गुलाबी चर्चा फीचर -कुछ सलाह और मशवरे जो कॉमरेड्स को न भायें

गुलाबी चर्चा फीचर -कुछ सलाह और मशवरे जो कॉमरेड्स को न भायें

ना जाने ऐसी कितनी ही सलाह और मशवरे लड़कियों /महिलाओं को हर रोज़ दिए जाते है ,जिनमे ना ही कोई लॉजिक होता है और ना ही कोई उद्देश्य।और हम कभी कभी वो मुस्कराते हुए बस सुन लेते हैं या कभी अपना ही मन उदास कर लेते हैं और वो कड़वा घूंट पीकर रह जाते हैं। 


#गुलाबीचर्चा में आप सभी ने अपने अपने दिल की बात कही।कुछ खास सलाह/मशवरे जो हमे अक्सर सुनने को मिल जाते है और हमारा ध्यान चला ही जाता है आपके शब्दों में आपके लिए लाए हैं।


शोभा पांडे कहतीं हैं -


वैसे तो मशवरे बहुत ही लाभकारी होते हैं । पर कभी कभी कुछ सलाह आपको परेशान कर देती हैं । अगर आपकी सहनशीलता कम हैं तो आप तुरंत ही जवाब देकर हल्के हो जाते हैं अन्यथा अन्दर ही अन्दर कुढ़ते रहते हैं। जब बाते तुलनात्मक होती हैं तब मुझे पसन्द नही आती .... वो ऐसे करती हैं मैं ऐसे ... हां तुमने ठीक किया पर मै होती तो ऐसे करती .... ये तरीका बच्चों फर होता है तो ज्यादा बुरा लगता है। और अगर उस बच्चे ने सुन लिया जिसकी तुलना हो रही है तो सोचे कितना अशोभनीय है ।हर व्यक्ति अपने मे विशेष है किसी की अन्य से तुलना सम्भव नही है। 


रूचि मित्तल कहतीं हैं

बहुत सी ऐसी सलाह, मुशवरा जो मुझे पसंद नहीं... पिंक सखियाँ लिख ही चुकी हैं... हम महिलाओ को सामान्यत: इन्हीं सब नापसंद बातों से रूबरू होना पड़ता है...परंतु लाइफ में इन दिनों जो सबसे बडा स्यापा हैं वो ये...कि पहले तो लोग बोलते हैं... अरे वाह! बहुत अच्छा लिखती हो, परंतु दूसरे ही पल एक सवाल उछाल दिया जाता है...वैसे इससे कमाई क्या होती हैं...जी कुछ नहीं... अरे तो ऐसे ही लिखती हो...जी मुझे अच्छा लगता हैं...मतलब ऐसे ही लिखती हो... इतना टाइम बिना मतलब ही वेस्ट करती हो...अब उस पल ये आलम होता हैं...कि पारा सातवें आसमान पर और मज़बूरी ये... कि मुँह में मिश्री रख बोलना पड़े... देखिये ये मेरी खुशी है और जिस काम में मुझे सुकून मिले...वो तो अनमोल हैं... अब लोग फॉर्मेलिटी में बोल देते हैं कि हाँ सही कह रही हो... लेकिन चेहरा हकीकत बयां कर ही देता हैं...सामने वाले का अज़ीब सा और मेरा थोड़ा गुस्से वाला सा....अब उन्हें कौन समझाये कि... तुम कभी ना समझ पाओगे.. कि हम क्या कमाते हैं...


बबीता मिश्रा कहतीं हैं

कुछ लोग हर बात में बोलते हैं जैसे की अगर कोई जल्दी काम कर ले तो इसे तो कुछ काम ही नहीं है बस बैठे रहती है।और अगर देर से करे तो पता नहीं दिन भर क्या करते रहती है एक भी काम समय से नहीं करती मतलब ये की उन्हें हर बात में बोलना ही है।हद होती है बोलने की भी अब सबका समय अलग अलग है तो काम भी उसी के हिसाब से करेगा न किसी के बच्चा छोटा है तो उसे काम करने में लेट तो होगा ही।और अगर स्कूल जाता है तो उसे तो जल्दी करना पड़ेगा या तो बच्चे को स्कूल भेजने के बाद काम करें।जो भी हो वो अपनी मर्जी और सुविधा के अनुसार ही काम करेंगी ना की किसी के कहे अनुसार।


