भरोसा माॅ॑ का #माॅ॑ होने पर गर्व #7दिन7ब्लाॅग

भरोसा माॅ॑ का #माॅ॑ होने पर गर्व #7दिन7ब्लाॅग

"तुम्हें कुछ खबर भी है, कहां जाता है तुम्हारा बेटा?" युगल किशोर जी ने शारदा जी से कहा " अरे,आप क्यों परेशान हो रहे हैं। आता ही होगा। गया होगा किसी दोस्त से मिलने। अरे हाॅ॑! याद आया ग्रुप प्रोजेक्ट कर रहें हैं साथ में बच्चे।" शारदा जी बोली


" समझा करो शारदा। मोहित बड़ा हो गया है। कहीं किसी गलत संगत में न पड़ जाए?" युगल किशोर जी बोले

शारदा जी ने कहा," वो ही तो मैं आपसे कह रही हूॅऺ। बच्चे जब बड़े हो जाएं तो उनसे दोस्त की तरह व्यवहार करना चाहिए। हर समय पूछना या टोकना ठीक नहीं है। हमें अपने बेटे पर विश्वास करना चाहिये।"


जुगल किशोर जी बोले," साथ में हमें आंख और कान भी खुले रखने चाहिए। यही उम्र होती है जब आसानी से बाहर की दुनिया की चमक धमक में युवा खो जाता है।"


"हाँ, तो ठीक है आप पूछ लेना उससे। मुझे पूरा भरोसा है मोहित पर कि वो कहता है तो कुछ कार्य अवश्य होगा। " शारदा जी बोली


आप समझ ही गए होंगे, यहां जुगल किशोर जी और शारदा जी अपने सुपुत्र मोहित की बात कर रहे हैं। मोहित स्थानीय कॉलेज में एम एस डब्लयू यानि मास्टर इन सोशल वर्क्स का विद्यार्थी है। पढ़ने में तीव्र बुद्धि का मोहित सभी की मदद करने में सदैव तत्पर है। सुबह मोहित कॉलेज जाता है। वहाँ से चार बजे तक आता है। कुछ दिनों से मोहित शाम को छह बजे घर से जाता है और करीबन दो घंटों में वापस आता है। जुगल किशोर जी ने पूछा तो मोहित ने बताया था कि एक ग्रुप प्रोजेक्ट के लिए वह अपने तीन और बैचमेट्स के साथ वर्क कर रहा है। इसके लिए सभी एक दोस्त के घर मिलकर कार्य कर रहे हैं।


जुगल किशोर जी और शारदा जी इसी बारे में बात कर रहे हैं। जुगल किशोर एक व्यावहारिक व्यक्ति हैं परन्तु उनकी शंका का समाधान शारदा जी ने मोहित पर पूर्ण विश्वास जता कर किया।


***************************************

घड़ी की सुई आठ पर आ गई। इतने में मोहित घर आ जाता है।

शारदा जी पानी लेकर आती हैं। वह कहती हैं," कपडे बदल कर खाना खाने आ जाओ, बेटा।"

"मम्मी, मैं बस दो मिनट में आया। "

मोहित फटाफट हाथ मुँह धोकर डाइनिंग टेबल की कुर्सी खींचकर बैठ जाता है।

पापा से पूछता है, " पापा आप आज टीवी नहीं देख रहे हैं। "

जुगल किशोर जी कुछ कहते इससे पहले शारदा कहती हैं," आज हम लोग बातें कर रहें थें। "

खाना खाते हुए मोहित पूछता है ," क्या बातें , मम्मी ?"

जुगल किशोर जी कहते हैं ," खाना खा लो, कॉफ़ी पीते हुए बात करते हैं। "

" ठीक है ,पापा।"

खाने के बाद मोहित डलगोना कॉफ़ी बना कर लता है।

जुगल किशोर जी मोहित से हाथ से कॉफ़ी लेकर कहते,"बेटा , मैं कई दिनों से एक बात तुमसे पूछना चाहता हूँ। आशा है, तुम सच सच बताओगे। "

पापा का हाथ अपने हाथ में लेकर मोहित बोला, "बताइये पापा क्या बात है। आप परेशान क्यों हैं ?"

" मोहित, ये तुम दो घंटे के लिए जो जाते हो हर शाम करीब एक महीने से। क्या चल रहा है? ऐसा कौन सा प्रोजेक्ट है, हमें भी बताओ। "

मोहित ने कहा,"पापा, इस के बारे में आज मैं आप दोनों को बताने ही वाला था। हम चार दोस्त हैं। रोज़ाना शाम को हम चारों कच्ची बस्ती के बच्चों को पढ़ाने जाते हैं। इसके लिए हमें उनकी बस्ती के पास ही एक कमरा एक भले सज्जन ने दे दिया है। शुरू में करीब एक दो बच्चे ही आये। फिर हमने घर घर जाकर बच्चों के माता पिता को समझाया। मुश्किल तो हुई पर अब करीब पंद्रह बच्चें आने लगे हैं। "

शारदा जी गर्व से बोली," देखा, मैंने कहा था न, मोहित गलत काम नहीं कर सकता है। माॅ॑ का विश्वास बोलता है!"

