हाय रे हाय एम. एड, ये मौसम और एम. एड

हाय रे हाय एम. एड, ये मौसम और एम. एड

जब पहली बार एक लड़की अपने ससुराल जाती है तो वो अपने साथ कपड़े ,गहने, अपने हिसाब से अपने ज़रूरत का सारा समान लाती है। पर मेरे साथ इन सबके अलावा एक बैग और था ,वो था मेरी एम .एड की किताबो से भरा बैग…

शादी के 15 दिन पहले ही मुझे सूचना मिली कि मेरे एम .एड के सारे एग्जाम रद्द हो गए है अब दुबारा से पेपर होंगे।मैं इलहाबाद की थी और ससुराल चंडीगढ़ का।मेरी शादी 8 फरवरी को हुई। 10 फरवरी की शाम को हम करीब 5 बजे घर (सुसराल) पहुंचे।

मेरे ससुराल में सास ,ससुर , पति औऱ मुझे मिलाके 4 ही लोग है। रिश्तेदार जितने भी थे वो सब इलहाबाद से ही अपने अपने घर चले गए थे। 13 फरवरी को हमे हनीमून को लिए गोआ रवाना होना था। 5 दिन का हमारा गोआ का ट्रिप था। 20 फरवरी से मेरे एम .एड के एग्जाम शुरू थे।

घर आके चाय पीके थोड़ी औपचारिक बातें कर के मम्मी पापा भी अपने कमरे में चले गए....अभी तक मेरे और इनके बीच मे बस नज़रों नज़रों में बाते हो रही थी। 

मम्मी पापा के जाने के बाद ये मेरे पास आये। मेरा हाथ पकड़ा..मेरी तो दिल की धड़कने जैसे बढ़ गयी।तभी बड़े प्यार से ये बोले... "तुम्हारी किताबों का बैग यही रखवा दिया है। तुम आराम से पढ़ लो। दो दिन यहां है पढ़ने के लिये। वैसे भी कल सुबह हमे कुल देवी के मंदिर जाना है उसमें भी करीब आधा दिन निकल जायेगा।गोआ जाके तो वैसे भी पढ़ नही पाओगी। इसलिए अभी थोड़ा पढ़ लो।मैं भी अपना ऑफिस का काम तब तक कर लेता हूँ।" इतना कहके ये चले गए...

मैंने भी अपना हाथ सर पे मारा और मेरे मुँह से निकला

"हाय रे हाय ये एम .एड 
ये मौसम और एम .एड 
मुझे पल पल ये तड़पायेे
मेरी दो टके के एम .एड ने
मेरे लाखो के पल गवाए"

ऐसा था मेरा ससुराल में पहला दिन। 
ऋचा आनंद

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