मुझे गर्व है मैं हिन्दी मिडियम से हूँ

मुझे गर्व है मैं हिन्दी मिडियम से हूँ

जब मै ९ साल की थी तब हम गाँव से शहर (चेन्नई ) शिफ़्ट हुये थे। क्योंकि मै गाँव से थी मुझे अंग्रेज़ी बिलकुल नही आती थी इसलिये मुझे हिन्दी मिडियम में डाला गया। समय के साथ साथ मैंने अंग्रेज़ी सिखी। लेकिन अपनी आगे की पढ़ाई भी मैंने हिन्दी मिडियम से ही की।मेरी हिन्दी शुरूआत से ही काफ़ी अच्छी थी। लेकिन अंग्रेज़ी मिडियम के बच्चों को जितनी सुविधाये मिलती थी उतनी हमें नही दी जाती थी। हर काम में उन्हें आगे भेजा जाता था। यह सिलसिला मैंने और मेरी एक दोस्त ने बंद करवाया जब हम दोनों भी हर वह चीज़ बख़ूबी से करते थे जितना अंग्रेज़ी मिडियम के बच्चे । स्कूल की ज़िम्मेदारियों से लेकर दुसरे कार्यक्रम में भी हम बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले थे। तब हमारे अध्यापिकाओं की सोच बदलने लगी।

मै जिस स्कूल में पढ़ती थी वहा बोर्ड की परीक्षा मे अंग्रेज़ी और हिन्दी मिडियम के बच्चों को मिलाकर रैंक दिये जाते थे जिससे सभी अवार्ड ज़्यादातर अंग्रेज़ी मिडियम के बच्चों को मिलते थे। मै अपनी कक्षा मे हर बार प्रथम या दुसरा रैंक लाती थी। जब मै दसवीं मे आयी तब मैंने भी उतनी ही मेहनत की जितनी दुसरी मिडियम के बच्चों ने। मै बोर्ड मै अपनी कक्षा मे प्रथम और स्कूल मे तीसरे स्थान पर थी। मेरा नाम अख़बार मे भी आया था। इसके पहले किसी भी हिन्दी मिडियम की छात्रा को एसा सम्मान नही मिला था। मुझे अपने उपर गर्व था और सभी अध्यापिकाओं को भी।

और उसी वर्ष से हमारे स्कूल मे दोनों मिडियम के बच्चों को अलग अलग सम्मानित  किया जाने लगा। मुझे पाँच मे से चार विषयों के लिये पुरूस्कार दिये गये। सभी को मुझपर गर्व था।

आज मै जितनी अच्छी हिन्दी बोल पाती हू उतनी ही अच्छी अंग्रेज़ी । मैंने अपने आसपास ज़्यादातर लोगों को देखा है जो अंग्रेज़ी मिडियम से है उनकी हिन्दी कमजोर है। कही लोग ठीक से हिन्दी बोल भी नही पाते।

मुझे गर्व है कि मैंने अपनी पढ़ाई हिन्दी मिडियम से कि जिसके कारण मुझे अपनी स्कूल मे अलग पहचान मिली जो शायद मुझे अंग्रेज़ी मिडियम मे पढ़कर नही मिलती। हिन्दी ने मेरी और मेरे जैसी कही छात्राओं की ज़िन्दगी बदल दीं।

What's Your Reaction?

like
0
dislike
0
love
0
funny
0
angry
0
sad
0
wow
1