हम तो भई जैसे है वैसे रहेंगे

हम तो भई जैसे है वैसे रहेंगे

हम चारों तरफ इंसानो से घिरे हैं लेकिन इस  दुनिया में सब एक से नहीं होते । अगर हम ध्यान दे तो पाएँगे  कि यहाँ   तीन  तरह के व्यक्तित्व वाले लोग  हैं। पहले वे लोग  जो अपने ही टूल और टवाय यानी अपनी दुनिया में व्यस्त एवं मस्त रहते हैं ।लोग क्या कह रहे हैं इस बात का  उन्हे कोई फर्क नहीं पड़ता।किसी की सोच का उनपर कोई असर नहीं होता।कितनी भी मुश्किले हो वे हमेशा हँसते रहते है।

दूसरे वे लोग होते हैं जो चाहते हैं कि लोग उनकी तरफ आकर्षित हों। इस के लिए वे लगातार प्रयास करते हैं।वे कुछ ऐसा करते रहते है कि लोगों का मनोरंजन होता रहे। वे बड़े मिलनसार होते हैं, बड़े खुश मिजाज, मस्तमौला होंगे।

तीसरे  प्रकार के व्यक्तित्व में वे लोग आते हैं जो सलाह और मशवरा लेने में यकीन रखते हैं। उन पर एक खास प्रकार का दबाव बना रहता है कि लोग क्या कहेंगे ।हमेशा इस कोशिश में रहते हैं कि कहीं लोग उनसे नाराज ना हो जाए। ऐसे लोग स्वआलोचक होते हैं। सबसे मुश्किल बात यह है कि वे अपनी कमजोरियों को और बड़ा बना कर देखते हैं, जिससे उनकी खूबी दबी रह  जाती है और बाहर नहीं आ पाती है ।उस पर फोकस नहीं कर पाते हैं। कोई दूसरा उनकी कमी  क्या निकालेगा,वे  खुद अपनी कमियां बता देते हैं।

आप सोचे कि इस  में से आप किस प्रकार के व्यक्तित्व है? यदि आप तीसरी श्रेणी में है तो आप को समझना होगा कि दुनिया वही देखेगी जो आप खुद को देखेंगे या समझेंगे ।खुद को आदर देंगे, इसे आगे बढ़ाने में लगातार प्रयासरत रहेंगे तो एक दिन दुनिया आपको सलाम जरूर करेगी। ना भूले के आत्मविश्वास खुद को आगे बढ़ाने की दिशा में पहला कदम है।इसलिए खुद पर विश्वास करना आना चाहिए। हमारा कोई भी व्यक्तित्व हो ,हमे खुद को अहमियत देना चाहिए। अगर हम मे कोई कमी है तो उसे सुधारना चाहिए और खुश रहना चाहिए।

डाॅ मधु कश्यप 

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