गलती करना मनुष्य का स्वभाव है

गलती करना मनुष्य का स्वभाव है

गलती करना मनुष्य का स्वभाव है 


विमला की नई-नई शादी हुई थी उसको घर की रीति रिवाज के बारे में कुछ भी नहीं पता था।

विमला मायके में खुले पंछी की तरह रहती थी।
जब जो चाहिए वह मिल जाता था ससुराल बिल्कुल
अलग थी पहले दिन से ही सास कमला ने बहु विमला से कह दिया था ।

हमारे यहां कोई काम करने के लिए बाई नहीं रखी जाती है और सारा काम हमें अपने हाथों से ही करना पड़ता है।

इस सब की तुम्हें आदत डालनी पड़ेगी विमला ने अपनी सास से कहा जी माँ जी मैं कर लूंगी!

शुरू शुरू में विमला बहुत धीरे-धीरे काम करती थी और सीखने की कोशिश करती थी।

लेकिन हर दिन उससे कुछ ना कुछ गलती हो ही जाती थी और हमेशा विमला सुधारने की कोशिश करती रहती थी।

सास कमला से भी डर लगता था कि कहीं माँ जी ने देख लिया तो वह डाटेंगी ।

डरी सहमी सी विमला अपना काम धीरे-धीरे करती रहती
थी।

धीरे-धीरे सारा काम कमला ने विमला के ऊपर छोड़ दिया।

और कहती कि अभी मैं तुम्हारे साथ काम करती रहूंगी तो तुम सीखोगी कैसे!!

विमला पढ़ी-लिखी और समझदार थी कभी बहस नहीं करती थी।

सुबह से जो किचन में काम करना शुरू करती थी।

रात कब हो जाती थी।

पता ही नहीं चलता था उसे तो खाने-पीने का भी ध्यान नहीं रहता था।

मायके वाले जब भी आते थेकहते थे कि विमला शादी के बाद तू तो बदल गई है।

बहुत पतली हो गई है विमला कहती थी नहीं मैं अपना फिगर मेंटेन कर रही हूं ।

एक दिन ससुराल पक्ष से बहुत सारे लोग खाना खाने आ रहे थे ।

कमला ने कहा विमला तुम खाने की तैयारी कर लो मैं तुम्हारे साथ हाथ बटा दूंगी।

विमला अपना काम कर ही रही थी कि अचानक फोन बज गया।

और गैस पर दूध उबलने के लिए रख कर चली गई दूसरे साइड सब्जी रखी हुई थी।

बात सहेली से कर रही थी और अचानक भूल गई गैस चालू है दूध भी पूरा ऊफन गया और सब्जी भी जल गई

घर में बदबू भर गई कमला किचिन में आई और बहुत बड़ बड़ करने लगी।

आज ही मेहमान आने वाले हैं महरानी फोन पर लगी हुई है तूने पूरा सत्यानाश कर दिया है ।

सब्जी भी खराब कर दी है और दूध भी पूरा उफन गया।

अब कौन दूध लेने जाएगा बढ़ बढ़ कर के बाहर रमेश से भी विमला की शिकायत करने लगी ।

कितने दिन हो गए शादी के लेकिन अभी भी कुछ काम करते नहीं बनता है इतने सारे मेहमान आ रहे हैं ।

और सब्जी जला दी है और दूध भी उफन गया और शगुन होने की जगह अपशकुन हो रहा है ।

किचन में जब रमेश गया देखा तो विमला की आंखों में आंसू थे और लगातार रो रही थी।

जैसी उसे रमेश को देखा और आंसू पूछने लगी और कहने लगी मैंने कोई तू जानबूझकर नहीं किया मैं तो अपना सारा काम समय पर करती हूं ।

आज मेरे से पहली बार गलती हुई है और मैं इस गलती की क्षमा भी मम्मी से मांग रही हूं लेकिन मम्मी मुझे क्षमा नहीं कर रही है।

और अब मैं क्या करने लगूँ मैं फिर से बनाने तैयार हूं।

अब प्लीज आप बाजार से जाकर दूध लेकर आ सकते हैं तो ले आइए मैं खीर भी बना लेती हूं ।

अभी विमला की आंखों थे रमेश को देखा नहीं गया।

और उसने विमला से कहा कि तुम बिल्कुल टेंशन नहीं लो।

मैं 10 मिनट में लेकर आता हूं!

तुम इतना टेंशन मत लो मम्मी की थोड़ी सी आदत है तुम जानती हो लेकिन अभी ठीक हो जाएंगी।और सुनो गलती इंसान के जीवन का एक हिस्सा होती है।

हम गलती करके ही सीखते हैं इसलिए तुम बिल्कुल भी टेंशन मत लो जो हुआ सो हुआ अब आगे ऐसी गलती कभी नहीं करना ।

और रमेश ने विमला को हंसा दिया ।

दोस्तों बस यही कहना चाहूंगी छोटी-छोटी गलतियों को माफ कर देना चाहिए इंसान से गलतियां होती रहती है गलतियां करने से ही इंसान सीखता है।

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