एग्ज़ाम टाइम और बच्चे

एग्ज़ाम टाइम और बच्चे

दोस्तों!अब समय आ चुका है बच्चों के फाइनल एग्ज़ाम का तो क्यों नआज बात की जाए इसी संदर्भ में। एग्ज़ाम टाईम यानि” खुद को कसौटी पर खरा उतारने का समय।”माँ-बापऔर बच्चों दोनों के लिए ही चुनौती का समय। बच्चों को कैसे एग्ज़ामिनेशन फ़ोबिया ज़ोन से बाहर रखा जाए कि वह सहज महसूस करे। जैसे-जैसै परीक्षा का समय पास आता है छात्र-छात्राओं की तैयारी पूरा ज़ोर पकड़ने लगती हैऔर पेरेंट्स भी उनके एग्जाम शेड्यूल के अनुसारअपनी योजनाएं बनाते हैं।

यूं तो सालभर की जाने वाली तैयारी ही अहम होती है।परीक्षा के दिनों मे एक शांत और स्वस्थ माहौल होना चाहिए।बच्चों द्वारा सालभर की गई मेहनत,नियमित पढ़ाई का असर एग्ज़ाम में साफ़ नज़र आता है।इसके लिए सत्रारंभ से ही तैयारी शुरु कर देनी चाहिए।जैसे-टाईम-टेबल बनाकर उसमें हर विषय को यथोचित स्थान देकर पढ़ना।अपनी शंकाओंऔर परेशानियों को नोट करते रहना।

जटिल प्रश्नों को बार -बार हल करते चले जाना जब तक वह आसानी से हल न हो जाएं। छात्रों को चाहिए कि वह महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ज़्यादा से ज़्यादा फोकस करें। अपने स्टडी रूम में शैक्षणिक क्रियाओं से संबंधित चार्ट,पोस्टरऔर तस्वीरें लगाएं ।स्टडी रूम की दीवारों में कलर का चुनाव ऐसा हो जिससे पढ़ने वाले को मानसिक शांति का अहसास होता रहे।

आजकल क्लालरूम टीचिंग के साथ वरचुअल क्लासेज़ का प्रचलन बढ़ा है इनमें विशेषज्ञों द्वारा ऑनलाइन टीचिंग कराई जाती है।इस प्रकार की क्लासेज़ को ज़वाइन करके भी लाभ उठाया जा सकता है। विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए प्रश्नपत्र भी काफ़ी महत्वपूर्ण और सहायक होते हैं।सालभर पढ़ाई करने वाले छात्र एग्ज़ाम्स में भी अच्छा प्रदर्शन करते हैं। रेग्यूलर तैयारी होने के कारण यह केवल पुनरावृत्ति करते हैंऔर बड़ी ही सहजता के साथ परीक्षा देते ।

बावजूद उन छात्रों के जो परीक्षा के दौरान स्ट्रैस लेते हैं रात-रात जागकर पढ़ाई करते हैं इस तरह परीक्षा-कक्ष में पहुँचने से पहले ही मानसिक रूप से बोझिल हो जाते हैं।ऐसे छात्र न तो पूर्णरूप से प्रश्न पत्र हल करते हैं अक्सर अधूरा पेपर हल होने या फिर अंकनानुसार सही प्रकार से इनके उत्तर नहीं कर पाने की समस्या आ जाती हैऔर एग्ज़ाम का भय पैदा हो जाता है।

बच्चे शांतऔर स्वस्थ वातावरण में रहें।इसके लिए जरूरी हैउनके द्वारा सालभर तैयारी की जाए।यह तभी होगा जब हम उन्हें सहयोग करेंगे और प्रोत्साहित भी।उन्हें एग्ज़ामिनेशन फ़ोबिया ज़ोन से बाहर लाना होगा तभी वह अपना अच्छा प्रदर्शन कर सकेंगे।

डॉ यास्मीन अली।

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