बिटिया की सगाई रस्म: Blog post by Seema Praveen Garg

बिटिया की सगाई रस्म: Blog post by Seema Praveen Garg

भारतीय शादियां त्योहारों की तरह होती हैं, जिन्हें प्रेम, मस्ती, संगीत और नृत्य के साथ मनाया और मनाया जाता है और परिवार और के अनुसार विभिन्न अनुष्ठानों और समारोहों का पालन किया जाता है।


भारतीय संस्कृति में सगाई की रस्म विवाह से पूर्व होने वाला एक महत्वपूर्ण रिवाज़ है। जिसमे होने वाले वर तथा वधू को औपचारिक रूप से आमने- सामने बिठाकर वाग्दान संस्कार किया जाता है। हिन्दू धर्म में ‘वाग्दान’ की परम्परा वैदिक काल से ही चली आ रही है।

इस रस्म के अंतर्गत वर के परिवार वाले वधू के परिवार वालों को यह वचन देते हैं कि वह उनकी पुत्री को स्वीकार करेंगे तथा भविष्य में उसकी सलामती के लिए पूर्णतः उत्तरदायी होंगे। इस रस्म के द्वारा दोनों परिवार एक-दूसरे से सामंजस्य तथा समन्वय निभाने का वचन देते हैं। इस दौरान उन्हें भी एक दूसरे के रीति-रिवाजों से परिचित होने का अवसर मिलता है।


सगाई एक ऐसा दिन होता है जो दो प्यार करने वालो के लिए बेहद ख़ास होता है, इस दिन वह एक दुसरे को अंगूठी पहनते है | यह ख़ास दिन से ही वह एक दुसरे के प्यार के बंधन में बंध जाते है । मां के लिए ये दिन खुशी और गम दोनों मिला जुला होता है। (जैसे जब बच्चा जन्म लेता है तो मां को दर्द के साथ साथ दर्द भी होता है) आज उसकी नाजों से पली बिटिया किसी और की भी होने जा रही है। एक नई दुनियां बसाने। मेरी बेटी की शादी अभी हुई है और


बेटी की सगाई के अवसर पर मैने आशीर्वाद रूपी स्वरचित कुछ लाइन्स लिखीं हैं....


बिटिया की आज है सगाई,

खुशी से आँख है भर आयी।

आने वाला है तेरा राजकुमार,

बेटी तू कर ले श्रृंगार।

मन से प्रीत जो तुम को हो जाए,

पूरी मात पिता की आस हो जाए ,

मन ही मन हम दिल से ये शगुन मनाए।


ये पल का ईश्वर ने दिया,

जिसे हमने दिल से स्वीकार किया।

ख़ुशी बिखरी रहे राहो में,

सपने सजे रहे आँखों में ।

जब तू सजना के घर जाये,

जीवन की सभी खुशियाँ पाये।


माँग भरी रहे तेरी सिंदूरी,

नहीं हो कभी अपनो से दूरी ।

याद हमें तू बहुत आएगी,

अपना बचपन छोड़ जायेगी।


हम तुझे ना भूल पाएंगे,

हर खुशी में तुझे बुलाएँगे,

तेरे साजन लेकर आएंगे,

तू मेरी ही तो परछाई है,

आज आंख ख़ुशी से भर आई है ।।

#वेडिंगसीजन

#Seema Praveen Garg

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