श्वेता श्रीवास्तव कहतीं हैं

मेरी लिस्ट लम्बी है मगर एक सलाह जो मुझे दी जाती है वो ये है की छोटे कपड़े क्यों पहनती हो। ढ़ंग के कपडे पहनो, अच्छी हाईट है इतनी लंबी हो हिल्स क्यो पहनती हो, मत पहना करो.... शादीशुदा हो बिछुऐ क्यो नही पहनती बिंदी क्यो नही लगाती । साड़ी सूट पहना करो , ये सारी सीख केवल औरतो के लिए है क्या आदमियों की शादी नहीं होती । मेरे कपडों और स्टाइल को लेकर कोई कुछ बोलता है तो बहुत बुरा लगता है, ऐसे लोगों को मै इग्नोर कर देती हूँ ।


पुष्पा कर्ण कहतीं हैं

वैसे तो लंबी-चौड़ी लिस्ट है। हर बात में रोका टोकी है ससुराल में। हर काम इनकी मर्जी का करो तो सही अपनी मर्जी का करो तो गलत। हर समय सबकुछ सहना और बस चुप रहने की नसीहत दी जाती है। खुश रहने का , अपनी मर्जी से अपनी जिंदगी जीने का मेरा भी हक है। मैं अपने स्वाभिमान को नहीं मार सकती।


प्रियंका दक्ष कहतीं हैं

वैसे तो बातें बहुत हैं लेकिन अक्सर मैं गलत बातों को नहीं सहती और बोल देती हूँ, तो सलाह मिलती हैं 'ज्यादा बोला मत करो अच्छा नहीं होता'। अरे अरे उस गली से मत जाना.. लड़के खड़े होंगे किसी ने कुछ कह दिया तो क्या इज्जत रह जाएगी । अरे कोई कुछ कहेगा तो हम चुप तो नहीं रहेंगे.....अगर पहली बेटी हुई हैं तो भी खुश होने की जगह ये सलाह मिलेगी कि चलो कोई नहीं अब दूसरा बेटा कर लेना जैसे कि सब हमारे हाथ में हैं । सलाह देने के लिए सबसे पहला नाम हम औरतों का ही आता हैं, पुरुषों को देने को कहे तो वे तो जन्मजात समझदार बता दिये जाते हैं ।


डाॅ मधु कश्यप कहतीं हैं

अक्सर कई बाते है जो बेवजह हम सुनते है और जिनका कोई मतलब नही रहता।अरे !आपको काम ही क्या है?दोनो बच्चे बडे हो रहे।उन्हे अकेला छोडा करिए।आप कितनी पढी लिखी है जाॅब क्यो नही करती ?मेरी मर्जी जो करना है करूँगी। इससे किसी को क्या मतलब। बडे हमेशा सही होते है।यह बात भी मुझे बहुत चुभती है।क्योकि बडे भी कभी कभी गलत हो सकते है जिस बात का एहसास उन्हे दिलाना जरूरी है।


रिंकी पांडे कहतीं हैं

वैसे तो बहुत सी फिजूल की बातें तो लोग करते ही हैं पर मुझे ज्यादातर उन लोगों की सलाह बहुत बुरी लगती है जो दूसरों को तो लोग आसानी से दे देते हैं पर उसे वो खुद ग्रहण नहीं करते | और सबसे ज्यादा मुझे वो बात अच्छी नहीं लगती जहां परिवार में कोई भी बात हो तो आसानी से बहु को दोषी ठहरा दिया जाता है और बेटी के लिये ऐसा नहीं सोचा जाता | बदलते समय के साथ भी आज भी बहु व बेटी में अंतर बना हुआ है |


प्रियंका गहलौत कहतीं हैं

दो प्यारी बेटियों की माँ हूँ और बहुत खुश हूँ अपनी प्यारी परियों के संग मगर लोगो को कुछ तो चाहिए ना बोलने को... अभी परसो की ही बात है.. एक महिला मिली पड़ोस की कहती है दो बेटियां है तो अगला चांस तो लोगी ना बेटे के लिए माथा खराब हो जाता है मेरा ये बात सुनते ही जैसे मेरे माँ बनने में कुछ अधूरा रह गया... जैसे मैंने बेटियों को बिना 9महीने के गर्भ और बिना प्रसव पीड़ा के प्राप्त कर लिया या माँ बनने के वो दर्द वो तकलीफ वो ख़ुशी कम रह गयी एक औरत गर माँ ना बन सके तो उसके पूर्ण औरत होने पर प्रश्न और यदि बेटा ना हुआ तो पूरी माँ होने पर प्रश्नचिन्ह,,,,,हद है ना.. बस दिखावा करते है ऐसे लोग बेटी बेटा एक बराबर का मैंने फिर भी कड़वा घूंट पीते हुए शालीनता से कहा,, जी नहीं,, मैं मेरे पति हम दोनों को बस दो बच्चे चाहिए थे वो हमें मिल गये अब बस!


