मेरी सच्ची सहेली

मेरी सच्ची सहेली

स्कूल से लेकर काँलेज तक यूं तो बहुत से दोस्त थे मेरे । अच्छे दोस्तो की लिस्ट तो हमेशा से बहुत लम्बी रही लेकिन सच्चे दोस्त कम ही थे। जिसमें मेरी सबसे प्यारी दोस्त है श्ववेता दिवेदी। जो हमेशा से  हर सुख और दुःख मे मेरे साथ रही।

हम दोनों की दोस्ती काँलेज के समय हुई थी । काँलेज की तरफ से हमें छः महीने की ट्रेनिंग पर एक साथ दिल्ली भेजा गया था। वहाँ हम पी.जी मे भी एक साथ रहे थे। इन छः महीनों मे हमारी दोस्ती और गहरी हो गई थी। साथ मे खाना, रात मे देर तक चिट चैट करना, शौपिंग करना, पढाई करना, लडाई करना….सब कुछ साथ मे ही करते थे। इतनी मस्ती करते थे कि घर जाने का भी मन नही करता था। हम दोनों इतने अच्छे दोस्त बन चुके थे कि हमें वहां सब जुडवां बहने बोलते थे। सच मे हम.लगते भी कुछ कुछ एक जैसे थे। श्ववेता हमेशा मेरी बडी बहन की तरह मुझे समझाती रहती थी।

वो समय वो भी था जब मुझे किसी से प्यार हुआ । जी हाँ काँलेज के टाइम की उम्र होती ही कुछ ऐसी है जहाँ प्यार इश्क मोहब्बत आम बात होती है। और गलत सही मे अन्तर करना बहुत ही मुश्किल…….।इस  बार भी मैंने ये बात सबसे पहले अपनी सबसे प्यारी सहेली से शेयर की। जब उसे कुछ भी ठीक नहीं लगता था तो मुझे समझाती थी । उसने ज्यादा कुछ तो नहीं कहा था लेकिन एक बात.जो उसने बोली थी वो मुझे अभी तक याद है….. कि तेरी फैमिली बहुत प्यारी है आगे कोई भी सिचुएशन आए अपनी फैमिली को कभी मत छोड़ना!  और.आगे मैंने ऐसा ही किया था। वो मेरा सही निर्णय था। क्योंकि आज मैं अपने जीवन मे बेहद खुश हूँ।

जीवन का एक अहम फैसला लेने मे मेरी सच्ची सहेली श्ववेता ने मेरी सही समय पर सही सलाह देकर सही निर्णय.लेने मे मदद की थी। जिन्दगी मे कम से कम एक दोस्त ऐसा होना चाहिए जो आपकी खुशी मे खुश हो और दुःख मे दुःखी… ऐसी ही है मेरी प्यारी सहेली श्ववेता….. ,

आज भी हम दोनों एक ही शहर मे हैं क्योंकि हमारी शादी भी एक.ही शहर.मे. हुई। आज भी वही चिट चैट, शौपिंग, ढेर सारी मस्ती का्यम है।

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