एक मुलाकात अतीत से

एक मुलाकात अतीत से

अरे! तुम यहाँ ऐसे अकेले क्यूँ बैठी हो?

चिरपरिचित एक स्वर ने सुषमा का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

कुछ नहीं, बस यूँही थोड़ा सोच विचार में डूबी थी।

कोई समस्या हो तो मुझे बताओ। मैं हल कर दूँगी। उस महिला ने कहा।

तुम? सुषमा ने संकोचजनक प्रश्न करते हुए उसकी ओर देखा।

हाँ मैं। देखो अगर समस्या क्या है वो भी नहीं बता सकती तो कोई बात नहीं, मैं तुमसे अपने जीवन की कुछ बातें साझा करती हूँ, शायद तुम्हें उससे मदद मिले।

सुषमा ने सोचा, बिना कारण जाने कभी कोई मुश्किल का समाधान मिला है क्या कभी? फिर भी सुन ही लेती हूँ ,शायद कोई ऐसी बात हो जो मेरे काम आ जाये।

यह सोचते हुए सुषमा ने अपना सारा ध्यान उस महिला पर केंद्रित करते हुए कहा- कहो, क्या कहना है?

किसी चीज़ को पाने के लिए, शिद्दत तो चाहिए पर उसके साथ ही साथ उसे पाने की प्रक्रिया से इस कदर लगाव होना चाहिए कि उसकी प्राप्ति के सुख से ज्यादा अनमोल उससे जुड़ी दिन प्रतिदिन की प्रक्रिया,बन जाए।

यह जरूरी नहीं कि जीवन से जुड़ी हर छोटी बड़ी विषय की तुम्हें जानकारी हो। इसलिए अपनी जिज्ञासा और शोध करने की सक्षमता को कभी भी कमजोर होने मत देना।

अपनी मानसिक ऊर्जा को अति महत्वपूर्ण चीजों के लिए सहेज कर रखो।

जीवन में लक्ष्य एक से अधिक हो तो चलेगा लेकिन उसे मुकम्मल करने की कोशिश एक एक करके ही करना,वरना रास्ता भटकने का डर हो सकता है।

आत्म-प्रेम करना अच्छी बात है पर स्व-प्रेम के नाम पर किसी भी प्रकार के बदलाव को नकारना एक अनुचित प्रवृत्ति को जन्म देती है।

अपनी योग्यता का आंकलन किसी और की क्षमता अथवा अक्षमताओं को ध्यान में रखकर कभी नहीं करना। इससे तुम स्वयं का ही मुल्य घटाओगी।

सीखने की ललक और रफ्तार लगातार जरूर हो पर उसे भी तनिक उचित समय पर विश्राम देना अति आवश्यक है।

ईमानदार बनो,अनुशासन का पालन भी करो, किंतु कठोर ना बनो।

जब भी मौका मिले, अपनी सुविधा के दायरे से असुविधा की भूमि पर छलाँग जरूर लगाओ।तुम्हारी वीरता और बुद्धिमता को समझने का इससे अच्छा अवसर और कोई नहीं है।

थोड़ा अल्लहड़पन, अजीबोगरीब रवैया हमेशा अपने व्यक्तितव में बनाये रखना। यह तुम्हें समाज और जीवन के प्रति एक अलग दृष्टिकोण देगी।

सोचो भविष्य की और याद करो अतीत को, पर जियो जैसे तुम्हें वर्तमान ,जीने के लिए कहे।

अपने आप पर यकीन रखो। किसी के द्वेषपूर्ण और ईर्ष्या से भरे ज्ञान के आधार पर अपनी सोच विकसित करने से अच्छा है खुद की स्वीकृति से खुद का विकास करना।

अगर मैं यह सब पहले जानती तो मैं अपने व्यक्तिगत विकास को सही आकार दे पाती। मैं समय यात्रा नहीं कर सकती- लेकिन मैंने अबतक जो कुछ भी सीखा है, उसे तुमसे साझा कर सकती हूं, ताकि वो तुम्हारे कुछ तो काम आ सके। अच्छा, अब मैं चलती हूँ। काफी देर हो गई है।भविष्य में तुमसे मिलने की कामना रहेगी
यह कहते हुए वो महिला मुड़ कर जाने लगी।

सुषमा ने उसे रोकने की कोशिश की पर इससे पहले वो कुछ कहती या करती, उस महिला की छवि ओझल सी हो चली थी।

तभी एक जोर का धमाका हुआ। और सुषमा की आँखें चौंधियाते हुए खुली।

क्या था वो? कौन थी वो लड़की जिससे मैं बातें कर रही थी?
एक मिनट.. उसका भी नाम सुषमा था! और... मेरा भी नाम... सुषमा है! कहीं.. वो.. मैं? मैं थी? पर कैसे? क्या मैं अपने अतीत से मिल कर आ रही हूं? पर ये कैसे सम्भव है? समय यात्रा?

तभी, वहाँ नर्स आई। अरे! तुम जाग गई?
मैं अभी डॉक्टर को बुलाती हूँ। तुम आराम से लेटी रहो।ठीक है।

सुषमा ने वापस आँखें बंद कर के सोने की कोशिश की। इस उम्मीद से की फिर एक बार बीते हुए समय मे वापस जा सकेगी।

शायद अतीत को कुछ और बताना बाकी रह गया था।

धन्यवाद।
सुषमा

What's Your Reaction?

like
0
dislike
0
love
0
funny
0
angry
0
sad
0
wow
0