अपर्णा पाठक कहतीं हैं

जब घरेलू सारी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाने के साथ, शिक्षा क्षेत्र में भी आप अच्छा कर रहे हों,और गर कभी थोड़ा बीमार हो जाओ,तो मदद करना तो दूर,सिर्फ सलाह देना की तुम भविष्य में कुछ अच्छा करने का सोंच त्याग दो....तो इस तरह के सोच और मशविरे से मुझे सख्त नफरत है।


अनु गुप्ता कहतीं हैं

मेरे पहनने ओढ़ने को लेकर सलाह देना मुझे बिल्कुल पसंद नहीं है मैं क्या पहनू या क्या ना पहनू यह मेरी अपनी मर्जी है लोग अक्सर सलाह देते हैं चूड़ी ,बिंदी को लेकर कपड़ों को लेकर जो मुझे नहीं पसंद आती वैसे तो ऐसी बहुत सी बातें है पता नहीं क्यों हमें दूसरों की जिंदगी में दखल देना होता है मेरी जिंदगी मेरी पसंद उसमें किसी को भी दखल देने का कोई हक नहीं है।


अनिता सुराणा कहतीं हैं

हाँ मैं सिरे से नकार देती हूँ-जब मुझे कोई यह सलाह देताहै कि मासिक धर्म चक्र की अवधि में मुझे किसी भी चीज को छूना नहीं चाहिए क्योंकि फिर वह चीज अपवित्र हो जाएगी।बल्कि मुझे सिर्फ़ एक ही बिस्तर पर वो पाँच दिन बिताने चाहिए ।मेरे लिए ये संभव नहीं जबकि मेरे बच्चे और पति हर चीज के लिए मुझपर ही निर्भर रहते हैं ,क्या सलाह देने वाले इस अवधि में मेरे परिवार की जरूरतों को पूरा करते हैं ।जब मैं अपने घर-परिवार की सार-सँभाल का पूरा ध्यान रखती हूँ ,फिर मेरे अपने ही घर के किसी चीज को छूना अपवित्रता कैसी ।मासिक धर्म चक्र ईश्वर प्रदत एक स्वाभाविक प्रकिया है जिसे मैं स्वाभाविकता से लेते हुए ,अपने सारे काम रोजमर्रा की भाँति ही निपटाती हूँ ,ऐसे लोगों की बातों पर ध्यान 

ना देते हुए ।


वाणी राजपूत कहतीं हैं

सबसे पहले तो मुझे ये समझ नहीं आता....


1. महिलाओं को ही सारे पूजापाठ, व्रत, करने को या भूखा रहने को क्यों का जाता है। सबको खाना खिलाकर खाओ....क्यों वो साथ बैठकर नहीं खा सकती....

2. सर ढकने तुपने को केवल महिलाओं को ही बोझ क्यों दिया जाता है....वो कुछ भी अपनी मर्जी से क्यों नहीं पहन सकती....

3. बच्चे होने के बाद क्या ज़रूरी है कि वही खाली देखभाल करे....वो अकेले कहीं नहीं जा सकती...


कविता सिंह कहतीं हैं

जो सलाह मानने योग्य होती है या जहां मुझे किसी बात पर बड़ों की सलाह लेनी हो तो मैं जरूर लेती हूं। पर कभी कभी ऐसे सलाह जो अपने ही परिवार वाले देते हैं जिससे मन और दिल दोनों दुखी हो जाता है ,जैसे तुम्हारी सिर्फ दो बेटियां हैं ,एक बेटा कर लो , तुम्हारा वंश और परिवार का नाम बढ़ेगा। बेटा जब आग देता है तभी माता-पिता को मरणोपरांत मुक्ति मिलती है। कभी परिवार तो कभी सगे संबंधियों द्वारा दिया हुआ सलाह मुझे बहुत व्यथित करता है।


मंजीता राजपूत कहतीं हैं


विवाहित महिलाओ को अक्सर बहुत सी सलाहें दी जाती है, जबकि विवाहित पुरुषो को कुछ भी नही। जैसे कि पति के बाद ही खाना खाओ, हमेशा ससुराल में मुँह बंद रखो आदि।और सबसे मजेदार है कि कुछ सालो से अचानक हर कोई मेरा शुभचिंतक बन चुका है। और मेरे इन शुभचिंतको को बस एक ही चिंता रहती है कि मैं दो बेटियो की माँ हूँ।दुनिया भर के टोटके और दवाइयां मुझे मिनटो में बता दी जाती है जिससे मैं एक बेटे को जन्म दे सकूँ।


अगली गुलाबी चर्चा फीचर के साथ हम जल्दी ही एक बार फिर हाज़िर होंगें। तब तक आप अपना ख्याल रखिये , मंच पर अपने विचार साझा करतीं रहें और यूँही हमारे साथ जुडी रहें :)


आभार ,

टीम , पिंक कॉमरेड


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