बाबुल का आंगन

गुंजा ….बहुत ही प्यारी सी थी।  हां गुंजा ही नाम रखा था उसके मां पापा ने।। लाडली थी अपने मां पापा की यूं तो उसके दो भाई और थे पर ज्यादा लाड़ उसके हिस्से में ही आया था गुंजा जितनी सुंदर थी उतनी ही होशियार भी थी!

बाबुल का आंगन

गुंजा ….बहुत ही प्यारी सी थी।  हां गुंजा ही नाम रखा था उसके मां पापा ने।। लाडली थी अपने मां पापा की यूं तो उसके दो भाई और थे पर ज्यादा लाड़ उसके हिस्से में ही आया था गुंजा जितनी सुंदर थी उतनी ही होशियार भी थी!

गुंजा शादी लायक हुई तो उसके मां पापा ने एक अच्छे घर में उसका रिश्ता तय कर दिया। हां एक अच्छा घर हर माता पिता अपनी बेटी के लिए एक अच्छा घर ही तो देखते हैं हर मां पिता चाहते हैं कि उनकी बेटी सुखी रहे। अब वो, अच्छा घर कितना अच्छा निकलता है ,यह तो शादी के बाद ही पता चलता है। तो गुंजा के मां-पापा ने भी अच्छा घर देखकर गुंजा की शादी कर दी।

शादी के कुछ समय बाद ही गुंजा को पता चला कि रजत( गुंजा का पति) तो किसी और लड़की से प्यार करता है। उसने अपने माता-पिता के दबाव में आकर यह शादी कर ली। शुरू में तो गुंजा ने रजत को प्यार से अपनी तरफ करने की कोशिश की, पर रजत तो छोटी-छोटी बातों पर उस पर चिल्लाता, झगड़ता सास ससुर भी देख कर भी कुछ ना बोलते। 

उसने अपने मां पापा को भी कुछ नहीं बताया सोचा भी बेकार में परेशान होंगे उसके पापा पहले ही दिल के मरीज थे!!!

एक दिन गुंजा को बुखार था फिर भी उसने रजत के लिए नाश्ता तैयार किया ,वह नाश्ता लेकर आ ही रही थी कि चक्कर आने की वजह से ट्रे उसके हाथ से गिर गई अब रजत को तो जैसे लड़ने का बहाना मिल गया, वह गुंजा पर चिल्लाने लगा। वह उस पर हाथ उठाने ही वाला था कि पीछे से किसी ने उसका हाथ पकड़ लिया देखा तो पीछे गुंजा के मां पापा खड़े थे। 

तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरी बिटिया पर हाथ उठाने की गुंजा के पापा ने कहा… मां पापा को देखकर गुंजा से लिपट कर रोने लगी उसने उन्हें सारी बात बताई .. उसके पापा बोले बेटा, मैंने तुम्हारी शादी की थी तुम्हें पराया नहीं किया था कोई भी परेशानी थी तो हमें बतानी चाहिए थी तुम्हारे “बाबुल का आंगन “आज भी तुम्हारा अपना है उस पर तुम्हारा उतना ही अधिकार है जितना तुम्हारे भाइयों का चलो सामान पैक करो तुम हमारे साथ चल रही हो इन सब को तो अब पुलिस देखेगी। 

स्वरचित #
अनु गुप्ता
Image Credit @YourDost

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