#हिंदी की पुकार# मांगे अपनी पहचान

#हिंदी की पुकार# मांगे अपनी पहचान

हर दिन पुकार लगाती है।

हिंदी भाषा अपनी पहचान मांगती है।

जिस भाषा में हमने बोलना सीखा।

आज बाहर वो भाषा क्यों नकारी जाती है।

हमारे ग्रंथों की पहचान ये भाषा।

हमारे राष्ट्र की शान ये भाषा।

हिंद को एक सूत्र में बांधे ये भाषा।

फिर नौकरी के लिए हम क्यों अपनाते दूसरी भाषा।

क्यों सिर्फ एक दिन ही हिन्दी दिवस हम बनाएं।

क्यों न अपने बच्चों को हर एक दिन इस भाषा से मिलवाए।   


उनकी इससे पहचान कराए,उनन्नासी और नवासी का भेद उन्हें समझाए।

हर भाषा का मान उन्हें समझाए, लेकिन हिंदी हमारी मातृभाषा इसका सम्मान सबसे पहले ये उन्हें बताए        


हर दिन पुकार लगाती है।

हिंदी भाषा अपनी पहचान मांगती है।

जिस भाषा में हमने बोलना सीखा।

आज बाहर वो भाषा क्यों नकारी जाती है।

हमारे ग्रंथों की पहचान ये भाषा।

हमारे राष्ट्र की शान ये भाषा।

हिंद को एक सूत्र में बांधे ये भाषा।

फिर नौकरी के लिए हम क्यों अपनाते दूसरी भाषा।

क्यों सिर्फ एक दिन ही हिन्दी दिवस हम बनाएं।

क्यों न अपने बच्चों को हर एक दिन इस भाषा से मिलवाए।   


उनकी इससे पहचान कराए,उनन्नासी और नवासी का भेद उन्हें समझाए।

हर भाषा का मान उन्हें समझाए, लेकिन हिंदी हमारी मातृभाषा इसका सम्मान सबसे पहले ये उन्हें बताए   

हिंदी भाषा हमें हमसे मिलाती अपनी सहजता से दिल में उतर जाती।

हम एक हिंद के वासी ये सीख हमें सिखाती।


    


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