हम किसी से कम नही #घरकीमुर्गी

हम किसी से कम नही #घरकीमुर्गी

रीना एक आत्मविश्वास से परिपूर्ण पढ़ी-लिखी, मॉडर्न लड़की थी। उसके परिवार में उसकी हर बात, पसंद-नापसंद, राय को पूरा महत्त्व दिया जाता था।


कॉलेज की शिक्षा पूरी करते ही जब उसके लिए शहर के जाने-माने प्रतिष्ठित परिवार के सुपुत्र नितिन का रिश्ता आया, तो सभी घरवालों ने आपस में विचार-विमर्श कर के और रीना की इस रिश्ते के लिये पसंद जानने पर उसका रिश्ता नितिन के साथ तय कर दिया।


जल्द ही धूमधाम के साथ रीना का विवाह नितिन के साथ संपन्न हो गया।शुरु-शुरु में, दो बड़ी जेठानी, सासूमां, रीना सभी आपसी सामंजस्य के साथ गृहस्थी की गाड़ी सुचारु रुप से चला रहे थे। मगर धीरे-धीरे रीना को एहसास होने लगा, उसके परिवार में अभी भी बरसों पुरानी पितृात्मक सत्ता का बोलबाला था।


उसके घर में ससुरजी का एकाधिपत्य था। किसी भी फैसले में घर की महिलाओं को बोलने का अधिकार नही था। यहां तक कि, खाने में कब,क्या बनेगा ये तक चुनने का अधिकार भी सिर्फ घर के पुरुषों का था।


शुरुआत में रीना को लगा, वक्त के साथ-साथ, धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा। मगर, अक्सर उसे हर छोटी से छोटी बातों के लिए अपने पति या ससुर जी से इजाजत लेनी पड़ती थी। जब कभी वो खुद से कोई काम करने की कोशिश करती, तो हमेशा ससुरजी द्वारा उसे ये कहकर हतोत्साहित कर दिया जाता," ये सब तुम औरतों के बस की बात नहीं हैं।"


उसने अकेले में नितिन से भी इस बारे में बात करने की कोशिश की। मगर नितिन ने साफ शब्दों में कह दिया,"मां और घर की बाकी औरतों की तरह तुम भी बस अपने काम से काम रखा करो। हमारे यहाँ घर की औरतें किसी भी चीज़ में अपनी राय नहीं दिया करती और ना ही कोई फैसला लिया करती हैं।"


नितिन की बातें सुनकर रीना को उसकी पिछड़ी हुई सोच जानकर बहुत अफसोस हुआ। उसने एक दिन समय देखकर किचन में सासुमाँ और जेठानी से भी इस बारे में बात करने की कोशिश की।


इस पर सासुमां ने उसे समझाते हुए कहा," बेटा इसमें नितिन का कोई दोष नहीं है। बरसों से ही हमारे घर की परंपरा कुछ इस तरह की रही है,कि यहां बहू-बेटियों को कुछ बोलने का और अपनी पसंद ज़ाहिर करने का अधिकार नहीं हैं।"

"किसी भी विषय में कोई अच्छी राय देने पर भी उसे कोई अहमियत नहीं दी जाती।हम सभी को बस 'घर की मुर्गी दाल बराबर' ही समझा जाता है। अब हम सबने तो इसी परंपरा के साथ सामंजस्य बिठाना सीख लिया हैं। जितनी जल्दी तुम भी यह सीख जाओगी, तुम भी उतनी ही सुखी रहोगी।"


रीना ने माँजी से कहा," मगर ये तो गलत है मांजी। यह घर जितना मर्दों का है उतना ही हम औरतों का भी हैं। एक बार अगर सिर्फ बाहर के फैसलों लेने की बात होती तो भी ठीक था, मगर ये तो हद ही हो गई कि घर के फैसले लेने तक का हमें कोई अधिकार नहीं।"


"बरसों से चली आ रही इस परंपरा को अब तक हटाया नहीं जा सका, सिर्फ इसलिये क्योंकि इसके खिलाफ किसी ने आवाज़ नहीं उठाई। अगर हम सभी मिलकर पुरानी परंपरा को बदलने की कोशिश करेंगे, तो ज़रूर इस घर में हम सकारात्मक बदलाव ला पाएंगे।"


इतना सुनते ही, माँजी ने रीना की बात को सिरे से नकार दिया। साथ ही रीना को भी आदेश दे दिया,"हमारें घर की सुख-शांति के लिए ऐसा कुछ भी करने की कोशिश कभी मत करना।"


