बाल विवाह और भ्रूणहत्या

बाल विवाह और भ्रूणहत्या

बाल विवाह और भ्रूणहत्या हमारे समाज के विकास की ऐसी रुकावटें हैं जिनको दूर किए बिना हम कभी भी प्रगतिशीलता का दावा नहीं कर सकते।

 बालविवाह की कुप्रथा केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में है। हमारे यहाँ अनेक राज्य हैं जहाँ आज भी बालविवाह हो रहे हैं। यह प्रथा आदिवासी क्षेत्रों, अनुसूचित जातियों और कुछ जातियों में आज भी प्रचलित है। हालांकि पहले के मुकाबले इसमे बहुत कमी आयी है लेकिन पूर्ण प्रतिबंध अभी भी नहीं लगा है।

इस कुप्रथा को रोकने के लिए हमें दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़ना होगा जिसके लिए अनेक प्रकार से प्रयास करने होंगे। लोगों में जागरूकता फैलानी होगी, इसके दुष्परिणामों के बारे में बताना होगा। इसके लिए समाज के जागरूक व्यक्तियों और युवा वर्ग को आगे आना होगा तभी कुछ सकारात्मक परिणाम मिलेगें। जितने प्रयास अभी हो रहे हैं उसके परिणाम भी अच्छे आए हैं लेकिन हम उनसे संतुष्ट होकर नहीं बैठ सकते।

 भ्रूणहत्या एक अमानवीय और किसी भी सभ्यता को शर्मसार करने वाला कृत्य है, जो ग्रामीण और तथाकथित आधुनिक कहलाने वाले शहरी क्षेत्रों में भी बिना हिचक के हो रहा है। हमारे अनेक राज्यों में बच्चों के लिंग अनुपात में बहुत फर्क आ रहा है जो यह दर्शाता है कि हम आधुनिक केवल सुविधाओं को अपनाने की दिशा में ही हो रहे हैं। हमारी सोच आधुनिकता से कोसों दूर है।

सामाजिक संस्थाओं और राज्यों द्वारा इस कृत्य को रोकने के लिए प्रशंसनीय कार्य किए जा रहे हैं लेकिन उनकी सफलता तभी सम्भव है जब हम खुद इसको एक घृणित कार्य समझें और अपनी मानवीय संवेदना को जगाएं। इसके विरुद्ध एक जनआंदोलन की चलाने की आवश्यकता है। महिलाओं को स्वयं इसका विरोध करना होगा और महिला को महिला का साथ देना होगा। तभी एक नये सवेरे की उम्मीद की जा सकती है। हालांकि आज अनेक परिवार ऐसे भी हैं जिनके घर केवल कन्या है ऐसे परिवार अन्धकार में उजाले की किरण हैं।

~सुमेधा
स्वरचित, मौलिक।

What's Your Reaction?

like
1
dislike
0
love
0
funny
0
angry
0
sad
1
wow
1