एक मुलाकात Safe N’ Happy Periods के साथ

एक मुलाकात Safe N’ Happy Periods के साथ

पीरियड्स /मासिक धर्म महिलाओं में होने वाली एक मासिक प्रक्रिया है। जिसका सीधा सीधा सम्बन्ध महिलाओं के प्रजनन तंत्र से होता है। पीरियड्स के बारे में बात करना , उन दिनों के दौरान क्या करना ठीक है और क्या नहीं ?लड़कियों और महिलाओं का खान पान कैसा हो ,ये सवाल बहुत आम होने के साथ साथ अहम भी होते हैं। इस विषय की गंभीरता को समझते हुए , हमने मुलाकात की Safe N’ Happy Periods ( NGO In Navi Mumbai ) की Founder सारिका गुप्ता जी से।

सारिका जी ने Safe N’ Happy Periods की शुरुआत कुछ 4 साल पहले की थी। इसकी शुरआत का एक ही उद्देश्य रहा ” छोटी बच्चियों और महिलाओं को पीरियड्स से जुडी अहम बातों के बारे में जागरूक करना। द पिंक कॉमरेड की फाउंडर वानी भारद्वाज ने सारिका गुप्ता जी से मिलकर क्या कुछ पूछा ,आइये जानते हैं –

सवाल – ” Safe N’ Happy Periods ” ये नाम आपने कैसे निश्चित किया और क्या मुख्य उद्देश्य है Safe N’ Happy Periods की शुरुआत के पीछे ?

जवाब – काफी समय से वह देख रही थी की बाजार मे आर्गेनिक पैड्स है, क्लॉथ पैड्स हैंI उनको लगा की मेंस्ट्रुअल एजुकेशन में सिर्फ पैड्स की बातें हो रही है और अवेयरनेस की ओर बहुत ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा रहा है ..वहीं से शुरुआत हुई की कैसे लोगो को जागरूक किया जाये।

और यह समझाया जाये की पीरियड एजुकेशन पर एजुकेशन से कही आगे तक है सेनेटरी पैड्स सिर्फ उसका एक छोटा सा हिस्सा है। और तभी अपनी एक मित्र से बात करते करते जहन में आया की पीरियड्स से जुड़े विषयों पर बहुत कम चर्चा की जाती हैं। ये विषय जितना महत्वपूर्ण है ,इसे उतना ही ज़्यादा नज़रअंदाज़ किया जाता रहा है। मैं खुद एक ऐसे शहर और राज्य (राजस्थान ,कोटा ) से हूँ जहाँ पीरियड्स के बारे में कभी कोई बात नहीं करता। भाग्यशाली हूँ , की मेरी माँ ने बचपन से ही मुझसे हर विषय पर खुलकर बात की।

इन्ही सब बातों और विचारों के बीच , मन में एक नाम खुद ब खुद आया और मैंने उसी समय अपनी दोस्त से कहा ; how about period should be happy and safe ? और वहां से शुरुआत हुई SafeNhappy Periods की।

सवाल – क्या महिलाएं और लड़कियां पीरियड के दौरान exercise और heavy workout कर सकती हैं ?

जवाब – काफी पीरियड वर्कशॉप के दौरान मैंने ये देखा है की पीरियड के समय भी लड़कियां running और heavy work out करती हैं। उन्होंने बताया की उन्हें बहुत अच्छे iyengar टीचर्स से योग सिखने का मौका मिला … वहाँ उन्होंने सीखा की कुछ योगासन की मदद से आप पीरियड के दर्द को मैनेज कर सकते हो और अपने होर्मोनेस को बैलेंस कर सकते हैं। यही नहीं आगे चलके आपको मीनोपॉज मे भी तकलीफ नहीं होगी। पीरियड वर्कशॉप के दौरान हम स्कूल और कॉलेज में लड़कियों को इन योगासन के बारे में भी बताते है और सिखाते है।

पुराने ज़माने में जब हमारी दादी नानी ये कहा करती थी की रसोई में मत जाओ , एक अलग कमरे में रहो , तब उसके पीछे एक मात्र उद्देश्य हुआ करता था की पीरियड के दिनों में हमारा uterus बहुत ही सवेंदनशील हो जाता है , जिसे आराम और कुछ अलग योग आसन की ज़रूरत होती है।मैं आज की युवा लड़कियों से यही कहना चाहूंगी , इस बात को नकारात्मक रूप से ना लें। और कोशिश करें की पीरियड के दिनों में कठिन व्यायाम , Gym और heavy वर्कआउट ना करें।

सवाल – SafeNhappy Periods की वर्कशॉप्स के दौरान कभी पीरियड से जुडी भ्रांतियों के बारे में बात की जाती है ?

जवाब – बिल्कुल इस विषय पर बात होती ही है , खासकर जब हम स्कूल में वर्कशॉप करते हैं। जब छोटी बच्चियों से हमबात करते हैं , तो वे हमसे पूछतीं हैं की हमे अचार क्यों नहीं खाने देते ? हमें मंदिर क्यों नहीं जाने देते ? तो उनके मन में उठे इन सवालों को हम सिरे से नकार नहीं सकते। छोटी बच्चियों को बहुत सवेदनशील तरीके से समझाना होता है। हम उन्हें बताते हैं की पीरियड्स के दौरान uterus बहुत ही sensitive अवस्था में होता है , और पहले के समय में लोग
आयुर्वेदा को फॉलो करते थे , पहले लो आयुर्वेदिक जीवन शैली को फॉलो करते थे और पीरियड्स मे खान पान का विशेष ध्यान रखा जाता था, इसी के चलते बहुत ज्यादा खट्टा खाना अवॉयड किया जाता था और आगे जाकर वो पीरियड साइकिल को प्रभावित करता है।

सवाल – पैड्स , मेंस्ट्रुअल कप और टेम्पून इनमे से क्या बेस्ट है ? महिलाओं और बच्चियों को इनमे से क्या उपयोग करना चाहिए ?

जवाब – सभी ऑप्शन अच्छे है , हमने एक सर्वे के दौरान ये देखा की कॉटन पैड्स बहुत ही सेफ होते है क्यूंकि उसमे सिंथेटिक का ratio बहुत ही कम रहता है। कॉटन पैड्स नार्मल पैड्स की तुलना में महंगे होते हैं , जिसमे एक पैड की कीमत लगभग १५ से २० रूपए तक होती है।

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