दूसरा बच्चा नहीं नहीं !

दूसरा बच्चा नहीं नहीं !

अरे माधवी ! तुम्हारी बेटी पांच साल की हो गई है दूसरेे बच्चे की खुशखबरी कब दे रही हो ? बेटा हो या बेटी ? दो बच्चे तो होंने ही चाहिये ? परिवार पूरा हो जायेगा | सुरेखा ने माधवी से कहा | सुरेखा , माधवी की पड़ोसन थी दोनों ही एक दूसरे से हर बात सांझा करती थी सुरेखा की बात सुनकर माधवी ने कहा दूसरा बच्चा, नहीं -नहीं दीदी ! अब नहीं ? एक बेटी ही ठीक है मेरी | अब मैं वो दर्द , तकलीफ और तो और वो मानसिक आघात बार बार नहीं सहन कर सकती ?

मैं तो पहले बच्चे के जन्म के वक्त ही टूट गई अब वहीं बर्ताव दोबारा झेलने की हिम्मत नहीं है मुझमें ! सुरेखा, माधवी की बात सुनकर हैरान थी और उसने पूछ ही लिया माधवी से , कैसा मानसिक आघात बात क्या है माधवी ? सुरेखा की बात सुनकर माधवी को अपना पांच साल पहले वाला दर्द फिर हरा दिखने लगा था और दूसरे बच्चे की चाहत उसके मन से दूर किनारा पकड़नेे लगी थी उसने सुरेखा को बताया कि पहली डिलेवरी के समय मेरे पति व मेरी सासुमां मुझे हॉस्पिटल लेकर गये रात का वक्त था वहां डॉक्टर साहिबा नदारद थी तो पहले तो मुझे एडमिट करने से इंकार कर दिया गया मैं दर्द से परेशान थी मेरे पति और सासुमां मेरी पीड़ा से परेशान थी काफी देर तक बातचीत के बाद मुझे वहां एडमिट किया गया |                               

एडमिट तो मैं जैसे तैसे हो गई पर वहां मेरी अनदेखी की जाने लगी, स्टाफ के द्वारा किया गया बर्ताव , वो अपशब्द , मैं नहीं भूल सकती मुझे वहां उचित सेवायें प्रदान नहीं की गई जो कि एक गर्भवती महिला को मिलना चाहिये बार बार मेरे घर वालों पर सीजेरियन के लिये दवाब बनाया जा रहा था तब मेरी सासुमां ने कहा पहले आप जांच तो कीजिये कि बच्चे का जन्म नार्मल तरीके से होगा या सीजेरियन से | जैसे तैसे नर्सों ने मुझे देखा बाद में डॉक्टर साहिबा आई और मेरी नार्मल डिलेवरी हुई | मैंने उस वक्त मानसिक आघात सहन किया है जो भुलाये नहीं भूलता तभी से मैंने दूसरे बच्चे के लिये कान पकड़ लिये दीदी | सुरेखा ,माधवी की बातों को बड़़े़े गौर से सुनती है और माधवी से कहती है तुमने जो कुछ भी उस दौरान सहन किया है वह प्रसूति हिंसा कहलाती है जो सार्वजनिक या किसी भी निजी हॉस्पिटल में पहले बच्चे के जन्म के दौरान या दूसरे बच्चे के जन्म के दौरान हो सकती है |                                                             

गर्भवती महिला के साथ इस तरह का व्यवहार ट्रामा कहलाता है | प्रसूति हिंसा के और भी उदाहरण हैं जैसे गर्भवती महिला के साथ कभी कभी शारीरिक हिंसा , अपमान भरे मौखिक शब्द कहना , शारीरिक शोषण , यौन शोषण , भेदभाव , अनदेखी करना , भोजन पानी मुहैया ना करवाना ,उचित स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित करवाना , महिलाओं और प्रदाताओं के बीच खराब तालमेल , प्रैंगनेन्सी के दौरान या बाद में महिला को बुनियादी सेवायें न देना सब प्रसूति हिंसा का रूप है |

एक शोध में पता चला है कि 555महिलाओं को शामिल करके गर्भावस्था के दौरान या डिलेवरी के बाद की महिलाओं को शामिल करके उनका इंटरव्यू लिया गया जिसमें 13 फीसदी महिलाओं का कहना था कि उन्होंने बच्चे के जन्म के वक्त प्रसूति हिंसा का सामना किया है | 5 फीसदी महिलाओं का कहना था कि उन्हेें पता ही नहींं कि उन्होंने बच्चेे के जन्म के दौरान किसी भी हिंंसा का अनुभव किया हैै या नहीं ?  जबकि 49 फीसदी महिलाओंं का कहना था कि प्रसव के दौरान प्रसूति हिंसा का अनुभव पूरी तरह से किया  किसके बारे में वह पहले से जानती थी कि यह बर्ताव प्रसूति हिंसा कहलाती है जिसकी उन्होंने शिकायत भी  दर्ज कराई थी |                               

NCB की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में प्रसूति हिंसा के मामले अधिक देखे जाते हैं प्रसूति हिंसा के मामले में अस्पताल लोकपाल, क्षेत्रीय चिकित्सा परिषद, लोक अभियोजक कार्यालय या क्षेत्र के सार्वजनिक प्रतिवादी कार्यालय केे साथ शिकायत दर्ज की जा सकती है या 180 डायल के माध्यम से भी जानकारी व मार्गदर्शन प्राप्त किया जा सकता है |

प्रसूति हिंसा केे  खिलाफ लड़ाई में बहस और  सूूूूचना विनिमय को बढ़ावा देने के लिये परियोजनाएं और समूह बनाये गये हैं ताकि  महिलाएं अपनी गर्भावस्था की स्वायत्ता प्राप्त कर सकें व  प्रसूति हिंसा से छुटकारा पा सकें | सुरेखा की बात सुनकर माधवी अब जागरुक हो चुकी थी  और अपने डर से काफी हद तक निजात पा चुकी थी व अबकी बार  वह दूसरी बार जागरूकता के साथ बच्चे को जन्म देने के लिए तैयार थी |                                                                                                                                               

रिंकी पांडेय

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