हमारा मिलना भी एक इत्तेफाक था....

हमारा मिलना भी एक इत्तेफाक था....

मैं आज आपको मेरी और मेरी दोस्त अनु की कहानी बताने जा रही हूं | मेरे और अनु के पति दोनों एक ही कंपनी में काम करते हैं | पहले मेरे पति की पोस्टिंग विन्धयनगर मध्यप्रदेश में थी और उनकी पोस्टिंग कोरबा छत्तीसगढ़ में थी | तो हम दोनों को तो पता भी नहीं था कि इस दुनिया में कोई अनु या श्रुति है जो कुछ समय एक - दूसरे की इतनी अच्छी दोस्त बन जायेंगी जो दोस्त कम एक - दूसरे की जुड़वां बन जायेंगी |

वैसे मेरे बहुत दोस्त हैं , मेरे बचपन की सहेलियां जो मुझे और मैं उन्हें बहुत प्यार करते हैं लेकिन एक उम्र ऐसी आती है जिसमें हम अपनी जिम्मेदारियों और गृहस्थी में उलझ जाते हैं और उम्र के साथ हममें एक समझदारी आ जाती है और इस उलझन भरी जिंदगी में अगर आपको एक ऐसा दोस्त मिल जाते जो आपको आपसे ज्यादा समझने लगे या आपकी हर मुश्किल में आपके साथ हो तो वो आपका जुड़वां ही हो सकता है | सही मायने में वो आपकी" sister from another mother" होगी | ऐसा ही रिश्ता कुछ मेरा और अनु का है |

अनु और मेरी पहली मुलाकात हमारे बच्चों के स्कूल एडमिशन के इंटरव्यू के समय में हुती थी | हमारे पतियों ने हमारी जान - पहचान कराती थी | हम दोनों ने भी एक दूसरे का अभिवादन किया और अपने बच्चों के इंटरव्यू दिलाये और अपने - अपने घर आ गये |फिर हममें कोई खास बात नहीं हुई | स्कूल में मिलते बच्चों के लेने छोड़न में और हाय - वाय होती और बात ख़त्म 

फिर अचानक मेरे पास लेडिज क्लब कमेटी के लिए फोन आया और मैंने हां कर दी | अनु वहां पहले से ही थी | वहां से हम दोनो की दोस्ती शुरू हुती | अनु का व्यवहार बहुत ही मस्त है जहां भी जाती धमाल मचा देती और उसमें तड़का मैं लगा देती | माहौल ही बन जाता | फिर एक साल हम दोनों ने एक - साथ काम किया और हम दोनों एक दूसरे के और करीब आ गये | हम दोनों एक - दूसरे को जिज्जी कहकर बुलाते हैं जो शायद आधी टाउन शिप जानती है | हां कुछ लोगों को हमारा ये दोस्ताना पंसद नहीं आया पर हमें कोई फर्क नहीं पड़ता | हम तो एक - दूसरे के सुख - दुख में साथ होते हैं |

अभी पिछली साल अनु का ट्रांसवर दूसरे शहर में हो गया लेकिन हम फिर भी एक - दूसरे के साथ रहते हैं | वाट्स ऐप पर दिन भर हमारी बातें होती हैं | दूर रहकर भी हम एक-दूसरे के दिल में रहते हैं | और  जब भी हम कुछ किसी की बात करें तो मेरे पति कहते हैं " जिज्जी को बता दी की नहीं , नहीं तो तुम्हारा खाना हजम नहीं होंगा| ऐसे ही एक दिन हम दोनों ने किसी के बारे में बात की | मेरे पति से मैनै बोला " सुनिये अनु को वो मिली थी जो एक दम पगलिया सी नहीं रहती थी "| मेरे पति बोले हां सच में बस एक तुम और तुम्हारी जिज्जी पगलिया सी नहीं है बाकी सब पगलिया है "| 

मैं हंसने लगी बोली  " हां ,हम दोनों हैं ही निराले "|

बस आप लोग दुआ करिये कि जल्दी ही हम दोनो की मुलाकात हो | वैसे हम दोनों की अनगिनत बातें हैं लेकिन मैं आप लोगों को सुनाकर और बोल नहीं करना चाहती | अब अपनी कलम को यहीं विराम देती हूं |

स्वरचित

श्रुति त्रिपाठी

# मेरी जुड़वां

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