अपनी शर्तों पर जीना:मैंने है सीखा

अपनी शर्तों पर जीना:मैंने है सीखा

कितना कठिन होता है लीक से अलग हटकर चलना अपनी पहचान बनाना।समाज में सिर उठाकर चलना और दुनिया की नजरों में नजरें डालकर उनके चुभते व्यंग्यबाणों को सुनना अटपटे प्रश्नों का न चाहते हुए जबाब देना।ये एक स्त्री से बेहतर कोई नही समझ सकता।

ये तो दुनिया की फितरत होती कि आपके हर कदम पर आपको ज़ज करती ,आपके लिए कथित शुभचिंतक बनकर आपको मशविरा का पुलिंदा थमाती और गाहे बगाहे आप पर दोषारोपण भी करती, परन्तु इन सभी मुश्किलों में सबसे बड़ी मुश्किल होती एक अकेली स्त्री का मजबूती से डटकर खड़े होना,आत्मविश्वास से लबरेज होना।समाज से यह बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाता कि वह खुश है तो क्यों खुश है,कैसे खुश है,उसने हाय तौबा क्यों नही मचा रखी है।


छठीं कक्षा में थी मैं जब गंभीर बीमारी से पीड़ित हुई।बीमारी की गंभीरता का पता नही था ,विज्ञान और मेडिकल साइंस पर पूरा भरोसा था।लगता था कि एक कैंसर ही लाइलाज बीमारी है बाकी सब तो दवा से ठीक हो जानी है।पर तब कहाँ पता था कि कैंसर से तो इंसान मर जाता उसके कष्टों से उसे मुक्ति मिल जाती पर कुछ बीमारियां ऐसी होती जो रोज मारती।हर दिन इंसान मरता,दर्द से तकलीफ से और उसके ऊपर दुनियावी छीटाकशी से।


पर कहते हैं न किस्मत से अधिक इंसान को कभी नही मिलता।बड़े से बड़े अस्पताल में इलाज के बाद भी बीमारी बढ़ती गयी और उसका दुष्प्रभाव शरीर पर पड़ता रहा।


फिर शादी जैसे ख्याल न कभी स्वयं के मन में आये न घरवालों के।पर दुनिया कहाँ चुकती, वह सच्ची शुभचिंतक बनकर सलाह देती रहती।

इस प्रश्न से मैं सदा ही बचती रहती,गाँव में जब एक लड़की कुँवारी रहती तो यह एक बड़ा प्रश्न हो जाता।पर मेरी स्थिति वैसी थी ही नही की इस बारे में सोचूँ,फिर घर पर रहकर ही स्वाध्याय से एम ए ,बी एड करके जब शिक्षिका बनी तब फिर ये प्रश्न गहराया।लोगों को लगता कि शादी नही होना मतलब भविष्य असुरक्षित, अगला जन्म सही नही वगैरह वगैरह।


पर अब मैंने स्पष्टतः नही कहना सीख लिया,लोगों को मैंने कहा कि मेरी समस्याओं का मुझे बेहतर पता और मुझे ये भी पता कि मैं नही शादी की जिम्मेवारी उठा सकती,तो कृप्या आपलोग सलाह न दें।


कानाफूसी अभी भी होती ,कभी सुनाकर कभी पीठ पीछे बातें बनती,पर मैंने अपनी शर्तों पर जीना सीख लिया है।परिवार का साथ है जो आत्मबल है।


अभी भी कई लोग सामने से कहते,मैं कह देती मुझे मेरे हाल पर छोड़ दें।


#Break_the_bias

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