अंतर्मन से मुलाक़ात

अंतर्मन से मुलाक़ात

सब का पूछते पूछते हुए हाल 
गुजर गए कितने साल 
तो सोचा कि चलो जाने आज
 खुद का भी थोड़ा हाल 

थोड़ी अचकचाई थोड़ी शरमाई
कि आज मुझे खुद की सुध कैसे आयी
फिर जब झाँका अपने दिल में 
तो खुद को ही ना पहचान पायी 

मैं  खुद से इतनी अन्जान थी
कि मैं अब अन्दर से रेगिस्तान थी
बस बहुत पूछ चुकी सब का हाल
अब कुछ पल अपने लिये भी चुराऊँगी 

हाँ जानती हूँ अब सब की 
नजरों में स्वार्थी हो जाऊंगी
पर अब अपने से प्यार जरुर जताऊंगी

स्वरचित व मौलिक 
स्मिता चौहान 

#अनकहेभाव   #अनछुएअहसास

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