ढलती साँझ

ढलती साँझ

एक दिन एक बुजुर्ग मिले जो बड़ी शान से बता रहे थे कि मेरा बड़ा बेटा न्यूयॉर्क में जॉब करता है छोटा बेटा शिकागो में है और बेटी दामाद कनाडा जब मैंने उनसे पूछा और आप अकेले रहते हैं क्या ? यह सुनकर जैसे एकदम से उनकी आंखों में नमी आ गई कुछ मुंह से बोले नहीं पर मुझे समझ आ गया इस उम्र में जब ठीक से चल भी नहीं पा रहे है अकेले रहना कितना मुश्किल है …

पहले जब रिश्तो से भरा परिवार होता था
एक दूर चला जाए तो दूसरा पास होता था
नहीँ तो पास में चाचा,ताऊ का मकान होता था
तो बुढापा भी आसानी से कट जाता था

हम खुश हो रहे हैं हमने अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाई
मेरे बच्चे विदेश में हैं कितने गर्व से कहते हैं भाई
पर यह भी तो बताइए उस उच्च शिक्षा ने आपको क्या दिया
जीवन की ढलती सांझ में अकेला कर दिया!

पढ़ लिख कर डॉलर की चाहत में बस गए बच्चे विदेश जाकर कभी-कभी तो मां-बाप को कंधा भी नहीं देते आकर
अरे अपने देश में क्या पैसे की कमी है चलो थोड़ा है तो क्या माँ बाप के प्यार की छांव तो घनी है काश वक्त रहते अब भी संभल जाए
नहीं तो जैसे अखबारों में पढ़ते हैं बन्द घर में बूढ़ी मां का कंकाल मिला वही हाल हमारा ना हो जाए

गलती के लिए क्षमा प्रार्थी!
आपकी सखी
अनु गुप्ता

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