शतरंज की रानी

शतरंज की रानी

शतरंज एक ऐसा खेल है जिसमें सामान्यता पुरुषों का ही राज माना जाता है। हमारे देश में भी विश्वनाथन आनंद ही एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हें सभी जानते हैं ।ऐसे माहौल में एक महिला खिलाड़ी का अपने दम पर नाम कमाना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है ।
आज मैं आप सभी को शतरंज की महिला खिलाड़ी कोनेरू हंपी से मिलवाने जा रही हूँ।मैंने भी उनके बारे में विस्तार से जाना जब मेरी बेटी एक अंतरराष्ट्रीय शतरंज खिलाड़ी बनी। वह भी कोनेरू हंपी की तरह बनना चाहती है ।जहाँ शादी और बच्चों के बाद एक खिलाड़ी की जिंदगी रुक जाती है उन्होंने फिर से वापस आकर पूरी दुनिया में अपने हुनर और प्रतिभा का लोहा मनवाया। पिछले साल जब पहली बार भारतीय शतरंज टीम ओलंपियाड में प्रथम आई ,कोनेरू हंपी भी इस टीम का एक हिस्सा थी।

इनका जन्म 31 मार्च 1987 को आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में हुआ था ।वह गरीब परिवार से थी ।वे पढ़ाई में भी बहुत अच्छी थी ।पढ़ाई के प्रति उनकी लगन और मेहनत को देखकर उनके टीचर उनसे बहुत खुश रहते थे ।जब वे छोटी थी तब वह घर पर ही अपने माता पिता के साथ शतरंज खेलती थी। वे छोटे में ही अपने पिता को भी हरा देती थी। कोनेरू  का शतरंज के प्रति रुचि को देखकर उनके पिता को सभी ने कहा कि वे उसे शतरंज में आगे बढ़ाएँ और वे निरंतर आगे बढ़ती गई ।उन्होंने जिले स्तर पर कई शतरंज  प्रतियोगिताएँ जीतकर सफलता प्राप्त की और अपने कदम आगे बढ़ाएँ।

जब 1996 में राष्ट्रीय शतरंज चैंपियनशिप प्रतियोगिता आयोजित हुई तब  उसमें हिस्सा लेकर उन्होंने पूरी लगन और मेहनत के साथ इसे जीता और अपने माता-पिता का नाम रोशन किया ।जब कोनेरू हंपी को यह पता चला कि लड़कियों की राष्ट्रीय रैपिड शतरंज प्रतियोगिता हो रही है तब उन्होंने इसमें हिस्सा लेने का फैसला लिया और अपना शानदार प्रदर्शन करते हुए इसे जीता ।यह प्रतियोगिता जीतकर कुनेरू विश्व की दूसरी महिला शतरंज खिलाड़ी बन गई थी। आज   महान महिला भारतीय शतरंज खिलाड़ी के रूप में कोनेरू हंपी को जाना जाता है ।

शतरंज खेलना और उसकी हर चाल को समझना कोई आसान काम नहीं है। जब वह खेलती है तब उनका पूरा फोकस शतरंज की चाल पर रहता है और वह सामने वाले प्रतिद्वंदी को मात देकर शतरंज खेल में जीत हासिल कर देती है। यही उनकी सबसे बड़ी खूबी है। नंबर दो आने के बाद कोनेरू ने बता दिया कि महिलाएँ किसी से कम नहीं होती। उन्हें अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है। माँ बनने के बाद दो साल का ब्रेक लेने के बाद उन्होंने फिर से वापसी की और वर्ल्ड चैंपियन बनी ।वर्ल्ड चैंपियनशिप में चीन की प्लेयर को हराकर विश्वनाथन आनंद  के बाद इसे जीतने वाली वे दूसरी भारतीय बन गई है। उन्होंने साबित कर दिया है कि महिलाएँ हिम्मत  करें तो कुछ भी कर सकती हैं ।

डाॅ मधु कश्यप 

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