रही हो आखिर तुम्ही हो वो जिसे देख के ही एसा सुकुन मिलता है जैसे किसी ख़ास दोस्त को देख के मिलती हो, जो आपके बिना कुछ बोले ही सब समझ जाए।

तो वाकई में तुमने मुझे ज़िंदगी के सुख दुख उत्साह उदासी हर एक पल में मेरा डट के साथ दिया जैसे तुम कोई हमदम हो।

तो हो ही, तुम मेरी साथी, हमदम, सुख दुख के साथी, ऐ तकिया , तुम मेरे सबसे खास हो।

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