एक नई पहल

एक नई पहल

मैं रसोई घर मे दोपहर के खाने की तैयारी कर रही थी।तभी फोन की घंटी बजी ,मैं जल्दी जल्दी हाथ धुलकर पहुँची तो शिशिर का नाम देखकर जल्दी से फोन उठाया। उनकी खनकती आवाज सुनते ही मैं समझ गई कि लददाख की टिकट कन्फ़िर्म हो गई हैं। शिशिर ने फोन उठते ही बातो की झडी़ लगा दी। मोहतरमा खुश हो जाइये लददाख की फि जाओ मे सैर के लिए ,जल्दी जल्दी पैकिंग कर लो परसो कि टिकट बुक हो गई हैं ,और हा स्वेटर व जैकेट अच्छे से पैक कर लेना वहाँ सरदी बहुत पड़ती हैं।मोटर बाईक से पहाडो़ मे घूमने का एक अलग ही मजा हैं।मैने हस्ते हुए कहा अरे बस बस जनाब घर आयेगे या सारी बाते फोन पर ही करेगे।यह सुनकर इनहोने हस्ते हुए शाम को मिलते हैं कहते हुए फोन रख दिया।

मैंने जल्दी से सारे काम निपटा कर सामान की लिस्ट बनानी शुरू कर दी।तभी मुझे उस विडियो का खयाल आया जिसे मैने कुछ दिनो पहले ही एक सोशल नेटवर्किंग साईट पर देखने के बाद अपने मित्रों के साथ साझा किया था।जिसमे बताया गया था कि किस तरह हम लोग जाने अनजाने प्रकृति को नुकसान पहुचाँ रहे हैं और कैसे प्रदूषण को रोकने मे एवं पर्यावरण को बचाने मे अपना योगदान दे सकते हैं।

यह सब याद आते ही मैने अपनी मिलटन की पानी की बोतल धुल कर पैक कर ली ताकि बार बार वन टाईम प्लास्टिक ,”बिसलेरी की बोतल न लेनी पडे़।कुछ कुछ बाते मुझे पहले से याद थी जैसे महावारी के समय पहाडी़ प्रदेशो की सैर करने से बचना चाहिये क्यो कि बर्फ़ कि प्रेज़र्विन्ग गुण की वजह से ऐसा कूडे़ का जल्दी विघटन नही हो पाता है और प्रदूषण का कारण बनता हैं।यह सोचकर ही मैने शिशिर से इस समय पर टिकट बुक करवाने के लिए कहा था यध्य्पि इस समय पर टिकट मिलना कठिन था पर शायद मेरी एक अच्छी पहल की वजह से हि टिकट मिल गए थे।मैने चिप्स और बिसकिट के पैकेट के रैपर को रखने के लिए एक पेपर बैग रख लिया ताकि कूडे़ को नियत जगह फेंका जा सके।फिर मैने अपने और शिशिर के कपडे़ पैक करना शूरू किए।

बाकी जरूरी दवाईयो कि लिस्ट भी मैने तैयार कर ली। इस तरह चेक लिस्ट की सहायता से मैने पैकिंग शुरू की ताकि कुछ छूटने न पाए।शाम को जब शिशिर घर आए तो पैकिंग और लिस्ट देखकर बोले कि तुमने तो मेरे लिए कोई काम ही नही छोडा़ हैं।वाह क्या किसमत हैं मेरी ऐसी बेगम नसीबो से मिलती हैं।

मैंने कहा बस बस बहुत हो गऐ तारीफो के पुल,अच्छा आप बुरा न माने तो एक बात कहु क्यु न हम लोग बूकिन्ग वाले से बात करके थोडी़ दूरी बाईक से तय करके होटल से किसी सहयात्री के साथ कार पूल कर ले इससे पैसे भी बचेगे और प्रदूषण भी कम होगा।इनहे घूरते हुऐ देखकर मैंने बुझते हुए कहा कि रहने दे अगर आपका मन नही है तो। इनहोने खिलखिलाकर हस्ते हुए कहा इतना दिमाग कहा से लाती हो मेरी “ग्रेटा थन्बर्ग ” नेकी और पूछ पूछ कर।इसी बात पर गरमा गरम अदरख वाली चाय और प्याज के पकौडे़ मिल जाए तो शाम बन जाए।मैं हस्ते हुए यह कह्ते हुए “जो हुक्म मेरे आका ” रसोई की ओर चल दी।

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