गोद लिया बेटा

भूषण को जब कुमार ने उसके मामा बनने की खबर दी तो उसकी खुशी का ठिकाना ना रहा। थोड़ी देर में ही वह अपनी पत्नी सुनीता के साथ अपनी बहन से मिलने हॉस्पिटल में पहुंच गया। अपने नन्हे से भांजे को जब उन्होंने गोदी में उठाया तो दोनों की आंखों में खुशी के मारे आंसू निकल गए। बच्चे को प्यार करता हुआ, अपनी बहन नेहा से वह बोला "देख तो नेहा, इसकी शक्ल तो मुझे अपनी जैसी ही नजर आ रही है। यह तो बिल्कुल अपने मामा पर गया है। हम मामा भांजे की जोड़ी कितनी अच्छी लग रही है।"

गोद लिया बेटा

भूषण को जब कुमार ने उसके मामा बनने की खबर दी तो उसकी खुशी का ठिकाना ना रहा। थोड़ी देर में ही वह अपनी पत्नी सुनीता के साथ अपनी बहन से मिलने हॉस्पिटल में पहुंच गया। अपने नन्हे से भांजे को जब उन्होंने गोदी में उठाया तो दोनों की आंखों में खुशी के मारे आंसू निकल गए। बच्चे को प्यार करता हुआ, अपनी बहन नेहा से वह बोला "देख तो नेहा, इसकी शक्ल तो मुझे अपनी जैसी ही नजर आ रही है। यह तो बिल्कुल अपने मामा पर गया है। हम मामा भांजे की जोड़ी कितनी अच्छी लग रही है।"

"मामा भांजा नहीं भैया! बाप बेटा कहो।"

अपनी बहन के मुंह से यह बात सुन भूषण व उसकी पत्नी ने अचरज भरी नजरों से नेहा और उसके पति की ओर देखा। उन्हें ऐसे हैरानी से देखते हुए नेहा व उसके पति कुमार एक साथ बोले "भाई साहब मैंने और नेहा ने पहले ही सोच लिया था कि जो हमारी पहली संतान होगी, उसे हम आपको गोद देंगे!"

"अरे नहीं! भावनाओं में बह इतना बड़ा फैसला मत लो| भगवान ने तुम्हें इतनी बड़ी खुशखबरी दी है और तुम उसे हमारी झोली में डालना चाह रहे हो। मैं अपनी बहन की गोद सूनी कर, अपने घर में रोशनी करूं। इतना स्वार्थी नहीं हूं मैं ! मैं इसे नहीं ले सकता।" "भैया आप और स्वार्थी यह तो मैं सपने में भी नहीं सोच सकती। दस साल पहले मां पिताजी के असमय जाने के बाद आपने मुझे बेटी की तरह ‌पाला है। मेरी हर इच्छा आपने बोलने से पहले पूरी की।

आप तोो मेरे भाई हो लेकिन भाभीी ने हमेशा मुझे अपने ननंद नहीं बेटी माना।  आप अपनी बहन के दिल की हर बात बिन कहे समझ जाते हो तो इस छोटी बहन का यह फर्ज नहीं कि वह अपने भाई की खुशी के लिए यह छोटाा सा त्याग भी नहीं कर सकती। भाई 8 सालों से मैं आपको और भाभी को एक बच्चे की इच्छा में तिल तिल करता जलता देख रही हूं। आज भगवान ने मुझे यह  याा सुअवसर दिया है कि मैं भी आप दोनों के लिए कुछ कर सकूं।" "लेकिन कुमार के परिवार वाले! वह सब क्या कहेंगे!" "भैया मेरे परिवार में है ही कौन! मैं नेहा जितना किस्मत वाला नहीं| मां बाप तो पहले ही जा चुके।

भाई भाभी ने तो मुझे शुरू से ही बोझ समझा है। आपने मेरी आर्थिक स्थिति ना देख नेहा और मेरे प्रेम को स्वीकृति दी है। आप जैसे महान विचार वाले व्यक्ति के लिए तो यह कुछ भी नहीं। और वैसे भी हमारा बेटा और कही थोड़ी ना जा रहा है! उसे तो दो घर व दो-दो माता पिता का आशीर्वाद व स्नेह मिलेगा। यह तो उसकी खुशकिस्मती है। अब ज्यादा सोच विचार मत करो और इसे संभालो!" यह कहते हुए नेहा ने अपना बेटा अपनी भाभी की गोद में दे दिया। बच्चे को सीने से लगा, उसकी भाभी की आंखों से झर झर आंसू बहने लगे। वह उसे प्यार करती और नेहा को खूब आशीर्वाद देती। यह दृश्य देख सभी बहुत भावुक हो गए थे। नेहा के भैया भाभी का सूना आंगन नन्हे कुलभूषण की किलकारियों  से गूंज उठा। दोनों के जीने का मानो एक बहाना मिल गया हो।

कुलभूषण  4 साल का हो गया था और स्कूल जाने लगा था। इसी बीच नेहा की गोद भी भगवान ने एक और सुंदर बेटे से भर दी।

