अर्द्धनारीश्वर

अर्द्धनारीश्वर

आजकल इस आधुनिक युग में सबसे अधिक यदि किसी विषय पर बात होती है, तो वह है समानता।

परंतु क्या सचमुच ऐसा है?? मुझे ऐसा बिल्कुल नही लगता। यदि कोई ऐसा बोलता है, कि हम अपनी बहू को बेटी जैसा रखते है या हम बेटे-बेटी में कोई अंतर नही करते, तो मेरे हिसाब से वे लोग समानता नही बल्कि तुलना कर रहे है।

खैर आज का विषय मेरा बेटा-बेटी नही, कुछ और ही है, जो समानता से ही संबंधित है।

जब मै छोटी थी, मेरे पडो़स में एक लड़का रहता था-दीपक। उसे मेरी गुडि़या से खेलना, मेरे साथ घर-घर खेलना बहुत पसंद था। कभी मेरी चूडि़यां पहनता, बिंदी लगाता तो कभी मेरे कपडे़ ही पहन लेता। उसके पापा को ये सब बिल्कुल पसंद नही था। वो उसे बहुत मारते थे उसकी इन बातो को लेकर।

समय बीतता गया और हम किशोरावस्था में पहुंच गये।

एक दिन मैं उसके घर गयी, तो देखा कि कुछ किन्नर बैठे हुएं है और उसके घरवाले दीपक को उनके साथ भेजना चाहते थे। दीपक बहुत रो रहा था। उसे नही जाना था। लेकिन जाना पडा़।

कुछ सालो बाद मेरी शादी नवीन से हो गयी और मैं अपने ससुराल पहुंची। शादी के दो दिन बाद कुछ किन्नर आयें, शादी का शगुन लेने। खूब नाच-गाना किया उन्होने। उनमें से एक चेहरा मुझे कुछ जाना-पहचाना सा लगा। अरे! ये तो दीपक था, जो अब दीपा बन चुका था। हाथो में भरकर चूडि़यां, होठो पर लाली, बिंदी, गहरी सुर्ख साडी़-यही सब तो पसंद था दीपक को।

अब तो तुम बहुत खुश होंगे ना दीपक, सोरी दीपा। तुम्हे ये सब कितना पसंद था।

खुश! दीपक के चेहरे पर एक फीकी सी मुस्कान फैल गयी। हाँ खुश हूँ।

सबको आशीर्वाद देती हूँ, लेकिन स्वयं सबसे बडा़ अभिशाप हूँ। सबके बच्चो को दुआएं देती हूँ, परंतु स्वयं मातृत्व से वंचित। त्यौहारो पर सबको बधाइयां देती हूँ, लेकिन अपने परिवार के साथ कोई त्यौहार नही मना सकती। न नर हूँ, न ही नारी हूँ। लेकिन इन सब में मेरा क्या दोष है? ईश्वर ने मुझे ऐसा बनाया।

कहते-कहते उसकी आँखे आंसुओं से सरोबार थी।

तभी उनमें से एक किन्नर आगे आया और बोला-अरे! रोती क्यो है? सही कहा तूने हम न नर है और न ही नारी है। हम तो ईश्वर का रूप है। अर्द्धनारीश्वर है हम। हमारा कोई दोष नही है, दोष तो लोगो की छोटी सोच का है, जो ईश्वर की रचना का अनादर करते है। चल अपना नेग लेते है। दूसरे घरो में भी तो जाना है।

दोस्तो, हम पूरे समाज की सोच तो नही बदल सकते, लेकिन स्वयं की अवश्य बदल सकते है।

आपकी राय का इंतजा़र रहेगा।

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