फर्स्ट पीरियड, हैप्पी पीरियड

फर्स्ट पीरियड, हैप्पी पीरियड

हर इंसान के जीवन में पहली बार घटित होने वाली घटना उम्र भर के लिए उसके मस्तिष्क में समा जाती है, इन घटनाओं का सुखद अनुभव या फिर कड़वी यादें हमारे जहन में सदा के लिए रह जाती हैं, अतीत में घटित इन घटनाओं के बारे में अगर हम आज सोचे तो हमें लगता है कि हम इसे और यादगार व सुखत बना सकते थे।

ऐसी ही  एक स्त्री को उसका पहला पीरियड का अनुभव जीवन भर याद रहता है। पहला पीरियड एक बच्ची के मानसिक व शारीरिक बदलावों को किस तरह से प्रभावित करेगा इसकी जिम्मेदारी बहुत हद तक उसकी मां ,दादी , बुआ आदि की बौद्धिक क्षमता पर निर्भर करता है वह किस तरह से अपनी बेटी को उसके पहले पीरियड के लिए तैयार करती है। आमतौर पर देखा जाए तो हम भारतीय अपनी बेटियों को पीरियड की पूरी जानकारी नहीं देते, पहले के समय में इस विषय पर घर में बात करना उचित नहीं समझा जाता था और मां अपनी बेटी से इस विषय में बात करने पर हिचकीचाती  रही, परिणाम स्वरूप कम जानकारी होने के कारण बेटियों को अचानक आए पीरियड के कारण कई तकलीफों व परेशानियों का सामना करना पड़ता था।

अब समय बदल रहा है मां अपनी पीरियड की ओर बढ़ती बेटियों से खुलकर इस विषय में बात कर रही हैं ताकि वह अपनी बच्चियों को उनके पहले पीरियड के लिए मानसिक रूप से तैयार रखें। पीरियड से संबंधित कोई भी प्रश्न बेटियों द्वारा उठाया जाता है तो उत्तर देने में हिचकिचाहट नहीं करनी चाहिए, हो सके तो इससे संबंधित जानकार से अपनी बेटी की एक बार अवश्य मुलाकात कराएं जो उन्हें यह बता सके कि यह एक बायोलॉजिकल चेंज है जो हर स्त्री के जीवन में आता है। साथ ही कक्षा 6 से स्कूलों में बच्चियों को पीरियड्स के बारे में जानकारी दी जाए तो, पीरियड से संबंधित की भ्रांतियों  से मुक्ति मिल सकती है।

अधिकांशतः बच्चियों का पहला पीरियड घर से बाहर या स्कूल में हो जाता है, उस समय वो  किस प्रकार स्थिति को संभालेगी, इसके लिए उनकी मांओं को उनके लिए एक पीरियड किट तैयार रखना चाहिए जो उनके साथ हर समय रहे ,इस किट में सेनेटरी पैड, टिशू पेपर, पेंटी, साबुन होने चाहिए, ताकि घर से दूर होने के बाद भी वह घबराए ना ।

पीरियड की ओर बढ़ रही बच्चियों के शरीर में परिवर्तन साफ दिखने लगते हैं मां उसे पहचान ले और उसे इस परिवर्तन के बारे में संपूर्ण जानकारी देकर आने वाले पीरियड्स के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार रखें ताकि पीरियड में होने वाली परेशानियों को वह आसानी से सहन कर सके। सेनेटरी पैड का उपयोग करना, 2 से 3 घंटे में सेनेटरी पैड को बदलना, अपनी साफ सफाई का ध्यान रखना आदि के बारे में बच्चियों को पूर्ण जानकारी देनी चाहिए। इस तरह एक समझदार मां अपनी बेटी को पीरियड्स की जानकारी दें, उसके पहले पीरियड को सुखद और इस दौरान होने वाली तकलीफों को कम करने में सहायक बन सकती हैं और अपनी बेटी का पहला पीरियड हैप्पी पीरियड बना सकती है।

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