बेटी दिवस !

बेटी दिवस !

“वाह क्या बात है अपनी बेटियां परियां और दूसरे की बेटी क्या नजर आती है इनको”।
“अरे क्यों बडबडा रही है सुबह-सुबह ” माँ ने रीना से पूछा।
“कुछ नहीं माँ मामाजी की पोस्ट देख रही थी”

आज डॉटर्स डे है न तो मामाजी ने अपनी बेटियों को टैग करके मैसेज लिखा है “मेरी परिया i am proud of you”
इसलिए बडबडा रही थी आप लोगो को कैसे बोलते थे। छोटी मौसी की शादी में थोडा़ देर क्या हो गयी। क्या नही बोला था बूढी हो रही है कोई लडका भी नहीं मिल रहा है।
सात-सात लड़कीयाँ , पिताजी ने बोझ बढा दिया है। जबकि नानाजी ने कभी आप लोगो को बोझ नहीं समझा अपनी हैसियत से अच्छा घर ढूँढ कर दिया आप सभी को।
आप लोग भी तो नानाजी की परियां थी पर कैसे बडे़ मामाजी को मौसी की शादी में लग रहा था। सब खर्च कर देना हमारे लिए तो कुछ बचाना ही नहीं। और अब वही अपनी बेटियों पर लाखों खर्च करते हैं।
कोई बात नहीं करिये आपकी बेटियाँ पर आप दूसरे को दुखी तो नहीं कर सकते हैं।
अच्छा-अच्छा अब शांत हो जा “माँ ने कहा।
अरे मम्मी मामाजी की पोस्ट पर नानाजी का कंमेटस है
अच्छा क्या लिखा है पिताजी ने
लिखते है कि” जैसे ईश्वर ने तुम्हे बेटियां दी है बैसे ही ईश्वर ने मुझे भी सात अनमोल रत्न दिये हैं और मुझे अपनी बेटियों पर गर्व है कि उन्होंने कभी मेरा सिर झुकने नहीं दिया। मेरी बेटियों को बिटिया दिवस की हार्दिक बधाई “।
वाह नानाजी क्या जबाब दिया है मामाजी को। रीना के चेहरे पर खुशी झलक रही थी।
स्वरचित
श्रुति त्रिपाठी

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