हिसाब बराबर #मस्ती

 हिसाब बराबर #मस्ती


निशा बारहवीं के बाद अपनी मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी कर रही थी।उससे तीन साल बड़ा उसका भाई नमन मेडिकल के सेकंड ईयर में पढ़ रहा था। निशा की इकलौती बुआ ऑस्ट्रेलिया में रहती थी।उनके बेटे की शादी पक्की हुई तो उन्होंने अपने इकलौते भाई यानी कि निशा के पापा को सपरिवार शादी में बुलाया। नमन की भी पढ़ाई चल रही थी निशा भी अपनी तैयारी में व्यस्त थी इसलिए उन दोनों का जाना संभव नहीं था पर निशा की मम्मी पापा का जाना बहुत जरूरी था।तो वे लोग ऑस्ट्रेलिया के लिए निकल गए। निशा और नमन ने उन्हें समझाया कि जब आप इतनी दूर जा रहे हो तो वहाँ अच्छे से घूम-फिर कर आना। उनका पूरा एक महीने का ऑस्ट्रेलिया में रहने का प्लान बनाया।


निशा की मम्मी पापा लगभग रोज उन दोनों से बात करते।वहां के बारे में बताते और साथ ही शादी की तैयारियों के बारे में भी बताते रहते।निशा और नमन बहुत खुश थे कि शादी के बहाने ही सही उनकी मम्मी पापा को बुआ के पास रहने का विदेश घूमने का मौका मिला।

मम्मी पापा के जाने के लगभग दस दिन बाद नमन को बुखार आया। तीन चार दिन हो गए लेकिन बुखार कम ही नहीं हो रहा था। जब ब्लड टेस्ट कराया तो पता चला कि डेंगू हो गया है। अब निशा और नमन दोनों ही परेशान हो गए। वे दोनों मम्मी पापा को परेशान नहीं करना चाहते थे। डॉक्टर ने नमन को हॉस्पिटल में एडमिट करने का बोला।निशा ने हॉस्पिटल की पूरी जिम्मेदारी अपने सिर पर ले ली उन्होंने मम्मी पापा को बस यह बताया कि नमन को बुखार है पर यह नहीं बताया कि उसे एडमिट करना पड़ा है।


धीरे-धीरे नमन के ब्लड प्लेटलेट काउंट बढ़ने लगे और उसकी हालत में भी सुधार आने लगा। दो दिन में नमन घर वापस आ गया। निशा ने उसके खाने-पीने का पूरा ध्यान रखा। उसकी खूब सेवा की लगभग पंद्रह दिन में नमन पूरी तरह से ठीक हो गया। जब उसके मम्मी पापा वापस आए, तब निशा ने उन्हें पूरी बात बताई। हालांकि निशा के मम्मी पापा नाराज होकर बोले,"तुमने पहले नहीं बताया इतना परेशान होते रहे हमें बता देते तो हम वापस आ जाते खैर अंत भला तो सब भला।"

अगले महीने रक्षाबंधन का त्यौहार था।रक्षाबंधन वाले दिन आरती की थाली लेकर निशा ने नमन को तिलक लगाया,राखी बांधी और बोली,"लाओ भैया मेरा तोहफा ।"


नमन बोला,"तू जल्दी से आंख बंद करके हाथ आगे कर।"

निशा खुश हो गई और सोचने लगी कि देखें भैया क्या तोहफा देता है?

नमन ने अपनी जेब से एक राखी निकाली और निशा की कलाई पर बांध दी। निशा के मम्मी पापा चकित होकर एक स्वर में बोले,"अरे,ये उल्टी गंगा क्यों बहा रहा है नमन? बहन,भाई को राखी बांधती है। भाई बहन को नहीं।"

नमन , निशा के सिर पर हाथ फेरकर बोला,"मां मेरी छोटी बहन ने, मेरे बीमार पड़ने पर,मुझे संभाला।मेरा इतना साथ दिया,मेरी रक्षा की तो फिर यह भी तो मेरी रक्षक हुई ना? तो आज से मैं भी इसे राखी बंधूगा। जब मुझे जरूरत पड़ेगी ये मेरी रक्षा करेगी और जब मुझे जरूरत पड़े मैं इसकी रक्षा करूं।"

निशा नमन को हल्के से,मुक्का मारते हुए बोली,"अच्छा तो यह सब तोहफा देने से बचने का बहाना है आपका।आपने मुझे राखी बांधी है पर मैं आपको कोई तोहफा नहीं दूंगी।"

नमन बोला," कंजूस कहीं की.... मैं तो तेरे लिए पहले ही तोहफ़ा ले आया था।यह रहा तेरा तोहफा।" और एक सुंदर सी घड़ी,निशा के हाथ में थमा दी।

फिर नमन शरारत से बोला,"अब अगले साल से मैं भी तुझे राखी बाँधूँगा तो तू भी मुझे तोहफा देगी । फिर हम दोनों का हिसाब हमेशा बराबर रहेगा।" और दोनों हंसकर,एक दूसरे के गले लग गए।

मम्मी ने मुस्कुराकर, दोनों की बलाएं लेते हुए बोली,"बस तुम दोनों, भाई-बहनों का प्यार हमेशा ऐसे ही बना रहे।"



रितु अग्रवाल

( मौलिक ,स्वरचित,अप्रकाशित)

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