कुछ दिनों से सुनीता की तबीयत सही नहीं थी। जब कई दिन भी तबीयत में सुधार ना आया तो वह डॉक्टर के पास गई डॉक्टर ने चेकअप करने के बाद खुशखबरी सुनाई कि वह मां बनने वाली है। सुन उसे अपने कानों पर विश्वास ही ना हुआ। उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि शादी के इतने वर्षों बाद! !!जिसकी उम्मीद वह खो बैठी थी, भगवान इतने सालों बाद ऐसे पूरी करेगा! भूषण देख रहा था कि जब से सुनीता को मां बनने का पता लगा है तब से वह कुछ परेशान सी हो गई है।

जब उसने पूछा तब सुनीता अपने मन की व्यथा बताते हुए बोली कि "कहीं ऐसा  न हो कि अपना बच्चा आने के बाद हमारे मन में कूलभूषण के लिए प्यार कम ना हो जाए। अनजाने में  उसके साथ मेरी ममता अन्याय ना कर बैठे। ऐसा हुआ तो भगवान हमें कभी माफ नहीं करेगा और यह तो नेहा के त्याग का भी अपमान होगा| समझ नहीं आ रहा क्या करूं!!"

"तुम नाहक ही इतना परेशान मत हो। ऐसा कुछ नहीं होगा| कुलभूषण हमारा पहला बेटा है। क्या दूसरा बच्चा होने के बाद मां अपने पहले बच्चे को प्यार नहीं करती! क्या उसके प्रेम में कमी आ जाती है! तुम ऐसे विचार मन से निकाल दो और भगवान की नेमत का शुक्र मनाओ| "

"अगर हम इस बच्चे को पैदा ही ना करो तो!!!"

"पागल हो गई हो क्या! इस दिन के लिए तुमने कहां-कहां मन्नतें नहीं मांगी। एक जीव को दुनिया में आने से पहले ही तुम !!!" कहते हुए भूषण गुस्से से बाहर चला गया। अगले दिन सुनीता काम कर ही रही थी। तभी नेहा वहां आई और अपनी भाभी को गले लगाते हुए बोली "भाभी मुबारक हो। आप फिर से मां बनने वाली हो। भैया ने कल शाम को मुझे यह खुशखबरी दी लेकिन साथ ही भैया ने उस विचार के बारे में भी बताया। भाभी आप धन्य हो। जो अपने गोद लिए बेटे के लिए इतना सोच रही हो लेकिन भाभी आप ऐसा कुछ नहीं करोगी।। भाभी खुद से ज्यादा मुझे आप पर विश्वास है। जो अपनी ननद को बेटी जैसा मान सम्मान दे सकती है।
वह अपने गोद लिए बेटे के साथ कभी नाइंसाफी नहीं करेंगी। इसलिए सपने में भी कोई गलत विचार मन में मत लाना| दुनिया चाहे कुछ भी कहे। यशोदा ने जो प्यार कृष्ण को दिया वह तो कृष्ण की मां भी उसे नहीं दे सकती थी। यह आपके सुकर्म का ही तो फल है। जो भगवान ने इतने वर्षों बाद आपकी सूनी बगिया हरी कर दी और हमारा कुलभूषण कब तक अकेला खेलेगा। उसे भी तो किसी भाई बहन की जरूरत है ना! अब तो आप अपने खान-पान पर ध्यान दो और बेकार की बातों को दिल से निकाल दो और हां भाभी !
कुलभूषण के समय तो मैं आपसे कुछ ना ले पाई लेकिन इस बार तगड़ा नेग लूंगी आप दोनों से!" कहते  हुए वह अपनी भाभी के गले लग गई। "कितना बड़ा दिल है तेरा लाडो। तेरे पहले ही इतने उपकार है हम पर और आज फिर तू अपनी भैया भाभी के लिए संजीवनी बनकर आई है। सच हमने पिछले जन्म में कुछ पुण्य ही किए होंगे जो भगवान ने तेरे जैसी ननद मुझे दी।" 9 महीने बाद नेहा की भाभी ने एक प्यारी सी बेटी को जन्म दिया। उसे देखते ही नेहा बोली " भाभी यह तो बिल्कुल अपनी बुआ पर गई है!"

"हां नेहा मैंने हरपल भगवान से तेरे ही जैसे बेटी की कामना की थी। जो अपने घर के साथ-साथ दूसरों के आंगन को भी खुशियों से भर दे। अब मेरा परिवार पूरा हो गया। कुलभूषण को बहन और मुझे एक और प्यारी सी बेटी मिल गई।" अपनी छोटी सी बहन को प्यार करते हुए कुलभूषण बोला|

"आपने नहीं मम्मी, मैंने भगवान से प्रेयर की थी कि मुझे एक छोटी सी बहन देना, जो मुझे राखी बांधे। देखो भगवान ने मेरी प्रेयर सुन ली है अब हम दोनों खूब खेलेंगे।" नन्हे कुलभूषण की बातों से सबके चेहरों पर मुस्कान तैर गई।

दोस्तों, यह कहानी एक सच्ची घटना पर आधारित है। अब तो दोनों बच्चे ही बड़े हो चुके। कुलभूषण को अपनी असली मां का भी पता है। लेकिन इन बातों से दोनों ही परिवारों में स्नेह‌ और अधिक बढ़ा ही है। सभी बच्चे व बहुएं एक दूसरे को आदर सम्मान व प्यार देती हैं।

कैसी लगी आपको मेरी यह रचना पढ़कर इस विषय में अपने अमूल्य विचार जरूर दें।

आपकी सखी, सरोज ✍️

#My first Pregnancy

सरोज

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