बहू दिल से सेवा नहीं करती

बहू दिल से सेवा नहीं करती

कार्तिक के मम्मी पापा जब भी आते तो हमेशा अपने बड़े बेटे हिमांशु और बहू हेमा के ही गुण गाते। वैसे वह अधिकतर हिमांशु के साथ ही रहते थे पर दो महीने में कभी 15 दिन उनके घर आते। कार्तिक की पत्नी रीवा को उनकी बातों से बहुत दुख पहुंचता।रीवा हेमा से शारीरिक रूप से थोड़ी कमजोर थी पर फिर भी वो अपनी तरफ से उनका पूरा ध्यान रखती। इतना सब कुछ करने के बाद भी वह लोग कभी उससे खुश नहीं रहते।

एक दिन जब रीवा के मम्मी पापा उनसे मिलने आए।कार्तिक के मम्मी पापा और रीवा के मम्मी पापा मिलकर बातें कर रहे थे तो बातों ही बातों में कार्तिक के पापा अपनी बड़ी बहू का गुणगान करने लगे कि मेरी बहू हेमा बहुत ही सेवादार है सबकी बहुत दिल से सेवा करती है। बहुत कम बहूएं ऐसी होती हैं।यह बातें रसोई में खड़ी रीवा को भी सुनाई दी और उसे बहुत दुख हुआ क्योंकि अप्रत्यक्ष रूप से तो यह बातें उसे ही सुनाई गई थी शाम को रीवा के मम्मी पापा वापस चले गए। कार्तिक के घर आने पर उसने रीवा का उतरा हुआ चेहरा देखा तो समझ गया कुछ तो बात हुई है। रीवा से पूछा तो रीवा ने सारी बात बता दी।

तब कार्तिक ने उसे समझाया कि रीवा मैं तुम्हें भी अच्छी तरह जानता हूं और अपने मम्मी पापा को भी अच्छी तरह जानता हूं मैं मानता हूं की वह मुझ में और भैया में शुरू से ही भेदभाव करते थे और वही भेदभाव उन्होंने बहुओं में भी किया मैं लाख चाहे उनकी सेवा कर लूं फिर भी उनका प्यारा बेटा हिमांशु ही रहेगा और तुम भी चाहे उनकी लाख सेवा कर लो उनकी प्यारी बहू हेमा भाभी ही रहेंगी। तुम इन सब बातों को दिल से क्यों लगाती हो बस ओम इग्नोराय नमः का जप किया करो और खुश रहा करो क्योंकि इंसान के स्वभाव को बदलना बहुत ही मुश्किल है हम लोग अपना स्वभाव नहीं बदल सकते तो हम दूसरों से क्या उम्मीद लगाएं कि वह अपना स्वभाव बदल लें। कहते हैं कि बच्चे और बूढ़े एक समान होते हैं जिस तरह बच्चों की कुछ बातें इग्नोर करनी पड़ती है उस तरह बूूूूढों की भी कुछ बातें इग्नोर करना सीखो।

तुम्हें पता है भगवान बुद्ध को एक बार एक आदमी गाली देकर चला गया उन्होंने उसे कुछ नहीं कहा। उसके जाने के बाद उनके शिष्य ने पूछा कि वह आदमी आपको गाली देकर गया और आप फिर भी मुस्कुरा रहे हैं आपने कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं की। तो उन्होंने पता है क्या कहा,उन्होंने कहा कि जैसे हमें कोई उपहार देता है हम ले या ना ले वो हम पर निर्भर करता है। अगर मैं उपहार नहीं लूं तो वो किसके पास रहा उसके पास ही। इसी तरह मैंने उसकी गाली नहीं ली तो गाली किसके पास रही उसी के पास। इसी तरह तुम भी यही समझो तुम्हें जो कुछ बोल रहा है तो तुम वो लो ही मत।अगर वो कहते हैं ना तुम अच्छी बहू नहीं हो तो तुम उनकी वो बात मत लो।

