भुने चने आहार में ज़रूर शामिल कीजिए

भुने चने आहार में ज़रूर शामिल कीजिए

पुराने समय में बाजार आधुनिक समय जैसे तरह तरह की नमकीन, बिस्किट, वेफर्स कुरकुरे आदि से पटा नहीं पड़ा होता था।

ये सब स्वाद की दृष्टि से अवश्य बहुत ही आकर्षित करते हैं और एक बार यदि खाना प्रारंभ किया तो पैकेट हाथ से बहुत मुश्किल से छूटता है।

परंतु बात यदि सेहत की करें तो इनके बहुत से नुकसान हमें उठाने पड़ते हैं। न सिर्फ मोटापा, बल्कि गैस ,एसिडिटी, डायबिटीज ब्लड प्रेशर आदि में भी इनके सेवन से इजाफा ही होता है। तो पहले के बच्चे आखिर दोनों समय के भोजन के बीच ऐसा क्या खाते थे जो उनकी इस तरह क्षुधा को शान्त कर देता था जिसमें छुटपुट कुछ खाने की इच्छा होती थी?

इसका जवाब है घर के बने कचरी पापड़ के अतिरिक्त वह भुने हुए चने और परमल जिसे कुछ लोग लइया या राइस पफ्स के नाम से जानते हैं, का सेवन करते थे। यद्यपि कचरी पापड़ को तला हुआ होने की वजह से स्वास्थ्य वर्धक स्नैक्स की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता परंतु फिर भी बाजार में उपलब्ध रंग बिरंगे पैकेट की तुलना में वही बेहतर हैं।


लेकिन यदि हम बात करें भुने हुए चने की तो उसमें सेहत सम्बंधी बहुत से गुण हैं।

पहले ये हेल्दी स्नैक्स के रूप में हर घर में प्रचलित थे। 50 ग्राम के करीब भुना चना अपने आहार में शामिल करना चाहिए। ये सस्ता और पौष्टिक होने के साथ ही कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम तथा आयरन का एक महत्वपूर्ण स्त्रोत है।


लाभ-

डायबिटीज-

शरीर के अतिरिक्त ग्लूकोज को सोख कर ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है।


कब्ज-

फाइबर की अच्छी मात्रा होने की वजह से ये कब्ज को दूर करके पेट को साफ रखता है।


मोटापा-

इसमें प्रोटीन और फाइबर की मात्रा अधिक होने से पेट जल्दी भर जाता है और फिर काफी देर तक भूख का अहसास नहीं होता है। अतः ये डाइटिंग करने वालों के लिए अच्छा आहार है।


आयरन का स्त्रोत-

इसमें लौहतत्व अधिक मात्रा में होता है जिससे खून की कमी या एनीमिया नहीं होता।


मौसमी बीमारियों से बचाव-

इसके सेवन से रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है अतः बीमारियों से किसी हद तक बचाव रहता है।

इतने छोटे और सस्ते चने के स्वास्थ्य सम्बंधित इतने गुणों को जानने के बाद आप भी अपने परिवार को आज से ही भुने चने खिलाएँगी व खुद भी खाएँगी।


अर्चना सक्सेना

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