क्या आपने देखी है बरसाने की प्रसिद्ध लड्डूमार होली ?

क्या आपने देखी है बरसाने की प्रसिद्ध लड्डूमार होली ?

सखियों होली का त्योहार द्वार खटखटाने लगा है। हर ओर उल्लास पूर्ण वातावरण छाने लगा है। होली की मस्ती में सब सराबोर हो रहे हैं लजीज़ पकवानों की खुशबू घरों में महकना प्रारंभ हो चुकी है।

जिक्र होली का हो और बरसाने की बात न निकले ऐसा तो हो ही नहीं सकता। बरसाने की होली में बड़ी विविधता देखने को मिलती है। फाल्गुन मास की अष्टमी को वहाँ लड्डू होली से होली के उत्सव का प्रारंभ हो जाता है। यह विश्व प्रसिद्ध लठ्ठमार होली से एक दिन पहले मनाई जाती है। 

भगवान कृष्ण और राधारानी के हजारों भक्त जोकि देशविदेश से एकत्रित होते हैं पहले बरसाना के लाड़ली मन्दिर में प्रारंभ कर के एक दूसरे के ऊपर लड्डू मार मार कर इसे खेलते हैं। इसके लिये लाखों टन लड्डू तैयार किये जाते हैं।

इस होली का प्रारंभ कैसे हुआ इसके पीछे रोचक कहानी है। राधा के पिता वृषभानु जी ने नंदबाबा को गाँव सहित बरसाने आकर होली खेलने का न्योता भेजा। नंदबाबा ने यह निमंत्रण स्वीकार किया और पुरोहित को संदेश लेकर भेजा। वृषभानु जी ने सम्मान के साथ पुरोहित को लड्डुओं के साथ विदा किया। मार्ग में गोपियों ने अबीर गुलाल से उनके साथ होली खेलना प्रारंभ कर दिया। पुरोहित के पास रंग नहीं था तो उन्होंने लड्डू निकाल कर गोपियों पर फेंके। बस उसी दिन से वहाँ लड्डू मार होली खेलने का चलन शुरू हो गया। इस तरह द्वापर युग से यह बेहद मजेदार परम्परा चली आ रही है। लोग बूँदी, बेसन व मावे के लड्डू बनवाते हैं और एक दूसरे पर फेंक फेंक कर लड्डू मार होली का मजा लेते हैं।

अर्चना सक्सेना

Image credit- TOI

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