डॉक्टर बिटिया #7Days7Blogs

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बचपन से आजतक हम अपने मां के मुंह से अपनी तारीफ सुनने को तरस गए...जब भी उनसे इस बारे में कुछ कहो तो..एक जी ज़बाब मिलता है.."अपने बच्चों की तारीफ खुद क्या करना..जब दूसरे लोग आपके बच्चों की तारीफ करें..तब समझो कुछ अच्छा किया उसने.."और हमे उनकी ये फिलॉस्फी कभी समझ में नहीं आई...


दिन गुजरे हम मां बन गए और हमारी मां नानी..बच्चे बड़े हो गए..अच्छी शिक्षा,कुशाग्र बुद्धि और अपनी मेहनत के बल पर बेटी डॉक्टर बन चुकी.. इसी बीच कोरोना नामक इस महामारी ने ..पूरी दुनिया में उथल पुथल मचा दी..संसार का एक भी परिवार शायद ही इससे अछूता रहा हो... करीब एक साल से ज्यादा हो गए है इस महामारी को फैले....अस्पताल कोविड के मरीजों से अभी भी भरे पड़े है.. और डॉक्टरों को फुर्सत नहीं है..


अब घर में एक डॉक्टर है तो सभी रिशेदारों और परिचितों को भी सहूलियत है..बिना संकोच बेटी से .. कोविड के दौरान

डॉक्टरी परामर्श लेते रहे..और वो भी अपनी ड्यूटी के अतिरिक्त... अपना कर्तव्य समझ ..सबकी सहायता में तत्पर रही...


कोविद संक्रमित होने पर..उसके द्वारा बाते गए इलाज और सहायता से अनेक परिचित और रिश्तेदार अस्पताल गए बिना..घर पर रहकर ही ठीक हो गए..


ठीक होने के बाद हर एक ने..बेटी का शुक्रिया तो कहा ही.. हमसे भी उसकी भूरि भूरि प्रशंसा की..और उसके उज्ज्वल भविष्य एवम खुशहाल जीवन का आशीर्वाद दिया...तो हमें इतनी लायक बेटी की मां होने पर गर्व हुआ... जब कोई ऐसा कहता..तो हमारी आंखों में आंसू आ जाते थे...उस दिन हमें अपनी मां की बातों का मर्म समझ में आया.. कि जब दूसरे लोग आपने बच्चे की सफलता की बधाई देते हैं..तभी समझो वो सफल है...


नीलम

#मां होने पर गर्व

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