इक पल का जीना

इक पल का जीना

"आज तो लगता है मैंने पूरी जिंदगी जी ली ।कुछ मिले ना मिले मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता ।"अक्सर हमें लोग ऐसा कहते मिल जाते हैं ।क्या एक दिन में ही पूरी जिंदगी को खुशियाँ हम पा लेते हैं? या ऐसा कुछ खास करते हैं जो उनके लिए यादगार बन जाता है ।एक कहावत है "रोम वाॅज नॉट बिल्ट इन ए डे ।"रोम एक दिन में नहीं बना था ।कोई भी काम अगर हम कर रहे हैं तो वह एक दिन में नहीं पूरा हो सकता ।

एक दिन में हम खुशी नहीं प्राप्त कर सकते। एक या दो मिनट की खुशी क्षणिक होती है जो पल भर के लिए मिली पर चली जाएगी ।हमारे साथ जो खुशी रहने वाली है वह स्थाई होती है। यह स्थाई खुशी एक दिन के प्रयास से नहीं मिलती बल्कि प्रतिदिन के प्रयास से आती है।
हर रोज व्यायाम /योगा करेंगे तो हमारा शरीर स्वस्थ रहेगा और हम खुश रहेंगे ।रोज के कामों से हम अपने लिए कुछ समय निकालेंगे। भले वस समय पाँच मिनट का ही हो ,वह समय हमे एक नई ऊर्जा और खुशी से भर देगे। अगर हम खुद का ध्यान नहीं देंगे तो औरों पर कैसे ध्यान पाते पाएँगे? हमें जीवन के हर पल को जीना सीखना होगा ।कभी भी अपनी खुशियाँ , सुकून पाने के लिए हमें दूसरों का सहारा नहीं लेना चाहिए। अगर किसी ने हमारी तारीफ की तो हम खुश हो गए और किसी ने हमारी शिकायत कर दी तो हमारा दिन खराब हो गया।

हमें अपनी खुशी का जिम्मा किसी और को नहीं देना चाहिए ।इसके लिए हमें हर पल को जीना सीखना होगा और यह गाना सुन सकते हैं कि रुक जाना नहीं तू कहीं हार के।हर पल को हँस कर जीने से जिन्दगी कितनी हसीन बीतती है ,यह हम जानते है।फिर क्यो न हँस कर देखा जाए।जब रोने से कुछ नही मिला तो हँस कर देख लिया जाए।आइए दोस्तो!आज खुद से वादा करते है कि हम हर पल को जीना सीखेंगे। हँसने के लिए किसी के मोहताज नही बनेगें।

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