ईश्वर / मेरी पसंद

 ईश्वर / मेरी पसंद

  ये रहस्य मैं खोल देता हूँ, मैं निशब्द हूँ फिर भी बोल देता हूँ, मैं खामोश हूँ इस चुप्पी को मैं तोड़ देता हूँ,सत्य को उजागर कर इस पथ पर बलि दे देता हूँ क्योंकि जिस जगह तू नहीं है वहाँ पर मेरी ख्वाहिशें भी अधूरी है, तू मुझे मिल जाए तो मेरी जिंदगी की शुरुआत भी पूरी है, तेरे साथ जुड़ी है मेरी जिंदगी की सारी खुशियाँ बाकी सब के साथ तो मेरा हंसना भी मजबूरी है तेरे बिना तो मेरी जिंदगी भी अधूरी है जिस जगह तू नहीं... ए - मेरे मालिक.....                            

जब मैं तुमसे मिली तो जाना कि जिंदगी क्या होती है क्या इतनी खूबसूरत आवारगी भी होती है, तेरे सजदे में सिर झुकता है मेरा,क्या बताऊँ कि कौन तू लगता है मेरा| वो शब्द कहाँ से लाऊँ जो बयान कर सकूँ, अपने आपको फिर भी लिख रही हूँ ये तेरी रहमत है वरना मुझ जैसा इंसान कहाँ लिख पाता, इतना सबकुछ जो तूने दिया वो क्या कम है खोज कर रहा हूँ उन शब्दों को जो बयान कर सकूँ....               


वो एक तुम्हीं थे जो माटी की सौंधी खूशबू लाए, वो तुम्हीं थे जो सावन की रिमझिम फुहार लाए, वो तुम्हीं थे महकते गुलाब की खूशबू लाए, तपती दोपहरी की घनी छांव लाए, दूर मंजिल की राह में सुस्ताने का पड़ाव लाए और इस जीवन के मार्गदर्शक बनकर हम सबकी जिंदगी में एक नया मोड़ लाए, क्योंकि हर पहर पर तेरा पहरा है, तू मान भी ले आज ये बात कि हर श्वास श्वास में नाम तेरा है मेरे ए - खुदा...                      


 क्योंकि मैं तुमसे प्यार इसलिए नही करता कि तुम बहुत सुंदर हो, मैं तुमसे प्यार इसलिए करता हूँ कि तुमसे मिलने के बाद ऐसा लगा कि इस जीवन में एक क्रांति आएगी और कहेगी कि.........                         


 जीत भी मेरी है, हार भी मेरी है,   जिंदगी के इस सफर में तकरार भी मेरी है,  मंजिल जब मिलने लगे तो रस्ते खुद-ब-खुद बन      जातेहै,   ना जाने कौन से भेस में नारायण दिख जाते हैं |

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