घबराने वाली कोई बात नहीं

घबराने वाली कोई बात नहीं

शिवानी एक नौकरीपेशा स्त्री है। घर-दफ्तर की सारी ही जिम्मेदारियों को अच्छी तरह निभाती है ।वह एक नौ वर्षीय बेटी की माँ भी है । बहुत प्यार करती है अपनी बेटी से,उसके स्कूल से आने के बाद समय निकालकर कभी उसे लेकर पार्क  तो कभी टहलने जाती है ।उसके साथ बच्चा बनकर खेलती भी है । उसका स्कूल होमवर्क कराने से लेकर हर पेरेंट्स मीटिंग एटेंड करती जिससे वह अपनी बेटी की प्रोग्रेस जान सके ।

अभीऑफिस में बैठकर शिवानी अपना काम कर रही थी, तभी उसके मोबाइल में कॉल आती  है। रिंकी के स्कूल से फोन? आज से पहले तो कभी नहीं आया ?उसने कॉल रिसीव की । "हैलो !मिसेज़ शिवानी !आपकी बेटी रिंकी की टीचर बात कर रही हूँ।उसकी तबियत खराब  हो रही है उसे घर ले जाइये।

 शिवानी(घबराई हुई आवाज़ में)-"क्यों क्या हुआ मेरी बेटी को?वह तो सुबह स्कूल ठीक गई थी ?टीचर-घबराइये नहीं हल्की ब्लीडिंग है।आप बस आ जाइये ।कहकर टीचर ने फोन रख दिया। वह समझ नहीं पाई कि रिंकी  के ब्लीडिंग कैसी है?तरह तरह के सवाल एक मिनट में दिमाग मे आ गए कि क्या कहीं गिर गई? चोट कैसे ?ब्लड?.......उसने अपनी छुट्टी का आवेदन पत्र लिखा और स्कूटी स्टार्ट कर सीधे रिंकी के स्कूल के लिए चल दी ।वहां जाकर देखा रिंकी स्टाफ रूम में एक किनारे पर सहमी सी बैठी है ।पास ही में टीचर भी हैं ।

माँ को देख रिंकी ने रोना शुरू कर दिया ।शिवानी उसके करीब गई उसे प्यार किया सब तरफ से उसे देखा पर कहीं कोई चोट नहीं दिखी बस उसकी यूनीफार्म  खराब हुई थी।वह देखती ही रह गई। वह कुछ बोलती उससे पहले ही टीचर बताने लगी -"लगता है आपकी बेटी के पीरियड स्टार्ट हो गए हैं। मैं क्लास ले रही थी ।मैंने आपकी बेटी को सवाल का जवाब देने के लिए खड़ा किया तो देखा स्कर्ट में ब्लड लगा है ।तबतक उसको भी शायद पता नहीं था ।ये सोचकर कि शायद कहीं चोट लगी होगी मैं फर्स्ट aid देने के लिए अपने साथ ले आई पर कहीं कोई  चोट नहीं देखी। मैं समझ गई ।और तुरंत आपको कॉल कर बुला लिया ।अब आप रिंकी को घर ले जाइये और उसका ध्यान रखिए।हां पहली बार हुआ है इसलिए तीन -चार दिन घर पर ही रखिएगा" ।

शिवानी-"जी"!कहकर रिंकी को लेकर बाहर आ गई। टीचर ने इतना कुछ कहा,पर शिवानी तो सकते में आ गई कि उसकी बेटी अभी नौ वर्ष की ही है और उसे कुछ समझ भी नहीं इन सब बातों की । कैसे समझाऊँगी? हे ईश्वर इतनी जल्दी मेरी बेटी को होने थे?

उसने रिंकी को स्कूटी पर बैठाया और घर पहुँचकर रिंकी के कपड़े चेंज करवाये,उसे गरम पानी की बॉटल दी और पेट सेंका ।रिंकी अब भी समझ नहीं पा रही थी कि कहीं कोई चोट नहीं पर खून लगातार आ रहा हैऔर मम्मी पेट सेंक रहीं हैं। उसने माँ से पूछा -माँ मुझे क्या हुआ है? कुछ नहीं बेटा तुम लड़की हो ना! इसलिए ऐसा हो रहा है ।  कल डॉ आण्टी से मिलते हैं।  फिर वह अपनी बेटी को लेकर डॉ से मिली तो  डॉ ने बताया कि आजकल की जीवन शैली और खान -पान की आदतों, अनियमितताओं के चलते कुछ लड़कियों में माहवारी समय से पूर्व आ जाना कॉमन हो गया है। आप खुद समझदार हैं इसलिए इन दिनों में  बच्ची के खानपान और उसकी देखभाल पर ध्यान देना होगा ।कुछ समय लगेगा फिर सब नॉर्मल हो जाएगा ।आपका पेशेंस और सपॉर्ट बच्ची के लिए एक मज़बूत सहारा होगा ।

 शिवानी अब पहले से काफी रिलेक्स थी फिर धीरे-धीरे उसने बेटी को माहवारी और इसकी लड़कीयों के जीवन में इसकी महत्ता को समझाया। दोस्तों! अगर आप के आस पास किसी लड़की को 9-10 साल की उम्र में पीरियड आ जाएं तो उन्हें नैतिक सपॉर्ट दीजिएगा और भयग्रस्त से बचाइयेगा।इसमेंंघबराने वाली कोई बात नहीं। 

डॉ यास्मीन अली
हल्द्वानी, नैनीताल।
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