और सबसे बड़ी बात मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं है तुम मेरा और बच्चों का अच्छे से ध्यान रखती हो अगर सौ लोग तुम्हारे विरोध में होंगे तो भी मैं तुम्हारे साथ रहूंगा। ये मेरा तुमसे वादा है और मुझे पता है तुम पूरे दिल से सब की सेवा करती हो।मुझे किसी के कुछ कहने या ना कहने का कोई फर्क नहीं जो पड़ता है। और ये मैं अपनी खराब किस्मत मानूंगा कि मेरे मां-बाप का हमारे प्रति ऐसा रवैया है। जिस तरह से वो भैया भाभी के बच्चों का ध्यान रखते हैं। उन्होंने कभी भी हमारे बच्चों का उतना ध्यान नहीं रखा।

तुम्हें याद है जब सवि हुआ था तो हमने मम्मी पापा को अपने पास रहने के लिए बुलाया था ताकि तुम्हें मदद मिले लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया था। रिया के टाइम भी उन्होंने मना कर दिया था तब तुम्हारे मम्मी पापा ने हमारा कितना साथ दिया था तुम्हारी छोटी बहन और भाई उन्होंने सब कुछ संभाल लिया था। जिन्होंने हमारे लिए इतना कुछ किया, इतना साथ दिया हमें उनका शुक्रिया करना चाहिए और जिन्होंने साथ नहीं दिया उनसे ज्यादा गिला नहीं करना चाहिए बस ओम इग्नोराय नमः का मंत्र जपो और खुश रहो कुछ लोग थोड़े सनकी होते हैं। हम उनको नहीं बदल सकते।मैं आज भी तुम्हें कह रहा हूँ और पहले भी तुम्हें कहता था मैं हमेशा से ही तुम्हारे साथ हूं और तुम्हारी बहुत ही इज्जत करता हूं।

“कार्तिक आप सही कह रहे हैं मैं वो दिन कभी नहीं भूल सकती जब सवि और रिया के टाइम तुम्हारे मम्मी पापा ने हमारी बिल्कुल मदद नहीं की।लेकिन तुमने नाइट ड्यूटी होने के बावजूद भी मेरा साथ दिया और मेरे मम्मी-पापा, भाई-बहन भी हमेशा हमारा साथ देते हैं। मुझे दुख तो इस बात का है कि वो मेरे मां बाप के सामने इस तरह से बोलते हैं कि अप्रत्यक्ष रूप से उन्हें लगे कि मैं अच्छी बहू नहीं हूँ और उनकी दिल से सेवा नहीं करती। कार्तिक मैं चाहती हूं कि मेरे मां-बाप को मेरे कारण कोई दुख ना हो शायद यह बात आप तब समझेंगे जब रिया की शादी हो जाएगी। और रही बात किस्मत की तो मैं बहुत ही लकी हूं जो मुझे पति के रूप में आप मिले और आगे से कभी मत कहना कि हमारी किस्मत खराब है।

दोस्तों जाने क्यों लोग इस तरह की अपेक्षाएं रखते हैं खुद तो अपने फर्ज निभाते नहीं और दूसरों को ताने मारने में भी पीछे नहीं हटते। मैं यहां यह नहीं कह रही कि सभी सास-ससुर बुरे होते हैं और सभी बहूएं अच्छी होती हैं लेकिन जहां पर तुलना जाती हैं वहीं पर सारे रिश्ते खराब हो जाते हैं। कभी बेटियों और बहुओं की तुलना करते हैं कभी बड़ी बहू और छोटी बहू से तुलना करते हैं।

आखिर ये लोग समझते क्यों नहीं हर इंसान मैं अलग अलग गुण हैं, सबकी शारीरिक क्षमता भी अलग होती है। कोई बहुत अधिक काम कर सकता है कोई थोड़ा सा काम करने में ही थक जाता है। इसीलिए हमें कभी भी किसी की तुलना नहीं करनी चाहिए।और सबसे बड़ी बात कुछ लोगों के लिए तो बहुएं चाहे कितना भी उनके लिए कर ले वो बेटी की जगह कभी नहीं ले सकती। फिर भी ना जाने क्यों वह बहुओं की तुलना बेटियों से करते हैं परंतु खुद कभी सास ससुर की बजाय बहू के मां बाप बनना पसंद नहीं करते। अंत में यही कहूंगी कि ओम इग्नोराए नमः का मंत्र जपे और खुश रहें। इस ब्लॉग को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और मुझे फॉलो करना ना भूलें।
धन्यवाद।

कॉपीराइट @चेतना अरोरा ‘प्रेम’

What's Your Reaction?

like
0
dislike
0
love
0
funny
0
angry
0
sad
0
wow
0