अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस 2021: 'नर्स: नेतृत्व के लिए एक आवाज: भविष्य के स्वास्थ्य के लिए दृष्टि'

अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस 2021: 'नर्स: नेतृत्व के लिए एक आवाज: भविष्य के स्वास्थ्य के लिए दृष्टि'

आधुनिक नर्सिंग की जननी फ्लोरेंस नाइटिंगेल की स्मृति में प्रति वर्ष 12 मई को अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस मनाया जाता है। जनवरी, 1974 में 12 मई, फ्लोरेंस नाइटिंगेल के जन्मदिन, को अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस के तौर पर मनाने की घोषणा की गई। इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ नर्स की ओर से इस बार अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस 2021 की थीम है...


नर्स: ए वॉयस टू लीड- ए विजन फॉर फ्यूचर हेल्थकेयर रखी गई है यानी 'नेतृत्व के लिए एक आवाज: भविष्य के स्वास्थ्य के लिए दृष्टि' इस बार की थीम है। 2020अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस की थीम थी,'विश्व स्वास्थ्य के लिए नर्सिंग’।


नर्स मरीज़ों की तन और मन से सेवा करती है। नर्सें अपने स्वास्थ्य की परवाह किए बिना मरीज की जान बचाती हैं। आज का दिन उनके योगदान को समर्पित है। लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर रखने में नर्सों का बड़ा योगदान होता है। नर्सों को प्रशिक्षित किया जाता है जिससे वे मरीजों को मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और चिकित्सीय तौर पर स्वस्थ होने में मदद करें। नर्सों को समाज में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। हर साल 12 मई को भारत सरकार की तरफ से राष्‍ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगल पुरस्‍कार दिया जाता है। इसकी शुरुआत 1973 में भारत सरकार के परिवार एवं कल्‍याण मंत्रालय ने की थी।


आज फ्लोरेंस नाइटिंगेल का २०१ वां जन्मदिवस है। इन्होंने मरीजों और रोगियों की सेवा की क्रीमिया युद्ध के दौरान लालटेन लेकर घायल सैनिकों की दिल से सेवा की थी, जिसके कारण ही उन्हें ‘लेडी विद द लैम्प’कहा गया।


आधुनिक नर्सिंग की फाउंडर फ्लोरेंस नाइटिंगेल का जन्म इटली के फ्लोरेंस में हुआ। ब्रिटि‍श परिवार में 12 मई 1820 को जन्मी फ्लोरेंस नाइटिंगेल अपनी सेवा भावना के लिए याद की जाती हैं। 1821 में ही उनके माता पिता अपने बच्चों सहित इंग्लैंड लौट आये।फ्लोरेंस ने जब पहली बार नर्सिंग में जाने की इच्छा जाहिर की तो माता-पिता तैयार नहीं हुए। बाद में उनकी जिद के आगे झुके और ट्रेनिंग के लिए जर्मनी भेजा। वे गणित और डेटा में माहिर थीं। इस खूबी का इस्तेमाल उन्होंने अस्पतालों और लोगों की सेहत सुधारने में किया।


1853 में क्रीमिया युद्ध के दौरान उन्हें तुर्की के सैन्य हॉस्पिटल भेजा गया। यह पहला मौका था जब ब्रिटेन ने महिलाओं को सेना में शामिल किया था। जब वे बराक अस्पताल पहुंची, तो देखा कि फर्श पर गंदगी की मोटी परत बिछी है। सबसे पहला काम उन्होंने पूरे अस्पताल को साफ करने का किया। सैनिकों के लिए अच्छे खाने और साफ कपड़ों की व्यवस्था की।


पहली बार सैनिकों की ओर इतना ध्यान दिया गया। उनकी मांग पर बनी जांच कमेटी ने पाया कि तुर्की में युद्ध के घावों से नहीं अपितु गन्दगी और संक्रमण से कई गुना सैन्य कर्मियों की मृत्यु हुई है। फ्लोरेंस की कोशिशों से ही ब्रिटिश सेना में मेडिकल, सैनिटरी साइंस और सांख्यिकी के विभाग बने। अस्पतालों में साफ-सफाई का चलन इन्हीं की देन है।


इस अस्पताल में नाइट शिफ्ट में वे मशाल थाम कर मरीजों की सेवा करती थीं। इसलिए ‘द लेडी विद द लैम्प’ के नाम से मशहूर हुईं। आज भी उनके सम्मान में नर्सिंग की शपथ हाथों में लैम्प लेकर ली जाती है। इसे नाइटिंगेल प्लेज कहते हैं। 1860 में उनके नाम पर ब्रिटेन में नर्सिंग स्कूल की स्थापना हुई। 1910 में फ्लोरेंस 90 साल की उम्र में उनका निधन हुआ। वे ‘ऑर्डर ऑफ मेरिट’ सम्मान पाने वाली पहली महिला थीं।


भारत की अंजलि कुलथे 'कामा व आल्बलेस हॉस्पिटल' में स्टाफ नर्स हैं। 26/11 हमले के समय आतंकी कसाब का सामना करने वाली अंजलि मरीजों की देखभाल कर रही हैं। इनके खाने-पीने से लेकर टेस्ट कराने का ध्यान रखती हैं। माहौल को पॉजिटिव बनाए रखने के लिए मोटिवेशनल किस्से सुनाती हैं। मुंबई हमले के दौरान अंजलि ने 20 प्रेग्नेंट महिलाओं को बचाया था। लोग उनसे मुंबई हमले के भी किस्से सुनते हैं।


ब्रिटेन के विटनी कम्यूनिटी हॉस्पिटल में 84 साल की नर्स मार्गेट तेपली नाइट शिफ्ट में लगातार काम करती रहीं और कोरोना संक्रमित मरीज के संपर्क में आने से संक्रमित हो गईं।कोरोना की वजह से जान गंवाने वाली वे दुनिया की सबसे उम्रदराज वर्किंग नर्स हैं। कोरोना बुजुर्गों के लिए सबसे घातक साबित हो रहा है। मार्गेट के पास भी विकल्प था कि वे अपनी ड्यूटी से मुक्त हो सकती थीं, लेकिन वे इस उम्र में भी नाइट शिफ्ट में काम करती रही । वे समर्पण की मिसाल थीं ।


आज कोविड -१९ महामारी के समय नर्सें दिन-रात काम कर रही हैं। अपने घर परिवार को छोङकर वे दिनोंरात निःस्वार्थ भाव से सेवा में लगी हुई हैं। कभी एक माँ की भांति वो मरीज़ को बच्चे की तरह पुचकारती हैं तो कभी प्रेरणादायक कहानियां सुना कर उनका मनोबल बढ़ाती हैं। मानवता की सेवा में लीन सभी नर्सिंग कर्मियों को हम सभी का दिल से सलाम! आज के दौर में स्त्री नर्स हो याकि पुरुष नर्स दोनों ही नर्सिंग कर्मियों के योगदान को याद कर के हम उनके सम्मान में अपना मस्तक झुकाते हैं, उन्हें सादर नमन ??...


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