उड़ान भरने दीजिए

उड़ान भरने दीजिए

और कॉलेज कैसा चल रहा है?
जी ठीक पापा |
एक्जाम कब से शुरू हैं?
अगले महीने से पापा |

और लाइब्रेरी जा रही हो न रेगुलर, पढ़ने से दिमाग तेज होता है |जी पापा,
पापा वो आपसे एक बात कहनी थी, हाँ कहो बेटा
पापा मैं वो न, वो कुछ नहीं पापा बस ऐसे ही |
अरे बोलो बेटा, क्या बात है?

अरे अब रहने भी दीजिए, वैसे भी आजकल लाइब्रेरी में ज्यादा टाइम बिताने के कारण काफी देर से घर आ रही है, थक जाती है अब आराम करने दीजिए उसे, |

जा बेटा आराम कर|
अरे तेरे पाँव में क्या हुआ ‘? ऐसे लंगड़ा कर क्यों चल रही है
वो कुछ नहीं जरा सी मोच आ गई है, सुबह तक ठीक हो जाएगी, माँ आपसे एक बात बोलूँ, मुझे इंजीनियर नहीं बनना मुझे हॉकी प्लेयर बनना है |
अरे धीरे बोल लाडो, पापा ने सुन लिया तो! लड़की जात है तू, लोग क्या कहेंगे! सोचा है तूने’!
क्या बातें हो रही है भाई गुपचुप गुपचुप माँ बेटी में?
अरे कुछ नहीं जी वो लाडो ये कह रही थी कि
माँ बार बार झूठ बोलने से एक बार सच बोल लेना बेहतर होता है |

पापा वो मैं हॉकी प्लेयर बनना चाहती हूँ, इसलिए कॉलेज के बाद रुक कर प्रैक्टिस करती हूँ |और पापा लाइब्रेरी की वो मोटी मोटी किताबें मुझे बिल्कुल समझ नहीं आती!!

अरे बस इतनी सी बात इसे बताने में इतनी घबड़ाहट क्यों, और सुन हॉकी का इस्तेमाल सिर्फ खेलने के लिए करना, किसी को मारने के लिए नहीं |

ख्वाबों को पूरे करने दीजिए,
आसमान में
उड़ान भरने दीजिए
मुट्ठी में बंद करने दीजिए दुनिया को
किस्मत अपनी बेटियों की संवरने दीजिए

जो एक बार विश्वास कीजिए उन पर
खुद ही खुद की मंजिल
तय करने दीजिए
रस्ते खुलने दीजिए उनके लिए अब
खुद ही गिर कर
खुद ही संभलने दीजिए
काट दीजिए अब
सारी बेड़ियाँ
उन्हें दौड़ने दीजिए
अब न झूठ बोलना पड़े
उन्हें खुद की कोई इक्षा
पूरी करने के लिए
उन्हें अब सच
के साथ चलने दीजिए |
अब बेटियों को भी
थोड़ा खुद के लिए
उड़ने दीजिए |

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