एक उपहार ऐसा भी

एक उपहार ऐसा भी

आप कभी माँ नहीं बन सकती हो,. मोना इसके आगे सुन नहीं पाई,...चेम्बर से बाहर निकल आई..... मोना के दिल दिमाग में डॉ. के कहे ये शब्द बार बार गूंज रहे थे..।


शादी के सात साल हो चुके..हर जगह यहीं सुनने को मिलता,... खुशखबरी कब सुना रही हो।.. डॉ को दिखा लो कोई प्रॉब्लम तो नहीं...। ससुराल में सब उसे ही दोष देते..।..., लोग उसे ही प्रताड़ित करने लगे..।... हर तरफ से निराश मोना, उम्मीद खोने लगी..।..उसका किसी काम में मन नहीं लगता... हमेशा सजी संवरी मोना अपने प्रति लापरवाह हो चुकी..।मोना को लगता वो माँ नहीं बन सकती...,इसलिए अरुण का व्यवहार भी बदल गया..., अरुण कुछ कहता तो मोना खूब आँसू बहाती...। लड़ने का बहाना खोजती...।अरुण देखता और दुखी होता रहता...।


  कब शाम ढल गई,...घने अँधेरे में बैठी मोना को समय का अहसास ही नहीं हुआ..। खट से लाइट जल उठी...अरुण ऑफिस से लौट आया,.. अँधेरे में क्यों बैठी हो... और कब तक दुखी होंगी..। जब भी मै बात करना चाहता,तुम लड़ने का बहाना खोज लेती हो...। सब कुछ भूलती जा रही हो .. मोना का आंसुओं से भरा चेहरा देख, अरुण चुप हो गया... पास जा बोला .. मोना जिस दर्द से तुम गुजर रही हो,मै भी उसी दर्द से गुजर रहा हूँ...हम जीवन साथी हैं... हर परस्थिति में हमें एक दूसरे का साथ देना हैं..। एक परेशानी आई हैं, पर इससे जीवन तो नहीं ख़त्म होता... समस्या का समाधान ढूढ़ना ही जिंदगी हैं,... ना कि हार मान कर बैठ जाना..।मोना के आँसू पोंछ.., उसके माथे को चुम लिया...तभी....


घंटी बजी उठी ... अरुण ने मोना को बोला जाकर देखो कौन हैं, तब तक मै हाथ मुँह धोता हूँ... दरवाजा खोलने पर, एक अजनबी नर्स अस्पताल के ड्रेस खड़ी थी, उसने मोना क़ी गोद में एक नवजात बच्ची दे, कुछ पेपर दे चली गई..। शादी क़ी सालगिरह मुबारक हो... अरुण क़ी आवाज से वो चौक उठी.. ओह..आज उसकी शादी क़ी सालगिरह हैं... वो दुख़ में इतना डूबी थी कि भूल गई...।


मोना जन्म देते समय इस बच्ची की माँ बच नहीं पाई... इसे माँ चाहिए और हमें बच्चा... बस अब हमारा परिवार पूर्ण हो गया...। जन्म देने और पालने वाली दोनों ही माँ होते हैं.... कुंती से ज्यादा लोग माँ यशोदा को जानते हैं...यशोदा के मातृत्व से ही कृष्ण भी यशोदा नंदन कहलाये...।


अरुण ने अपनी बाहों का घेरा मोना के गले में ड़ालते बोला... मोना हतप्रभ.. थी... इतनी खुशियाँ समेटे नहीं सिमट रही थी... दिल में मातृत्व की भावना तो हिलोरे ले रही थी... बच्ची को कस कर छाती से चिपका लिया...। आज जीवन सफल हो गया... शादी की आठवीं सालगिरह यादगार बन गई... माँ जो बन गई आज..।




 --=संगीता त्रिपाठी 



         

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