The Pink Comrade

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पछताने से क्या होगा

पछताने से क्या होगा ,जो बीत गया , सो बीत गया।पर बैठ जाने से क्या होगा ,वक्त का पहिया नही रुकेगा ...फल निर्धारित तो कर्म से होगा ,जीत हार में क्यों फंसते हो,कदम बढ़ाने से क्यों डरते हो??आत्मविश्वास से बढ़ते...

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आत्मबोध

क्या पाने आया था,क्या मैने पाया।मोह माया में फंसकर,धूमिल हो गई मेरी छाया।अपनों संग मैं यूं बंधा,स्वयं को मैने खो दिया।प्रेम प्यार में रहना चाहा ,ईर्ष्या से भी दूर न रह पाया।स्वयं...

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हाय रे स्कूटी

दो पहिए की सवारी करना सीख ले हम भी,सोचऐसा ,पति देव को तैयार कियातुम भी सुबह मॉर्निंग वॉक पर चलो और अपने बढ़ते पेट को कम करो ,समय मिले तो मुझे भी थोड़ा स्कूटी सिखा दिया करो,न चलाई हो जिसने कभी साइकिल,सीखेगी...

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ज़िंदगी अगर किताब होती

जिंदगी अगर किताब होतीहोती ग़र ज़िंदगी एक किताब सुनहरे उसमें ख्वाब लिखता, करके दूर गमों को खुशियों के मैं उसमें रंग भरता, ना लिखता जुदाई कभी नसीब में किसी की, मिलन उसमें बेहिसाब लिखता।होती ग़र ज़िंदगी...

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मां की आंखें

उम्र के इस पड़ाव पर आकर जाना है राज मां की आंखों का, खुद मां बन के एहसास हुआ आज मां के जज्बातों का ।क्यों मुझे उदास देखकर कारण ढूंढती थी वो आंखें, क्यों मुझे खिलखिलाता देख कर मुस्कुरा जाती थी वो आंखें,...

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Women's Day writing challenge winners: Break The Bias

Hello Dear Comrades,Join us to congratulate our Women's Day #BreakTheBias challenge winners ??Saumya Nair Goyal's English...

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फिर कभी

"फिर कभी"आज थोड़ा जी भरकर देखना है तुमको शेष कभी शाम ढ़ले मिल लूँगी फिर कभी, आज तेरी गहरी सी आँखों में डूब जाऊँ चाहत की चाशनी में नहाऊँगी फिर कभी..करनी है गुफ़्तगु चंद ज़रा लफ़्ज़ों में ढ़ेर सारी बातों में खो...

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कह दो न चाँद मुबारक

"कह दो न चाँद मुबारक"ईद के दिन, रात की ठोड़ी पर बैठी स्याह शाम अकेले कोई कैसे बिताएं? सूनी है दिल की अंजुमन, खामोश निगाहें रस्ता तेरा निहारे,सूने झरोखे में मेरा चाँद नज़र आए तो उदास मन में रौनक-ए-बहार आ जाए..आज...

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चेहरे

रोज आँखों से गुजरते हैं कुछ जाने अनजाने चेहरे,कुछ पर गम के बादल ,कुछ पर खुशी के पहरे।कुछ पर मुस्कान तारी है,कुछ हँसी की फुलवारी है,कुछ अनुभवों से पगे होते,कुछ दिल को लगे प्यारी है।रोज आँखों...

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पिघलता वक्त

वक्त - वक्त की बात है , ना जाने कब क्या मोड़ ले ले ये वक्त , रेत तो ठहर जाती है पर भर के लिए हाथों में वक्त निकल जाता है पानी की तरह ,जैसे पानी नहीं ठहर सकता हाथों में , वक्त भी कहां ठहरा कभी किसी के लिए ।क़िस्मत...

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