सासुमां और जेठानियों के पूरी तरह हथियार डाल देने पर भी रीना के हौसलों में कोई फर्क नहीं आया। उसने मन ही मन ठान लिया था कि वो इस घर में चंद सकारात्मक बदलाव ज़रूर लाएगी।


उसें इस बदलाव को लाने का एक सुनहरा मौका मिल भी गया। कोरोना और फिर लॉकडाउन के कारण उनके पारिवारिक व्यवसाय में बहुत बड़ा घाटा हुआ। दिन-रात रीना के पति, उसके जेठजी और ससुरजी इसी कोशिश में लगे रहते कि किसी तरह व्यवसाय की गाड़ी फिर से पटरी पर लाई जाए। मगर वहीं पारंपरिक घिसे-पिटे ढंग से व्यवसाय करने के कारण उनका व्यापार अब पूरी तरह से ठप्प होने के कगार पर आ पहुंचा था।


आखिरकार एक दिन खाना खाते वक्त रीना ने सभी के सम्मुख व्यवसाय को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ले जाने का प्रस्ताव रखा। शुरुआत में तो ससुरजी ने एकदम कड़क स्वर में कहा," अब घर की औरतें हमें सिखाएगी हमें व्यवसाय को किस तरह संभालना है। आज कह दिया सो कह दिया,आगे से अपनी राय अपने पास ही रखना।"


पहले तो रीना को बहुत गुस्सा आया मगर फिर उसने समझदारी से काम लेते हुए ससुरजी से कहा," पिताजी में अच्छी तरह से जानती हूं, कि आप हम सब घर की औरतों को किसी काबिल नहीं समझते। और आपको किसी भी विषय पर मेरा राय देना भी बिल्कुल पसंद नहीं है।"


"मगर मेरी एक विनती है एक बार मेरी इस सलाह को अपनाकर देखिए। अगर कुछ ही वक्त में हमारा व्यवसाय पटरी पर नहीं आता, तो भविष्य में कभी, किसी भी चीज़ में मैं अपनी राय नहीं दूंगी। मगर अगर इससे हमारे व्यवसाय को फायदा होता है, तो आप सभी मर्दों को भी फिर हम सभी घर की औरतों को घर की मुर्गी दाल बराबर समझना बंद करना होगा।"

ससुरजी को रीना के दुस्साहस पर बड़ा ही गुस्सा आया। सासूमाँ, नितिन सभी उसे इशारे से चुप होने को कह रहे थे। मगर यकायक मानों एक चमत्कार ही हो गया। ससुरजी ने अपने तीनों बेटों से कहा," तुम लोगों को ऑनलाइन व्यापार का कोई अनुभव है क्या?"


नितिन को इंटरनेट की थोड़ी बहुत जानकारी थी।इसके साथ ही रीना ने ससुर जी के समक्ष प्रस्ताव रखा कि, वो अपने भाइयों की मदद से व्यवसाय को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट करने की पूरी कोशिश करेगी।


बस फिर क्या था, ससुरजी से हरी झंडी मिलते ही सभी अपने काम में लग गए। कुछ ही महीनों में उनका पारिवारिक व्यवसाय नई ऊँचाइयों को छूने लगा।


ससुर जी को छोड़कर घर की सभी औरतें, नितिन और यहां तक कि रीना के दोनों जेठजी भी रीना की तारीफों के पुल बांधते नहीं थक रहे थे।


रीना को खुशी थी कि उनका व्यवसाय भी फिर से बहुत अच्छा चल पड़ा था।साथ ही उसे उम्मीद थी कि, जल्दी ही अब उसके घर में भी औरतों को बराबरी का दर्जा दिया जाएगा।


पति और दोनों जेठजी में तो उसे बहुत से सकारात्मक बदलाव भी देखने को मिले थे। ससुरजी अब भी उससे ज़रा एंठे हुए ही रहते थे, मगर रीना अच्छी तरह से जानती थी," अब मन ही मन उन्हें भी अच्छी तरह एहसास हो गया था कि उनके घर की औरतें किसी से कम नहीं हैं और घर की मुर्गी दाल बराबर भी नहीं होती।


उम्मीद करती हूं दोस्तों आपको मेरी यह काल्पनिक कहानी पसंद आएगी। अगर आपको यह कहानी पसंद आए तो कमेंट करके ज़रूर बताइएगा।


आपकी दोस्त,

सकीना साबुनवाला✍।

#घरकीमुर्गी

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