हाथों से बुना वो टॉप: Blog post by Sunita Tiwari

हाथों से बुना वो टॉप: Blog post by Sunita Tiwari

"मम्मी... जो आपने मेरे लिए दो टॉप बुने थे न....कॉलेज टाइम में...वो हैं क्या अभी भी आपके पास"????

ससुराल से आई बेटी ने मुझे ऊनी कपड़ों को धूप में डालते देखा,तो पूछ बैठी।


"हां, हैं ना....इतने चाव से,इतने सुंदर डिजाइन डाल कर बुने थे...तो कैसे किसी को दे देती भला...लेकिन क्यों पूछ रही"???

"बस यूं ही...अच्छा आप थक गयीं होंगी न...मैं गरमागरम अदरक वाली चाय बना कर लाती हूँ"!!!! कहकर वो किचेन में चली गयी।


मैं वहीं धूप में आराम से कुर्सी पर बैठ गयी और बेटी की बातों ने मुझे अतीत में भेज दिया.....


बेटी, और उससे छोटा बेटा,स्कूल में पढ़ रहे थे। मुझे उस वक्त स्वेटर बुनने का जुनून की हद तक शौक था और बड़े ही सुंदर,कलरफुल स्वेटर्स बनाती। सभी मेरे इस हुनर के कायल थे।

बेटा - बेटी जुड़वां थे। दोनों के लिए मैं खूब स्वेटर्स बुनती। वो भी बहुत ही चाव से पहनते,क्योंकि कोचिंग से आते वक्त शाम हो जाती थी और साइकिल पर दोनों को ठंड भी खूब लगती थी। बुने स्वेटर्स में जो गर्माहट होती है,वो रेडीमेड स्वेटर्स में नहीं होती थी। उनके दोस्त कॉमन ही थे और अक्सर कहते,"यार आंटी से मेरे लिए भी स्वेटर बनवा दो".....तो बच्चों का सीना चौड़ा हो जाता था।

समय बीता...बिटिया जब चंडीगढ़ अपनी ट्रेनिंग पर गयी,तब भी उन स्वेटर्स को लेकर गयी। मुझे भी बहुत अच्छा लगता और तसल्ली भी होती।

अब धीरे धीरे मॉल कल्चर पैर पसारने लगा था...जहां एक से एक स्वेटर्स,जैकेट मिल जाते। बच्चों को वही भाने लगे। हाथों के बुने सुंदर स्वेटर्स,जिनपर कभी वो गर्व करते थे....बड़े संदूक की शोभा बढ़ाने लगे।

फिर वो ब्याह कर ससुराल चली गयी। बेटा जॉब के लिए दूसरे शहर। सर्दियों में मैं उन्हें धूप लगाती, कुछ देर सीने से लगा कर रखती....मानों बच्चों का ही सुखद स्पर्श मुझे मिल जाता। पति कहते भी,किसी जरूरत मंद को दे दो...तुम्हें आशीर्वाद देगा। बहुत सारे,उनके रेडीमेड स्वेटर,ब्लेजर बांट भी दिए...लेकिन ये तीन स्वेटर...दो टॉप बेटी के और एक स्वेटर बेटे का...नहीं दे सकी।

"मम्मी...चाय..और साथ में मूंगफली भी" बेटी की आवाज से वर्तमान में लौट आयी।

वे दोनों टॉप,बिल्कुल नीचे रखे थे... उन्हें निकाला। बेटी ने लपक कर दोनों थाम लिए।

"इस बार इन्हें ले जाऊंगी अपने साथ"वो चहक कर बोली

मैंने हंसकर कहा,"अरे....तुम्हारे मॉल वाले ब्रांडेड कपड़ों के आगे इनकी क्या बिसात होगी भला"????

"उनमें वो गर्माहट नहीं होती माँ......आपके स्नेहिल स्पर्श और प्यार की गर्माहट......जो इनके एक एक फंदे में आपने बुनी है"!!!!बेटी भावुक हो उठी थी।

मेरी भी आंखे बरस पड़ीं। सच है.....बच्चे कितने भी बड़े हो जाएं...माँ के स्नेहिल स्पर्श के लिए उनका मन सदैव तरसता है।


#सर्दियों की गर्माहट

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