एक हजारों में मेरी बहना है

सीमा दीदी अपनी छोटी बहन तनु के लिए एक बहुत ही सुंदर ड्रेस खरीद कर लाती हैं तनु सुंदर ड्रेस पाकर बहुत खुश होती है तभी तनु की बड़ी बहन सलोनी ड्रेस देखती है और कहती है कितनी सुंदर ड्रेस है दीदी ,

एक हजारों में मेरी बहना है

सीमा दीदी अपनी छोटी बहन तनु के लिए एक बहुत ही सुंदर ड्रेस खरीद कर लाती हैं तनु सुंदर ड्रेस पाकर बहुत खुश होती है तभी तनु की बड़ी बहन सलोनी ड्रेस देखती है और कहती है कितनी सुंदर ड्रेस है दीदी ,……

मेरे लिए ऐसी ड्रेस क्यों नहीं लाई ? सीमा दीदी सलोनी से कहती है…….सलोनी तुम्हारे ऊपर यह ड्रेस कहां अच्छी लगेगी ,यह तो मेरी प्यारी छोटी बहन तनु के ऊपर अच्छी लगेगी । कितना गोरा रंग है तनु का,….इसको पहन कर  बिल्कुल अंग्रेज जैसी दिखेगी ।

सलोनी को यह सुनकर  बहुत बुरा लगता है  क्योंकि अक्सर उसको सांवले  रंग के कारण  यह सब सुनना पड़ता था । सीमा दीदी तो तनु को ही प्यार करती थी। सलोनी इस तरह से बार-बार अपनी छोटी बहन तनु के गोरे रंग की की तारीफ  सुन-सुनकर उससे चिढ़ने लगी थी । 

सलोनी  चिढ़कर सीमा दीदी से पूछती है मैं क्यों नहीं पहन सकती  यह ड्रेस? सीमा दीदी कहती है सलोनी तुम्हारे ऊपर अच्छी नहीं लगेगी कितनी बार बताऊं ……..सलोनी गुस्सा होकर  वहां से चली जाती है , मौका पाकर सलोनी तनु के लिए लाई गई ड्रेस को कैंची से काटकर खराब कर देती है।

तनु अपनी कटी हुई ड्रेस देखकर बहुत रोती है लेकिन सलोनी को तो बहुत मजा आ रहा होता है यह सोच कर  अब तनु भी यह ड्रेस नहीं पहन पाएगी । घर वाले सलोनी और तनु की अक्सर तुलना करते रहते थे जिसके कारण सलोनी और तनु में आपस में बिल्कुल नहीं बनती थी दोनों एक दूसरे को अपना दुश्मन समझती थी वक्त के साथ-साथ यह दूरी और बढ़ गई थी । दोनों बड़ी हो जाती हैं।  लेकिन  दोनों के व्यवहार में कोई खास फर्क नहीं पड़ता है ।          

तनु और सलोनी की शादी हो जाती है। शादी के बाद दोनों अपनी गृहस्थी में खो जाती हैं दोनों में बहुत ज्यादा बात नहीं होती थी । जब भी तनु सलोनी से मिलती थी  कुछ ना कुछ व्यंग कर ही देती थी । लेकिन सलोनी  शादी के बाद काफी समझदार हो गई थी  इसलिए  अब  वह तनु की बातों का बुरा नहीं मानती थी  बल्कि तनु को अच्छी-अच्छी  बातें बताती थी  ।तनु को भी अपनी बड़ी बहन सलोनी की बातें सही लगती थी  ।वह उन सभी बातों पर अमल करने लगी जो सलोनी उसे बताती थी  ।

एक दिन तनु को पता चलता है कि सलोनी के पति राज की तबीयत बहुत खराब है। तनु ऐसे में कुछ नहीं सोचती है ऐसी दुख की घड़ी मे वह  तुरंत अपनी बहन सलोनी के घर जाती है और उसे  सांत्वना देती है  दीदी सब ठीक हो जाएगा । तुम चिंता मत करो।  मैं हूं आपके साथ।

सलोनी अपने पति की   खराब तबीयत के कारण बहुत दुखी थी। ऐसे में तनु का साथ पाकर सलोनी को बहुत अपनेपन का एहसास होता है । समय के साथ  तनु और सलोनी को  अपनी गलती का एहसास हो जाता है।   तनु को भी लगता है कि सलोनी दीदी इतनी बुरी भी नहीं है जितना वह समझती थी  ।अब दोनों को ही लगता है कि वह बेकार में ही बचपन में आपस में इतना लड़ाई करती थी आज दोनों बहनों में बहुत प्यार है दोनों घंटों फोन पर अपने मन की बात करती हैं, और कभी-कभी मजाक में कहती है …ओ बहना मेरे दिल में रहना। एक हज़ारों में मेरी बहना है।

सखियों,हमें किसी भी रिश्ते को हल्के में नहीं लेना चाहिए।। समय के साथ बहुत कुछ बदल जाता है ।अपने अच्छे व्यवहार से हम किसी के भी दिल में खास जगह बना सकते हैं जैसे सलोनी और तनु दोनों बहनों ने अपनी आपसी समझ से अपने रिश्ते को मजबूत कर लिया और एक दूसरे के सुख-दुख में साथी बनी।


दोनों का प्यार और आपसी समझ देखकर अब सीमा दीदी को भी अपनी गलती का एहसास हो जाता है और उन्हें लगता है कि वह बेकार ही दोनों बहनों की तुलना करके उनको दुख पहुंचा रही थी। वह दोनों बहनों का प्यार देखकर  बहुत खुश होती हैं। सखियों आपको मेरा यह ब्लॉग कैसा लगा आपके विचारों का तहे दिल से स्वागत है।धन्यवाद।

अनीता सिंह

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