गीतांजलि श्री ने परदेस में दिलाया हिंदी को सम्मान

गीतांजलि श्री ने परदेस में दिलाया हिंदी को सम्मान

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से ताल्लुक रखने वाली गीतांजलि श्री जो तीन उपन्यास और कई कथा संग्रह की लेखिका हैं,और जिनकी  कृतियों का अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, सर्बियन और कोरियन भाषाओं में अनुवाद हुआ है. उन्होंने विदेशी धरती पर हिंदी भाषा को एक विशेष सम्मान दिलाया है ।

बुकर पुरस्कार जो  साहित्य जगत का एक प्रतिष्ठित सम्मान है ।इस बार इस सूची में भारत की गीतांजलि श्री के अनूदित उपन्यास ‘‘टूंब ऑफ सैंड’’ को शामिल किया गया है।
खास बात यह है कि पहली बार किसी हिंदी रचना को इस सूची में स्थान मिला है।

गीतांजलि श्री (Geetanjali Shree) के हिंदी उपन्यास ‘रेत समाधि’ का डेज़ी रॉकवेल (Daisy Rockwell) ने  ‘टॉम्ब ऑफ सैंड’ (Tomb of Sand) नाम से अंग्रेजी में  अनुवाद किया है ।

पुरस्कार के लिए नामित लेखकों की प्रारंभिक सूची में शामिल किए जाने पर श्री ने कहा, "लेखन तो अपने आप में ही एक पुरस्कार है।
लेकिन बुकर से विशेष के रूप में पहचान मिलना एक अद्भुत बोनस है।

यह हिंदी भाषा में पहला ‘फिक्शन’ है, जो इस प्रतिष्ठित साहित्यिक पुरस्कार की दौड़ में शामिल है।

बुकर पुरस्कार की वेबसाइट पर की गई घोषणा में कहा गया है, ‘13 उपन्यासों की सूची घोषित की गई है. वे 11 भाषाओं से अंग्रेजी में अनूदित फिक्शन हैं और चार महाद्वीपों के 12 देशों से हैं. इसमें हिंदी से अनूदित पुस्तक पहली बार शामिल की गई है।

जूरी सदस्यों ने इस उपन्यास के बारे में कहा, ‘यह पुस्तक हमें 80 वर्षीय महिला के जीवन के हर पहलू और आश्चर्यचकित कर देने वाले अतीत में ले जाती है. यह बूढ़ी महिला अपने अवसाद से उबर जाती है और अपने अतीत को देखने के लिए पाकिस्तान की यात्रा करने का फैसला करती है, जिसे वह देश के विभाजन के दौरान पीछे छोड़ आई थी।
उन्होंने कहा कि उपन्यास का डेजी रॉकवेल द्वारा किया गया अनुवाद शब्दों के खेल से भरा हुआ है. यह एक शानदार और अकाट्य उपन्यास है।

दिल्ली की 64 वर्षीय लेखिका श्री की अनुवादक डेजी रॉकवेल एक पेंटर एवं लेखिका हैं जो अमेरिका में रहती हैं. उन्होंने हिंदी और उर्दू की कई साहित्यिक कृतियों का अनुवाद किया है।

यह पुस्कार अंग्रेजी में अनुदित और ब्रिटेन या आयरलैंड में प्रकाशित किसी एक पुस्तक को हर साल दिया जाता है. 

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