भारत में दशहरा मेला देखना है तो यहाँ ज़रूर आएँ

भारत में दशहरा मेला देखना है तो यहाँ ज़रूर आएँ

नवरात्रों के 9 दिन के बाद आने वाला दशहरा बड़े धूमधाम से देश के सभी हिस्सों में मनाया जाता है। इस त्यौहार का संदेश यह होता है कि असत्य चाहे जितना भी मजबूत क्यों ना हो, लेकिन सत्य की विजय अवश्य होती है। अर्थात बुराई पर अच्छाई की अंतिम विजय निश्चित है। 

भारत के अधिकांश हिस्सों में दशहरे का त्यौहार मनाया जाता है, लेकिन कुछ जगह अपने भव्य दशहरा सेलिब्रेशन के लिए काफी प्रसिद्ध हैं-

बस्तर का दशहरा:- कहा जाता है कि बस्तर में 600 वर्ष से ये पर्व मन रहा है ।

छत्तीसगढ़ में बस्तर जिले के दण्डकरण्य में भगवान राम अपने चौदह वर्ष के दौरान रहे थे। इसी जगह के जगदलपुर में मां दंतेश्वरी मंदिर है, जहां पर हर वर्ष दशहरे पर वन क्षेत्र के हजारों आदिवासी आते हैं। बस्तर के लोग 600 साल से यह त्योहार मनाते आ रहे हैं। इस जगह पर रावण का दहन नहीं किया जाता। यहां के आदिवासियों और राजाओं के बीच अच्छा मेल जोल था। राजा पुरुषोत्तम ने यहां पर रथ चलाने की प्रथा शुरू की थी। इसी कारण से यहां पर रावण दहन नहीं बल्कि दशहरे के दिन रथ चलाया जाता है।

कुल्लू का दशहरा:- भारत में इसे सबसे अधिक भव्य दशहरा सेलिब्रेशन के स्थान के तौर पर जाना जाता है। कहा जाता है कि यहां पर दशहरे का त्यौहार 17वीं शताब्दी से जारी है। कुल्लू में दशहरा 7 दिन तक लगातार चलता है ।

मैसूर का दशहरा :- यहां दशहरे का त्यौहार लगातार नौ दिनों तक जारी रहता है और इस दौरान पूरे मैसूर शहर को दुल्हन की तरह सजाया जाता है। इसके साथ ही मशहूर मैसूर पैलेस को बड़े भव्य तरीके से सजाया जाता है। यहां चामुंडेश्वरी मंदिर में विशेष तौर पर दशहरे का आयोजन होता है और इस आयोजन को देखने के लिए दुनिया भर के सैलानी इस दौरान एकत्रित होते हैं।

उत्तर भारत का दशहरा :-उत्तर भारत के दशहरे में रामलीला भी खास आकर्षण का केंद्र होती हैं इसमें कुछ शहरों की रामलीला ने तो देश भर में काफी ख्याति तक अर्जित कर ली है। रामलीला का मंचन दशहरे से लगभग दस दिन पहले आरंभ हो जाता है और दशहरे के दिन रावण दहन के साथ इसका समापन होता है। उत्तर भारत में तो रामलीला मंचन के लिये विशेष रुप से मैदान भी तैयार किये जाते हैं। दिल्ली का रामलीला मैदान इसका एक उदाहरण है।

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