जुगल किशोर जी बोले, " ये तो तुम लोग बड़ा अच्छा कार्य कर रहे हो। घर पर क्यों नहीं बताया। "

मोहित ने कहा," पापा, शुरुआत में लगा कि हम सोच तो रहें हैं पर यदि बच्चे ही नहीं आए या उनके माता-पिता को हम राजी न कर पाए। हम यह काम अपनेआप से करना चाहते थे। अब बच्चे आने लगे हैं तो हम सब अपने घर में बताते। "

जुगल किशोर जी ने पूछा,"बेटा, तुम लोगों ने जो यह सकारात्मक पहल की है वह बहुतों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। वैसे यह विचार कहां से आया तुम लोगों को?"

मोहित ने कहा,"पापा, याद है कुछ दिन पहले हम डिनर के लिए रेस्टोरेंट गए थे। वहां पर टेबल क्लीन करने के लिए जो लड़का था वह काफ़ी कम उम्र का था। मैं जब वाशरूम गया तो वह रास्ते में कारीडोर में मिला था। तब मैंने उससे पूछा था कि क्या वह पढ़ा लिखा है? उसने मुझे बताया था कि घर के बुरे हालातों के चलते वह दिन में होटल में काम करता है। दूसरी कक्षा के बाद पढ़ाई छुटा दी गई थी। उसकी बस्ती में ऐसे बहुत बच्चे हैं जो पढ़ाई छोड़कर काम करने पर मजबूर हैं। मैंने उससे कहा कि अगर शाम को पढ़ने को मिले तो क्या वह और अन्य बच्चे पढ़ेंगे? उसने बहुत खुशी से कहा कि वह भी आएगा और दूसरे बच्चे भी। तब फिर हम कुछ चार दोस्तों ने मिलकर यह काम करने का सोचा।"

शारदा जी बोली," अति उत्तम सोच है , तुम लोगों की। शिक्षा के उजाले से बच्चों के जीवन में बहुत कुछ बदलेगा। बस एक बात मैं अवश्य कहूंगी मोहित, तुम्हारी पढ़ाई पर असर नहीं पड़ना चाहिए। "

"जी मम्मी। आप बिल्कुल चिंता न करें। मैं आपको शिकायत का मौका नहीं दूंगा। "

जुगल किशोर जी बोले," हमारे लायक कोई काम हो तो बताना। "

"पापा-मम्मी , बाद में इन बच्चों का रेगुलर सरकारी स्कूल में एडमिशन करवाने में और किताब व काॅपी के लिए आपसे मदद लेंगे। "

मोहित की बात सुनकर जुगल किशोर जी और शारदा जी ने ख़ुशी ख़ुशी कहा," ज़रूर बेटा। जब कहो।"


दोस्तों , आशा है आपको मेरी यह रचना पसंद आएगी। निगाह रखने के साथ साथ युवा होते बच्चों पर भरोसा करना भी ज़रूरी है।


दोस्तों, आप अपनी राय बताइए कि आप इन परिस्थितियों में होते तो अपने बच्चे, खास तौर से युवा होते बच्चों से आप किस तरह व्यवहार करते?


१) सख्त माता-पिता का जहां बच्चे आपसे सिर्फ डरें और मन की बातें न बता सकें।

२)ओवर फ्रेंडली माॅम डैड का जहां आप इतना खुल जाएं बच्चे से कि वह सब कुछ शेयर करें पर आपकी नसीहत या सीख की उसकी नज़रों में कोई वैल्यू नहीं रहे।

३)या दोनों के बीच का संतुलित वाला जिसमें बच्चे आपसे खुलकर बातें बता सकें, आप उनसे पूछ सकें और साथ में आपकी सीख को भी मानें, अपना मत भी बच्चें रख सकें।


आप अपनी राय कमेंट सेक्शन में साझा कीजिए और यदि ब्लाॅग पसंद आया है तो कृपया लाइक और शेयर कीजिएगा।

ऐसी ही अन्य खूबसूरत रचनाओं के लिए आप मुझे फॉलो भी कर सकते हैं।

धन्यवाद।


-प्रियंका सक्सेना

(मौलिक व स्वरचित)


#माॅ॑ होने पर गर्व

#7दिन7ब्लाॅग

What's Your Reaction?

like
0
dislike
0
love
0
funny
0
angry
0
sad
0
wow
0