इन पांच नारीशक्तियों ने सबसे पहले लैंगिंग भेदभाव को पीछे छोड़ा

इन पांच नारीशक्तियों ने सबसे पहले लैंगिंग भेदभाव को पीछे छोड़ा

भारत में लैंगिंग समानता प्रमुख मुद्दा रहा है लेकिन इसके बावजूद भी हमारे भारत में कुछ नारीशक्तियां ऐसी हैं जिन्होंने इसके भेद को तोड़ते हुए सफलता की इबारत लिख डाली है उन्होंने सभी बाधाओं को पार करते हुए एक मिसाल कायम की है | इन नारीशक्तियों ने हमेशा से प्रदेशों में आरक्षित बाधाओं को तोड़ते हुए लैंगिक भेदभाव को खत्म किया है | ये हैं पांच  नारीशक्तियाँ  ...               

कप्तान प्रेम माथुुुुुर :- प्रेम माथुर पहली महिला कप्तान हैं जो एक वाणिज्यिक पायलट बनी आज विश्वस्तर पर 130,000 विमान पायलटों में से लगभग 4000 महिला है | 21वीं सदी में डेढ़ दशक का समय दुनियां में अब भी महिला पायलट बनने के लिये तैयार नहीं है लेकिन भारत ने अपनी पहली महिला कप्तान को अपनी स्वतंत्रता के कुछ ही सालों के अंदर प्राप्त किया है | कप्तान प्रेम माथुर जिन्होंने मुश्किलों के दौर में भी अपने भविष्य के लिये नए रास्ते खोले और 2अक्टूबर 1953 को प्रेम माथुर ने इंडियन एयरलाइंस में बतौर को पायलट ज्वाइन किया इनके साथ ही भारत किसी महिला पायलट को नौकरी देने वाला पहला देश बन गया |                

आई.पी.एस. महिला किरण बेदी :- किरण बेदी सबसे लोकप्रिय भारतीय नारीशक्ति हैं जिन्होंने राजनीतिज्ञ विज्ञान के प्राध्यापक के रूप में अपने जीवन की शुरूवात करते हुए 1972 में भारतीय पुलिस सेवा में भाग लिया और वे भारत की पहली महिला आई.पी.एस. अधिकारी बनी | 2007 में वे स्वेच्छा से सेवानिवृत हों चुकी हैं इसके अलावा वे हाल ही में पुडुचेरी की लैफ्टिनेंट गवर्नर के तौर पर अपनी जिम्मेदारियां बखूबी निभा रहीं हैं उन्हें अब तक कई सम्मानों से नवाजा जा चुका है | उनका प्रदर्शन हर क्षेत्र में उत्कृष्ट रहा है |               

सर्वोच्य न्यायालय न्यायधीश फातिमा बीबी :-  1989में भारत की पहली महिला सर्वोच्य न्यायालय के न्यायधीश , न्यायमूर्ती एम फातिमा बीबी को मिला | इस पद पर नियुक्त होंने वाली पहली भारतीय महिला हैं वे 3अक्टूबर 1993 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (भारत ) की सदस्य बनी | वे तमिलनाडु की  पूर्व राज्यपाल भी रह चुकी है | फातिमा जी का पूरा नाम मीरा फातिमा बीबी है | उन्होंने केरल की निचली न्यायपालिका में अपने करियर की शुरूवात की बाद में वे 1972 में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बनी | 1984 में उच्च न्यायालय की  स्थाई न्यायधीश बनी उसके पांच साल बाद उन्हें 6अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में उन्हें नियुक्त किया गया फिर वे 29अप्रैल 1992 में सेवानिवृत हो गई|                 

लैफ्टिनेंट जनरल पुनीता अरोड़ा :- 2004 में पुनीता अरोड़ा भारतीय नौसेना में लैफ्टिनेंट जनरल के पद पर पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला हैं | भारतीय सशस्त्र बल के करियर में उन्हें 36 साल में 15 पदक के साथ सम्मानित किया गया |                                               

व्यवसायी किरण मजूमदार शॉ :- बायोकॉन लिमिटेड की अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक किरण मजूमदार शॉ पहली अरब डॉलर के कुल कारोबार में पहली भारतीय व्यवसायी महिला बन गई किरण मजूमदार शॉ हमेशा अपने काम के लिये जानी जाती हैं और तो और वे दुनिया की सबसे शक्तिशाली 100 महिलाओं की सूची में इस साल वे 68 वें नम्बर पर हैं | किरण मजूमदार शॉ को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिये कई मुसीबतों का सामना करना पड़ा इसके बाद भी वे हार नहीं मानी और आगे बढ़ी और वे भारत की सर्वाधिक सफल व्यवसायी में से एक हैं |                                                                         

इन सभी नारीशक्तियों को अपने अपने क्षेत्रों में सफल होंने के लिये  लिये कितनी समस्याओं से गुजरना पड़ा उन्होंने लैंगिकता के भेद को खत्म करते हुए आगे बढ़कर सफलता का परचम लहराया है |                                                                                                       

धन्यवाद                                                                 

रिंकी पांडेय

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