अपना लोहा मनवा रही आलिया

कभी-कभी हम किसी इंसान को अंडर एस्टिमैट कर लेते है, ये सोचकर की ये ज़िंदगी में क्या कर पाएगा। पर वही इंसान अपना लोहा मनवाते रेस का घोड़ा साबित होता है तब मानना पड़ता है की हमारा गणित गलत था।

फ़िल्म जगत में कई कलाकार आते है, जाते है उनमें से कुछ एक नसीब के सहारे नाम कमा लेते है, तो कुछ अपनी जानदार अदाकारी से अपनी छाप छोड़ कर दर्शकों के दिल में बस जाते है। इनमें से बात करें आलिया भट्ट की तो 2012 में स्टूडेंट ऑफ दि यर से डेब्यू करने वाली आलिया ने टु स्टेटस, राजी और हाईवे जैसी फिल्मों में अपने जानदार अभिनय से साबित तो कर ही दिया था की ये छोटी सी, पिद्दी सी लड़की में बहुत दम है। पर गंगुबाई काठियावाड़ी देखकर लगा कि ये लड़की मंझी हुई कलाकार है।

आलिया भट्ट बॉलीवुड की बहुत कम समय मे अपनी पहचान बनाने वाली हीरोइन में से एक है, जिसका प्रमुख कारण ये भी हो सकता है कि उनका परिवार फ़िल्म इंडस्ट्री से जुड़ है। उनके पिता महेश भट्ट की वजह से बॉलीवुड में अपनी पहचान है। आलिया एक स्टार किड थी, जिन्होंने बचपन से उसी माहोल में रहने के कारण इन्होंने बहुत कम उम्र मे ही बॉलीवुड में कदम रख दिया था, और कमियाबी भी हासिल की।

जब तक गंगुबाई काठियावाड़ी फ़िल्म नहीं देखी थी तब तक मन में एक असमंजस थी की, ये चुलबुली लड़की गंगुबाई के पात्र को क्या न्याय दे पाई होगी? पर फ़िल्म देखने के बाद लगा की शायद कोई दूसरी अभिनेत्री इससे बेहतर अदाकारी नहीं कर पाती।

इस फ़िल्म में आलिया के किस पहलू की तारीफ़ करें? बोलने की छटा, हावभाव, नखशिख एक रेड लाइट एरिया वाली लड़कियों के अंदाज़ और हर सीन में सिर्फ़ नम आँखों से बहुत कुछ कहती उसकी अदा काबिले तारीफ़ है। आलिया भट्ट का अविश्वसनीय प्रदर्शन दर्शकों को उसका दीवाना बना देता है उसमें कोई दो राय नहीं। इतनी कम उम्र में इस किरदार के लिए इतनी दमदार अदाकारी से पात्र को न्याय देना आसान नहीं। यूँ समझिए की आलिया ने खुद को पूरवार कर दिखाया है।

यह फिल्म 1960 के दशक पर आधारित एक क्राइम ड्रामा है। ये फिल्म गंगूबाई के इर्द-गिर्द घूमती है, जो 60 के दशक में मुंबई के कमाठीपुरा में एक वेश्यालय चलाती थी। यह हुसैन जैदी की किताब \"माफिया क्वींस ऑफ मुंबई\" के एक चैप्टर पर आधारित है। भले \"कश्मीर फ़ाइल्स\" की रिलीज साथ में होने की वजह से गंगुबाई पर थोड़ी असर पड़ेगी, पर बेशक ये फ़िल्म आलिया भट्ट के लिए बैंच मार्क साबित होगी।

भावना ठाकर \"भावु\" (बेंगलोर,कर्नाटक)

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